वेनेजुएला पर अमेरिकी हमले ने रूस को दिया तगड़ा झटका, रेट होगा कम; जानें तेल की लड़ाई पर क्या कह रहे एक्सपर्ट
वेनेजुएला को दुनिया का सबसे बड़ा कच्चा तेल भंडार रखने वाला देश माना जाता है. ऐसे में अमेरिका के इस कदम ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर यह बहस तेज कर दी है कि तेल की आपूर्ति बढ़ने पर ऑयल प्राइस किस दिशा में जाएंगे और इसका फायदा किसे होगा. विशेषज्ञों की राय में यह स्थिति अमेरिका के लिए सकारात्मक, जबकि रूस के लिए नुकसानदेह साबित हो सकती है.
Venezuela Nicolas Maduro: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा वेनेजुएला के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो की गिरफ्तारी के लिए चलाए गए सैन्य अभियान ‘ऑपरेशन एब्सोल्यूट रिजॉल्व’ को टीवी शो जैसा बताए जाने के बाद अब इसका असर वैश्विक तेल बाजार पर केंद्र में आ गया है. ट्रंप के मुताबिक इस मिशन की रफ्तार, ताकत और सटीकता हैरान करने वाली थी और दुनिया में ऐसा अभियान कोई और देश अंजाम नहीं दे सकता था.
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वेनेजुएला को दुनिया का सबसे बड़ा कच्चा तेल भंडार रखने वाला देश माना जाता है. ऐसे में अमेरिका के इस कदम ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर यह बहस तेज कर दी है कि तेल की आपूर्ति बढ़ने पर ऑयल प्राइस किस दिशा में जाएंगे और इसका फायदा किसे होगा. विशेषज्ञों की राय में यह स्थिति अमेरिका के लिए सकारात्मक, जबकि रूस के लिए नुकसानदेह साबित हो सकती है.
वेनेजुएला का तेल और वैश्विक सप्लाई पर असर
रूस की अर्थव्यवस्था तेल और गैस निर्यात पर काफी हद तक निर्भर है. अमेरिकी हस्तक्षेप के बाद यदि वेनेजुएला का तेल उत्पादन बढ़ता है, तो वैश्विक बाजार में सप्लाई बढ़ेगी. इसका सीधा असर कच्चे तेल की कीमतों पर पड़ेगा, जो या तो गिर सकती हैं या सीमित दायरे में रह सकती हैं. ऐसी स्थिति में रूस की तेल से होने वाली कमाई पर दबाव बढ़ेगा. फिलहाल रूस अपने तेल को छूट देकर बेच रहा है, लेकिन अमेरिकी कदम के बाद Russian Oil की मांग घटने की आशंका जताई जा रही है.
बिल एकमैन का दावा
अमेरिकी निवेशक और पर्शिंग स्क्वायर के सीईओ बिल एकमैन ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर इस घटनाक्रम को वैश्विक तेल कीमतों और भू-राजनीति से जोड़ते हुए अपनी राय रखी. एकमैन ने अपने पोस्ट में लिखा "वेनेजुएला के राष्ट्रपति मादुरो को सत्ता से हटाने से तेल की कीमतें गिरेंगी, जो अमेरिका के लिए एक अच्छी खबर साबित होगी." उन्होंने आगे कहा कि जहां यह अमेरिका के लिए फायदेमंद है, वहीं रूस के लिए यह एक बड़ा झटका होगा.
सस्ते तेल से अमेरिका को नुकसान?
हालांकि, इस मुद्दे पर सभी एक्सपर्ट की राय अलग-अलग हैं. अमेरिकी बायोकेमिस्ट क्रिस मार्टेंसन ने एकमैन के नजरिये से असहमति जताते हुए चेतावनी दी है कि सस्ते तेल से अमेरिका को नुकसान भी हो सकता है. उनका कहना है कि अमेरिकी शेल बेसिन पहले से ही मौजूदा कीमतों पर संघर्ष कर रहे हैं और कीमतों में और गिरावट आने से स्थिति और बिगड़ सकती है.
WTI कीमतें और शेल इंडस्ट्री की चुनौती
अमेरिकी शेल ऑयल का प्रमुख बेंचमार्क WTI (वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट) फिलहाल 57 से 60 डॉलर प्रति बैरल के आसपास ट्रेड कर रहा है. मार्टेंसन के अनुसार, अधिकांश नए शेल ड्रिलिंग प्रोजेक्ट तभी मुनाफे में आते हैं, जब कीमतें इससे कहीं अधिक हों. कई ऑयल प्रोड्यूसर्स का मानना है कि नई गतिविधियों को सही ठहराने के लिए कीमतों का 65 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर होना जरूरी है.
वेनेजुएला के पास 303 अरब बैरल का भंडार
वेनेजुएला के पास दुनिया का सबसे बड़ा कच्चा तेल भंडार बताया जाता है, जिसका अनुमान लगभग 303 अरब बैरल है. मौजूदा कीमतों (करीब 57 डॉलर प्रति बैरल) पर भी इस भंडार की कुल कीमत लगभग 17.3 ट्रिलियन डॉलर आंकी जाती है. मादुरो की गिरफ्तारी के बाद राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने यह भी एलान किया है कि वाशिंगटन वेनेजुएला के तेल उद्योग में मजबूती से शामिल होगा. यह बयान अमेरिका की ऊर्जा नीति में एक बड़े और निर्णायक बदलाव की ओर इशारा करता है.





