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अमेरिका के साथ सीजफायर के बीच किसने किया ईरान पर सीक्रेट अटैक! फिर Tehran ने बरसाईं हजारों मिसाइलें

रिपोर्ट में दावा किया गया है कि सीजफायर से पहले UAE ने ईरान की तेल रिफाइनरी पर गुप्त हमला किया था. इसके जवाब में Tehran ने 2800 से ज्यादा मिसाइलें और ड्रोन दागे. क्या क्या है पूरा मामला?

अमेरिका के साथ सीजफायर के बीच किसने किया ईरान पर सीक्रेट अटैक! फिर Tehran ने बरसाईं हजारों मिसाइलें
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( Image Source:  X-@ANI )

Secret Attack on Iran: मध्य पूर्व में चल रहे तनाव के बीच अब एक नया और चौंकाने वाला दावा सामने आया है. अब तक माना जा रहा था कि ईरान सिर्फ अमेरिका और इजरायल के साथ टकराव झेल रहा है, लेकिन अब रिपोर्ट्स में दावा किया गया है कि United Arab Emirates ने भी पर्दे के पीछे रहकर ईरान पर हमला किया.

कहा जा रहा है कि अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump द्वारा सीजफायर की घोषणा किए जाने के दौरान ही यूएई की वायुसेना ने ईरान के लावन द्वीप पर मौजूद एक बड़े तेल रिफाइनरी परिसर को निशाना बनाया था.

क्या जानकारी आई सामने?

The Wall Street Journal की रिपोर्ट के मुताबिक, इस हमले के बाद रिफाइनरी में भीषण आग लग गई थी. रिपोर्ट में कहा गया है कि आग इतनी गंभीर थी कि ईरान की तेल उत्पादन क्षमता को बड़ा नुकसान पहुंचा और उसका असर कई महीनों तक रहने की आशंका जताई गई. उस समय ईरान ने इसे दुश्मन का हमला बताया था, लेकिन उसने सार्वजनिक तौर पर यह नहीं बताया था कि हमला किस देश ने किया.

क्या ईरान ने की कार्रवाई?

बताया जा रहा है कि इस हमले के बाद ईरान ने भी जोरदार जवाबी कार्रवाई की. रिपोर्ट के मुताबिक, ईरान ने यूएई की ओर 2,800 से ज्यादा मिसाइलें और ड्रोन दागे. यह संख्या इजरायल के खिलाफ किए गए हमलों से भी ज्यादा बताई जा रही है.

ईरानी हमलों का असर सीधे यूएई की अर्थव्यवस्था और सुरक्षा व्यवस्था पर पड़ा. दुबई और अबू धाबी जैसे प्रमुख शहरों में सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ गई. हवाई यातायात प्रभावित हुआ, पर्यटन उद्योग को नुकसान पहुंचा और प्रॉपर्टी बाजार पर भी दबाव देखने को मिला. बढ़ते क्षेत्रीय तनाव के कारण निवेशकों और कारोबारियों के बीच भी अनिश्चितता का माहौल बना.

अमेरिका का क्या था रिएक्शन?

रिपोर्ट में दावा किया गया है कि अमेरिका ने यूएई की इस कार्रवाई पर खुलकर विरोध नहीं किया. एक सूत्र के हवाले से कहा गया कि उस समय तक सीजफायर पूरी तरह लागू नहीं हुआ था, इसलिए वॉशिंगटन को यूएई के हमलों पर कोई आपत्ति नहीं थी. व्हाइट हाउस की ओर से भी उस दौरान कहा गया था कि राष्ट्रपति ट्रंप के पास सभी विकल्प खुले हुए हैं.

क्या मज़बूत है यूएई?

यूएई की सैन्य ताकत को खाड़ी क्षेत्र में सबसे आधुनिक और तकनीकी रूप से मजबूत माना जाता है. उसके पास पश्चिमी देशों के उन्नत लड़ाकू विमान और निगरानी सिस्टम मौजूद हैं. शोधकर्ताओं ने ईरान के ऊपर फ्रांसीसी मिराज फाइटर जेट और चीनी विंग लूंग ड्रोन की तस्वीरें और वीडियो देखे जाने का दावा किया है. ये दोनों हथियार यूएई की सेना इस्तेमाल करती है.

सिर्फ सैन्य स्तर पर ही नहीं, बल्कि आर्थिक और कूटनीतिक मोर्चे पर भी यूएई ने ईरान पर दबाव बढ़ाया है. दुबई में ईरान से जुड़ी आर्थिक गतिविधियों पर सख्ती की गई है. तेहरान से जुड़े स्कूलों और क्लबों को बंद किया गया है. इसके अलावा, ईरानी नागरिकों के वीजा और ट्रांजिट अधिकारों में भी कटौती की गई है.

ईरान पर हमले का क्या है मतलब?

मिडल ईस्ट मामलों की विशेषज्ञ Dina Esfandiary का कहना है कि किसी खाड़ी देश का ईरान पर सीधे हमला करना क्षेत्रीय राजनीति में बड़ा बदलाव माना जा रहा है. उनके मुताबिक, अब तक यूएई अपनी व्यापारिक ताकत और सुरक्षा मॉडल के लिए जाना जाता था, लेकिन ईरान के लगातार हमलों और बढ़ते तनाव ने उसे अपनी रणनीति बदलने पर मजबूर कर दिया.

विशेषज्ञों का मानना है कि अब यूएई खुलकर ईरान के विरोध में खड़े होने वाला सबसे मुखर खाड़ी देश बन चुका है. उसने अमेरिका के साथ अपने सैन्य सहयोग को और मजबूत कर लिया है.

रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि आने वाले समय में ईरान, यूएई और उन अन्य खाड़ी देशों के बीच मतभेद पैदा करने की कोशिश कर सकता है जो युद्ध को बातचीत के जरिए खत्म करना चाहते हैं. हालांकि फिलहाल यूएई ने यह साफ संकेत दे दिया है कि वह अपनी आर्थिक ताकत, व्यापारिक हितों और क्षेत्रीय प्रभाव की रक्षा के लिए किसी भी स्तर तक जाने को तैयार है.

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