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ट्रंप खेल रहे ‘गुड कॉप–बैड कॉप’! भारत को दी टैरिफ की धमकी, बोले- पीएम मोदी उन्हें खुश करना चाहते थे

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने रूसी तेल आयात को लेकर भारत को एक बार फिर टैरिफ बढ़ाने की चेतावनी दी है. हालांकि उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की तारीफ करते हुए उन्हें “अच्छा इंसान” भी बताया. रूस से बढ़ते तेल आयात, अमेरिका से ठंडे व्यापार समझौते और टैरिफ की राजनीति- यह बयान भारत-अमेरिका रिश्तों में बढ़ते जियोपॉलिटिकल तनाव की ओर इशारा करता है.

ट्रंप खेल रहे ‘गुड कॉप–बैड कॉप’! भारत को दी टैरिफ की धमकी, बोले- पीएम मोदी उन्हें खुश करना चाहते थे
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( Image Source:  ANI )
नवनीत कुमार
Edited By: नवनीत कुमार

Published on: 5 Jan 2026 8:52 AM

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक बार फिर भारत को टैरिफ की चेतावनी देकर वैश्विक व्यापार और कूटनीति में हलचल मचा दी है. रूसी तेल के आयात को लेकर ट्रंप ने भारत पर दबाव बनाते हुए कहा कि अगर नई दिल्ली ने ‘मदद’ नहीं की, तो भारतीय इंपोर्ट पर टैरिफ बढ़ाना उनके लिए मुश्किल नहीं होगा. दिलचस्प बात यह रही कि इस सख्त चेतावनी के बीच ट्रंप ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को “अच्छा इंसान” और “अच्छा शख्स” बताते हुए व्यक्तिगत तारीफ भी की. यही विरोधाभास ट्रंप की राजनीति की पहचान है.

ट्रंप ने कहा कि उन्हें लगता है कि पीएम मोदी उन्हें “खुश करना चाहते थे” और उन्हें पता था कि रूसी तेल को लेकर अमेरिका नाराज़ है. यह बयान सिर्फ कूटनीतिक नहीं, बल्कि मनोवैज्ञानिक दबाव की रणनीति भी है. ट्रंप का संदेश साफ है कि भारत चाहे तो रिश्ते अच्छे रह सकते हैं, लेकिन अगर व्यापार और ऊर्जा नीति अमेरिका की लाइन पर नहीं आई, तो कीमत चुकानी पड़ सकती है. यह ‘गुड कॉप–बैड कॉप’ स्टाइल ट्रंप पहले भी कई देशों के साथ अपना चुके हैं.

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रूसी तेल बना अमेरिका-भारत तनाव का केंद्र

भारत का रूस से तेल आयात लंबे समय से वॉशिंगटन की आंखों में खटक रहा है. अमेरिका का तर्क है कि इस तेल से मिलने वाला पैसा यूक्रेन युद्ध को लंबा खींच रहा है. ट्रंप प्रशासन के कई अधिकारी पहले भी आरोप लगा चुके हैं कि भारत न सिर्फ सस्ता रूसी तेल खरीद रहा है, बल्कि उसे रिफाइन कर दोबारा बेचकर मुनाफा भी कमा रहा है. इसी पृष्ठभूमि में अगस्त 2025 में भारत पर टैरिफ बढ़ाकर 50% करने की धमकी दी गई थी, जिसका जिक्र अब फिर से उछाला जा रहा है.

डेटा जो ट्रंप को परेशान कर रहा है

नवंबर 2025 के आंकड़े बताते हैं कि भारत का रूसी तेल आयात छह महीने के उच्चतम स्तर पर पहुंच गया. कुल आयात में रूस की हिस्सेदारी करीब 35% हो गई, जो साफ दिखाता है कि भारत ने अमेरिकी दबाव के बावजूद अपनी ऊर्जा रणनीति नहीं बदली. यह वही समय है जब भारत-अमेरिका व्यापार समझौते पर बातचीत ठंडी पड़ी हुई है. ट्रंप के लिए यह संकेत है कि भारत अपने राष्ट्रीय हितों को अमेरिकी नाराज़गी से ऊपर रख रहा है.

भारत का संतुलन: रूस भी, अमेरिका भी

हालांकि कहानी का दूसरा पहलू भी है. भारत ने इसी दौरान अमेरिकी तेल की खरीद भी बढ़ाई है, जो नवंबर 2025 में सात महीने के उच्चतम स्तर पर रही. कुल आयात में अमेरिका की हिस्सेदारी लगभग 13% तक पहुंच गई. इसका मतलब साफ है कि भारत किसी एक खेमे में जाने के बजाय संतुलन साधने की कोशिश कर रहा है. लेकिन ट्रंप की राजनीति ‘संतुलन’ से नहीं, ‘पक्ष चुनने’ से चलती है, और यहीं टकराव पैदा होता है.

क्या यह असल में पुतिन पर दबाव है?

विश्लेषकों का मानना है कि भारत पर टैरिफ की धमकी सीधे तौर पर नई दिल्ली के लिए नहीं, बल्कि रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन पर दबाव बनाने की रणनीति है. अमेरिका जानता है कि भारत रूस का सबसे बड़ा तेल खरीदार बन चुका है. ऐसे में भारत पर आर्थिक शिकंजा कसकर वह मॉस्को की आमदनी को अप्रत्यक्ष रूप से प्रभावित करना चाहता है. यानी भारत इस जियोपॉलिटिकल शतरंज में एक अहम मोहरा बन गया है.

मोदी-ट्रंप के रिश्तों की असली परीक्षा

ट्रंप पहले भी दावा कर चुके हैं कि पीएम मोदी ने उन्हें भरोसा दिलाया था कि भारत रूसी तेल खरीदना बंद करेगा, जिसे भारत ने आधिकारिक तौर पर खारिज कर दिया. यह विरोधाभास दिखाता है कि दोनों नेताओं के व्यक्तिगत रिश्ते चाहे जितने गर्मजोशी भरे हों, राष्ट्रीय हितों के स्तर पर टकराव बना हुआ है. ट्रंप की तारीफ और धमकी का यह मिश्रण दरअसल उसी रिश्ते की परीक्षा है.

तेल से आगे की लड़ाई

रूसी तेल पर ट्रंप की चेतावनी सिर्फ ऊर्जा या टैरिफ का मुद्दा नहीं है. यह उस बड़ी वैश्विक लड़ाई का हिस्सा है, जहां अमेरिका चाहता है कि उसके साझेदार देश उसकी विदेश नीति की धुरी बनें. भारत, जो खुद को एक स्वतंत्र वैश्विक शक्ति के रूप में देखता है, इस दबाव को आसानी से स्वीकार नहीं करेगा. आने वाले महीनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि ‘अच्छे इंसान’ कहे जाने वाले मोदी और टैरिफ की राजनीति करने वाले ट्रंप के बीच यह खींचतान किस दिशा में जाती है.

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