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कहीं वेनेजुएला में सत्ता परिवर्तन का दांव ट्रंप के लिए उल्टा न पड़ जाए? पहले भी अमेरिका को मिल चुका है 'बड़ा धोखा'

अमेरिका द्वारा किए गए सत्ता परिवर्तन के प्रयासों का इतिहास हिंसा, अस्थिरता और विफल लोकतांत्रिक प्रयोगों से भरा रहा है. अफगानिस्तान और इराक इसके बड़े उदाहरण हैं. अब डोनाल्ड ट्रंप द्वारा वेनेजुएला में निकोलस मादुरो को हटाने की सैन्य कार्रवाई ने वही पुराने सवाल खड़े कर दिए हैं. सैन्य रूप से सफल दिखने वाला यह ऑपरेशन राजनीतिक और रणनीतिक रूप से अमेरिका को एक बार फिर खतरनाक रास्ते पर ले जा सकता है. पढ़ें यह खास रिपोर्ट...

कहीं वेनेजुएला में सत्ता परिवर्तन का दांव ट्रंप के लिए उल्टा न पड़ जाए? पहले भी अमेरिका को मिल चुका है बड़ा धोखा
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( Image Source:  x.com/WhiteHouse )

US led regime change history , Trump Venezuela intervention, Maduro capture news: अमेरिका जब भी किसी देश में सत्ता परिवर्तन की कोशिश करता है, उसके नतीजे अक्सर उम्मीदों के बिल्कुल उलट निकलते हैं. इतिहास इसकी गवाही देता है. 2001 में अमेरिका समर्थित सेनाएं कुछ ही हफ्तों में काबुल पहुंच गई थीं. तालिबान सत्ता से बाहर हो गया और वॉशिंगटन के समर्थन से हामिद करज़ई को अफगानिस्तान का नया नेता बनाया गया. उस वक्त तत्कालीन राष्ट्रपति जॉर्ज बुश ने मध्य एशिया में लोकतंत्र की जड़ें मजबूत होने की बात कही थी, लेकिन दो दशक बाद वही तालिबान उतनी ही तेजी से सत्ता में लौट आया, जितनी तेजी से हटाया गया था.

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इसी तरह 2003 में इराक में अमेरिकी सेनाओं ने सद्दाम हुसैन की सरकार गिरा दी. अमेरिका ने वहां लोकतंत्र स्थापित करने का दावा किया, लेकिन नतीजा एक लंबे विद्रोह, सांप्रदायिक गृहयुद्ध, पूरे क्षेत्र की अस्थिरता और अंततः इस्लामिक स्टेट (ISIS) जैसे आतंकी संगठन के उभार के रूप में सामने आया. ये असर आज भी मध्य पूर्व को झकझोर रहा है. यही वह ऐतिहासिक पृष्ठभूमि है, जिसमें डोनाल्ड ट्रंप की ताजा विदेशी सैन्य कार्रवाई को समझा जाना चाहिए.

ट्रंप का वेनेजुएला दांव

शनिवार को राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने वेनेजुएला में अमेरिकी सेना द्वारा की गई कार्रवाई को 'पूरी तरह सफल' बताते हुए खुलकर जश्न मनाया. इस ऑपरेशन में स्पेशल फोर्सेज, हवाई हमले और नौसैनिक तैनाती शामिल थी, जिसके बाद राष्ट्रपति निकोलस मादुरो को कराकस से पकड़कर अमेरिकी हिरासत में ले लिया गया. सैन्य दृष्टि से यह मिशन सफल रहा. अमेरिकी अधिकारियों के मुताबिक, इस ऑपरेशन में कोई भी अमेरिकी सैनिक मारा नहीं गया। मादुरो को सत्ता से हटा दिया गया और अमेरिका ले जाया गया. ताकत के खुले प्रदर्शन में विश्वास रखने वाले ट्रंप के लिए यह एक त्वरित और प्रभावशाली जीत थी... लेकिन राजनीतिक स्तर पर यह कदम कहीं ज्यादा जोखिम भरा साबित हो सकता है.

‘एंडलेस वॉर’ के खिलाफ बोलने वाले ट्रंप खुद फंसे

ट्रंप ने सालों तक अमेरिका की 'एंडलेस वॉर' नीति का विरोध किया है. वे इराक युद्ध को एक ऐतिहासिक भूल बताते रहे हैं और खुद को ‘नियो-कॉन युद्धों’ के खिलाफ खड़ा करते रहे हैं. सत्ता में वापसी के समय उन्होंने खुद को 'शांति का राष्ट्रपति' बताया था, लेकिन सत्ता में लौटने के एक साल के भीतर ही अमेरिका कई मोर्चों पर सैन्य टकराव में उलझ चुका है. वेनेजुएला में इस बड़े सैन्य हस्तक्षेप ने ट्रंप के अपने ही बयान और उनके समर्थकों की उम्मीदों पर सवाल खड़े कर दिए हैं.

अमेरिका का लंबा रिकॉर्ड: सत्ता परिवर्तन और अराजकता

  • संयुक्त राज्य अमेरिका पिछले 120 वर्षों में करीब 35 विदेशी नेताओं को सत्ता से हटाने में भूमिका निभा चुका है. यह दुनिया भर में हुए कुल जबरन सत्ता परिवर्तन का लगभग एक-तिहाई हिस्सा है. विशेषज्ञ इसे ‘फॉरेन-इम्पोज़्ड रेजीम चेंज’ (FIRC) कहते हैं. आंकड़े बताते हैं कि जब किसी देश में बाहरी ताकत के जरिए सत्ता बदली जाती है, तो लगभग एक-तिहाई मामलों में 10 साल के भीतर गृहयुद्ध छिड़ जाता है.
  • 1954 में ग्वाटेमाला से लेकर 1989 में पनामा तक अमेरिका ने बार-बार ऐसे नेताओं को हटाया, जिन्हें वह अपने हितों के लिए खतरा मानता था. सिर्फ ग्वाटेमाला में ही एक साल के भीतर तीन नेताओं को हटाया गया, जिसके बाद देश दशकों तक हिंसा और अस्थिरता में डूबा रहा.
  • इराक में सद्दाम की सुरक्षा व्यवस्था को खत्म करने से लाखों हथियारबंद लोग बेरोजगार हो गए. सत्ता संघर्ष ने सांप्रदायिक हिंसा को जन्म दिया, ईरान समर्थित मिलिशिया मजबूत हुईं और अंततः ISIS का उदय हुआ.
  • अफगानिस्तान में अमेरिकी समर्थन से बनी सरकार कभी देशभर में वैधता हासिल नहीं कर पाई. भ्रष्टाचार, आपसी गुटबाजी और विदेशी सैन्य मदद पर निर्भरता ने उसे अंदर से खोखला कर दिया और तालिबान की वापसी का रास्ता साफ हो गया.

बुश और करज़ई के रिश्तों में आईदरार

सत्ता परिवर्तन की विफलता का सबसे बड़ा उदाहरण हामिद करज़ई और वॉशिंगटन के रिश्ते हैं. शुरुआत में करज़ई को अफगानिस्तान के पुनर्निर्माण का साझेदार बताया गया, लेकिन जल्द ही नागरिक हताहतों, तालिबान से बातचीत और अमेरिकी सैन्य अभियानों को लेकर टकराव बढ़ता गया. हालात यहां तक पहुंच गए कि करज़ई ने सार्वजनिक रूप से कहा, “अमेरिकी जनता को मेरा धन्यवाद, लेकिन अमेरिकी सरकार को मेरा गुस्सा, मेरा बेहद गुस्सा.”

वेनेजुएला में वही पुरानी कहानी?

ट्रंप प्रशासन मादुरो को एक अंतरराष्ट्रीय आपराधिक नेटवर्क का सरगना बताकर अपनी कार्रवाई को सही ठहरा रहा है, लेकिन यह साफ नहीं है कि अमेरिका का अंतिम लक्ष्य क्या है- नई सरकार थोपना, संस्थानों पर दबाव बनाना या किसी ट्रांजिशन अथॉरिटी की निगरानी करना. इतिहास को देखते हुए यह भरोसा दिलाने वाला संकेत नहीं है.

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