Iran पर भड़के ट्रंप, बोले- 'तोड़ा वादा', Islamabad Talks फेल होने के बाद क्या है अमेरिका का प्लान?
ईरान के साथ बातचीत फेल होने के बाद डोनाल्ड ट्रंप ने कहा है कि अगर ईरान बातचीत के लिए वापस नहीं आता है तो उन्हें इससे कोई फर्क नहीं पड़ने वाला है. US तेहरान पर प्रेशर डालने के दूसरे कदम उठाने पर विचार कर रहा है.
Trump on Peace Talk: अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के साथ चल रही बातचीत को लेकर सख्त रुख दिखाया है. उन्होंने कहा कि पाकिस्तान में हाल ही में हुई सीजफायर वार्ता के बाद उन्हें इस बात से कोई फर्क नहीं पड़ता कि ईरान दोबारा बातचीत के लिए आता है या नहीं.
ट्रंप ने कहा, "मुझे नहीं पता, मुझे फर्क नहीं पड़ता कि वे वापस आते हैं या नहीं. अगर वे नहीं आते, तो भी मैं ठीक हूं." उन्होंने यह भी संकेत दिया कि अमेरिका को लगता है कि उसने ईरान की सैन्य ताकत को काफी हद तक कमजोर कर दिया है.
ट्रंप ने ईरान के बारे में क्या किया दावा?
ट्रंप ने दावा किया कि ईरान की रक्षा व्यवस्था को इस संघर्ष में बड़ा नुकसान हुआ है. उन्होंने कहा, "उनकी सेना खत्म हो चुकी है. उनकी मिसाइलें काफी हद तक खत्म हो गई हैं. मिसाइल और ड्रोन बनाने की क्षमता भी काफी कमजोर हो गई है."
यह बयान उस समय आया है जब पाकिस्तान में अमेरिका और ईरान के बीच हुई उच्च स्तरीय बातचीत बिना किसी समझौते के खत्म हो गई. इससे 22 अप्रैल को समाप्त होने वाले सीजफायर के भविष्य को लेकर अनिश्चितता बढ़ गई है.
स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पर क्या बोले ट्रंप?
ट्रंप ने ईरान पर स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से जुड़े वादे पूरे न करने का आरोप भी लगाया. उन्होंने कहा, "हमने काफी नरमी दिखाई. हमने ज्यादा कड़ा कदम नहीं उठाया, लेकिन उन्होंने अपना वादा तोड़ा. उन्होंने कहा था कि वे होर्मुज खोलेंगे, लेकिन ऐसा नहीं किया. उन्होंने झूठ बोला.”
अमेरिका क्या कर रहा है प्लानिंग?
एसोसिएटेड प्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिकी नौसेना होर्मुज के जरिए ईरानी बंदरगाहों में आने-जाने वाले जहाजों पर नाकेबंदी शुरू करने की तैयारी में है. इसका मकसद इस संघर्ष में ईरान की रणनीतिक ताकत को कम करना है.
अमेरिकी सेंट्रल कमांड ने कहा कि यह नाकेबंदी उन जहाजों पर लागू होगी जो ईरानी बंदरगाहों की ओर जा रहे हैं या वहां से आ रहे हैं. हालांकि गैर-ईरानी बंदरगाहों के बीच यात्रा करने वाले जहाजों को इस रास्ते से गुजरने की अनुमति दी जाएगी.
स्ट्रेट ऑफ होर्मुज दुनिया के सबसे अहम तेल मार्गों में से एक है, जहां से पहले करीब 20 प्रतिशत वैश्विक तेल आपूर्ति गुजरती रही है. नाकेबंदी की घोषणा के बाद कच्चे तेल की कीमतें तुरंत बढ़कर 100 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर पहुंच गईं, क्योंकि आपूर्ति बाधित होने की आशंका बढ़ गई.
ईरान की रिवोल्यूशनरी गार्ड ने क्या दी वॉर्निंग?
ईरान की रिवोल्यूशनरी गार्ड ने चेतावनी दी है कि अगर कोई सैन्य जहाज इस स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में प्रवेश करता है तो उसे 'कड़े जवाब' का सामना करना पड़ सकता है. इससे साफ है कि कूटनीतिक कोशिशों के बावजूद तनाव अभी भी बना हुआ है. इस मामले में पाकिस्तान, यूरोपीय संघ, ओमान और रूस जैसे देश मध्यस्थता की कोशिश कर रहे हैं.
क्या चाहता है अमेरिका?
रिपोर्ट के अनुसार, बातचीत इस बात पर अटक गई कि अमेरिका चाहता है कि ईरान स्थायी रूप से परमाणु हथियार बनाने की क्षमता छोड़ दे, यूरेनियम इनरिचमेंट रोक दे और क्षेत्रीय सशस्त्र समूहों को समर्थन देना बंद करे.
नाटो पर क्या बोले डोनाल्ड ट्रंप?
ईरान मुद्दे के अलावा ट्रंप ने नाटो को लेकर भी नाराजगी जताई. उन्होंने कहा कि इस संघर्ष के दौरान नाटो ने अमेरिका का सही तरीके से साथ नहीं दिया, जबकि अमेरिका लंबे समय से इस संगठन पर भारी खर्च करता रहा है.
ट्रंप ने कहा, "मैं नाटो से बहुत निराश हूं. उन्होंने हमारा साथ नहीं दिया. हम इस पर खरबों डॉलर खर्च करते हैं, लेकिन वे हमारे साथ नहीं थे. अब वे आगे आना चाहते हैं, लेकिन अब कोई बड़ा खतरा नहीं है.” उन्होंने यह भी कहा कि नाटो मुख्य रूप से रूस के खिलाफ सुरक्षा के लिए बना है, लेकिन इसका खर्च ज्यादातर अमेरिका उठाता है. उन्होंने इस मुद्दे की गंभीर समीक्षा करने की बात कही.




