फिर से वेनेजुएला पर अटैक करेगा अमेरिका! ग्रीनलैंड और कोलंबिया पर क्यों टिकी डोनाल्ड ट्रंप की नजर?
वेनेजुएला में राष्ट्रपति निकोलस मादुरो की गिरफ्तारी के बाद अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बयान वैश्विक चिंता बढ़ा रहे हैं. अंतरिम राष्ट्रपति डेल्सी रोड्रिगेज को धमकी, ग्रीनलैंड को राष्ट्रीय सुरक्षा से जोड़ना और Colombia पर सैन्य कार्रवाई के संकेत, यह सब अमेरिका की नई आक्रामक ग्रैंड स्ट्रैटेजी की ओर इशारा करता है, जो संसाधनों और वर्चस्व पर केंद्रित है.
वेनेजुएला के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो की गिरफ्तारी के बाद अमेरिका का रुख और आक्रामक होता दिख रहा है. राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अब वेनेजुएला की अंतरिम राष्ट्रपति डेल्सी रोड्रिगेज को खुली चेतावनी दी है-अगर वॉशिंगटन की बात नहीं मानी गई, तो “मादुरो से भी बड़ी कीमत” चुकानी होगी. यह बयान संकेत देता है कि अमेरिका वेनेजुएला में अपनी सैन्य और राजनीतिक पकड़ और मजबूत कर सकता है
ट्रंप ने साफ शब्दों में कहा कि अमेरिका को वेनेजुएला में “टोटल एक्सेस” चाहिए-तेल, संसाधन और रणनीतिक ठिकानों तक. यह बयान बताता है कि यह सिर्फ लोकतंत्र या ड्रग्स की लड़ाई नहीं, बल्कि ऊर्जा और संसाधनों पर नियंत्रण की रणनीति है. वेनेजुएला के विशाल तेल भंडार लंबे समय से अमेरिकी विदेश नीति का आकर्षण रहे हैं.
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अंतरिम सरकार vs वॉशिंगटन
अंतरिम राष्ट्रपति डेल्सी रोड्रिगेज ने अमेरिका के दावों को सिरे से खारिज करते हुए कहा है कि वेनेजुएला “कभी उपनिवेश नहीं बनेगा.” सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद सत्ता संभालने वाली रोड्रिगेज को सेना का समर्थन हासिल है. यही वजह है कि अमेरिका का दबाव अब केवल बयानबाजी तक सीमित नहीं रह सकता.
ट्रंप का बदला हुआ सुर: रेजीम चेंज अब बुरा नहीं?
दिलचस्प बात यह है कि ट्रंप, जो पहले ‘नेशन बिल्डिंग’ के आलोचक रहे हैं, अब वेनेजुएला में खुले तौर पर शासन परिवर्तन को जायज ठहरा रहे हैं. उनका तर्क है-“जो है, उससे बदतर तो कुछ हो नहीं सकता.” यह MAGA समर्थकों के एक वर्ग के लिए भी चौंकाने वाला यू-टर्न है.
ग्रीनलैंड क्यों अचानक चर्चा में?
वेनेजुएला के साथ-साथ ट्रंप ने Greenland को लेकर भी बयान दिया है. उनका दावा है कि ग्रीनलैंड रूस और चीन से घिरा हुआ है और अमेरिका की राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए बेहद जरूरी है. यह बयान बताता है कि ट्रंप प्रशासन आर्कटिक क्षेत्र को अगला रणनीतिक मोर्चा मान रहा है.
डेनमार्क और NATO की असहजता
ग्रीनलैंड पर अमेरिकी नजरों से डेनमार्क और NATO सहयोगी असहज हैं. हालांकि डेनमार्क ने कूटनीतिक भाषा में याद दिलाया कि ग्रीनलैंड पहले से NATO सुरक्षा ढांचे का हिस्सा है, लेकिन ट्रंप समर्थक खेमे से जुड़े लोगों द्वारा “Soon” वाले नक्शे साझा करना अमेरिकी इरादों की गंभीरता दिखाता है.
कोलंबिया पर अगली तलवार
वेनेजुएला के बाद ट्रंप ने Colombia को भी निशाने पर लिया है. उन्होंने कोलंबियाई राष्ट्रपति Gustavo Petro को “कोकीन बेचने वाला” कहकर सैन्य कार्रवाई की संभावना तक जता दी. यह बयान दिखाता है कि अमेरिका ड्रग्स के मुद्दे को सैन्य हस्तक्षेप का आधार बना सकता है.
लैटिन अमेरिका में डर
कोलंबिया ने अमेरिकी ऑपरेशन को लैटिन अमेरिका की संप्रभुता पर हमला बताया है. सीमा पर सुरक्षा बढ़ाई गई है और शरणार्थियों की संभावित लहर की आशंका जताई गई है. यह पूरा क्षेत्र एक बार फिर ‘पिछवाड़े’ की तरह ट्रीट किए जाने के डर से सशंकित है.
कानून प्रवर्तन या सैन्य विस्तार?
FBI प्रमुख Kash Patel ने मादुरो की गिरफ्तारी को “परफेक्टली एक्जीक्यूटेड” लॉ-एनफोर्समेंट मिशन बताया. लेकिन कई देशों के लिए यह कानून नहीं, बल्कि सैन्य विस्तार का उदाहरण है-जहां जस्टिस के नाम पर ताकत का इस्तेमाल हो रहा है.
UNSC में गर्माएगा मुद्दा
वेनेजुएला, चीन और रूस पहले ही इस कार्रवाई को अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन बता चुके हैं. संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में यह मुद्दा और गर्माने वाला है. सवाल यह है कि क्या अमेरिका अपनी शक्ति के दम पर वैश्विक नियमों को नए सिरे से परिभाषित करना चाहता है?
ट्रंप की ग्रैंड स्ट्रैटेजी क्या है?
वेनेजुएला, ग्रीनलैंड और कोलंबिया-तीनों अलग भूगोल हैं, लेकिन एक साझा सूत्र है: संसाधन, रणनीतिक स्थिति और अमेरिकी वर्चस्व. ट्रंप का संदेश साफ है-जहां अमेरिकी हित होंगे, वहां हस्तक्षेप का विकल्प खुला रहेगा.
दुनिया एक नए दौर की ओर
मादुरो की गिरफ्तारी कोई अंत नहीं, बल्कि शुरुआत लगती है. ट्रंप की धमकियां इशारा कर रही हैं कि अमेरिका अब रक्षात्मक नहीं, बल्कि आक्रामक भू-राजनीति के मोड में है. सवाल सिर्फ वेनेजुएला का नहीं, बल्कि यह है कि अगला निशाना कौन-और क्या दुनिया इसके लिए तैयार है?





