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रूस में भारतीय छात्रों पर चाकू हमले के बाद बड़ा खुलासा, विदेश मंत्रालय ने जारी किया डाटा; क्यों बढ़ रही शिकायतें?

रूस में हाल ही में हुए एक चाकू हमले में चार भारतीय छात्रों के घायल होने की घटना ने विदेशों में पढ़ रहे भारतीय छात्रों की सुरक्षा और उनके सामने आने वाली चुनौतियों को एक बार फिर केंद्र में ला दिया है.

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( Image Source:  AI: Sora )
विशाल पुंडीर
Edited By: विशाल पुंडीर

Published on: 10 Feb 2026 7:31 AM

रूस में हाल ही में हुए एक चाकू हमले में चार भारतीय छात्रों के घायल होने की घटना ने विदेशों में पढ़ रहे भारतीय छात्रों की सुरक्षा और उनके सामने आने वाली चुनौतियों को एक बार फिर केंद्र में ला दिया है. यह घटना केवल एक आपराधिक मामला नहीं, बल्कि उन गहरी समस्याओं की ओर इशारा करती है, जिनसे भारतीय छात्र, खासकर रूस में, लगातार जूझ रहे हैं.

इसी बीच विदेश मंत्रालय के ताजा आंकड़ों ने स्थिति की गंभीरता को और उजागर कर दिया है. आंकड़ों के मुताबिक, दुनियाभर में भारतीय छात्रों द्वारा दर्ज कराई गई शोषण, उत्पीड़न और नस्लीय भेदभाव से जुड़ी कुल शिकायतों में से 50 प्रतिशत से अधिक शिकायतें रूस से सामने आई हैं. इनमें मॉस्को सबसे बड़ा केंद्र बनकर उभरा है.

कितनी आई रूस से शिकायतें?

विदेश मंत्रालय के अनुसार, साल 2025 में 196 देशों में पढ़ रहे भारतीय छात्रों ने शोषण, उत्पीड़न और नस्लीय भेदभाव से जुड़ी लगभग 350 शिकायतें दर्ज कराईं. इनमें से 200 से अधिक शिकायतें सिर्फ रूस से आईं, जो किसी एक देश से आने वाली शिकायतों का सबसे बड़ा हिस्सा है.

3 साल में कितनी बढ़ी शिकायतें?

1. 2023 में रूस से 68 शिकायतें दर्ज की गईं

2. 2024 में यह संख्या बढ़कर 78 हो गई

3. 2025 में शिकायतों की संख्या अचानक उछलकर 201 तक पहुंच गई

इस तेज वृद्धि ने रूस में पढ़ रहे भारतीय छात्रों की सुरक्षा और उनके अधिकारों को लेकर गंभीर चिंताएं खड़ी कर दी हैं.

मेडिकल छात्रों के लिए क्यों बना रूस पसंदीदा?

रूस में पढ़ रहे अधिकांश भारतीय मेडिकल छात्र राजस्थान, गुजरात, आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, केरल और तमिलनाडु जैसे राज्यों से आते हैं. कम ट्यूशन फीस, आसान प्रवेश प्रक्रिया और सीमित कॉम्पिटिशन के कारण रूस लंबे समय से भारतीय छात्रों, विशेषकर मेडिकल शिक्षा चाहने वालों के लिए पसंदीदा बना हुआ है. हालांकि, शिकायतों में आई तेज बढ़ोतरी ने इस लोकप्रियता के साथ जुड़े सुरक्षा जोखिमों को भी उजागर कर दिया है.

विदेशी छात्रों के साथ क्यों हो रहा खिलवाड़?

रूसी नियमों के अनुसार, किसी भी संस्थान में विदेशी छात्रों की संख्या लगभग 200 तक सीमित होनी चाहिए. इसके बावजूद, कुछ विश्वविद्यालयों में 1,200 से अधिक विदेशी छात्रों को दाखिला दिया जाता है. आरोप है कि बाद में इन छात्रों को विभिन्न बहानों से निष्कासित कर दिया जाता है, कभी-कभी तो पढ़ाई के छठे वर्ष में भी. यह न केवल नियमों का उल्लंघन है, बल्कि छात्रों के भविष्य के साथ सीधा खिलवाड़ भी माना जा रहा है.

क्या कर रही भारत सरकार?

विदेशों में भारतीय छात्रों और श्रमिकों के शोषण, हिरासत, वेतन से वंचित किए जाने और नस्लीय भेदभाव से जुड़े मामलों पर हाल ही में लोकसभा में भी सवाल उठाए गए. इसके जवाब में विदेश मामलों के राज्य मंत्री कीर्ति वर्धन सिंह ने कहा कि शिक्षा और छात्र कल्याण से जुड़े मामलों को संभालने के लिए विदेशों में भारतीय दूतावासों और उच्चायोगों में समर्पित अधिकारियों की तैनाती की गई है. सरकार का कहना है कि भारतीय मिशन ऐसे मामलों में छात्रों को हरसंभव सहायता प्रदान कर रहे हैं.

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