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क्या भारत को अब रूस से ज्यादा अमेरिका पर भरोसा? तेल, कोयला, LNG और अब सेमीकंडक्टर; US से क्या-क्या होगा आयात

भारत ने अगले पांच वर्षों में अमेरिका से 500 अरब डॉलर के आयात का लक्ष्य रखा है, जिसकी शुरुआत ऊर्जा सेक्टर से होगी. हालांकि, सप्लाई क्षमता और वैश्विक मांग इस लक्ष्य की सबसे बड़ी चुनौती बनी हुई है.

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( Image Source:  Sora_ AI )
सागर द्विवेदी
By: सागर द्विवेदी4 Mins Read

Updated on: 8 Feb 2026 2:16 PM IST

भारत और अमेरिका के बीच व्यापारिक रिश्तों को नई ऊंचाई पर ले जाने की योजना अब ज़मीनी हकीकत की कसौटी पर है. अमेरिका से अगले पांच वर्षों में 500 अरब डॉलर के आयात का भारत का वादा सिर्फ भारतीय कंपनियों की खरीद क्षमता पर नहीं, बल्कि इस बात पर भी निर्भर करेगा कि अमेरिकी सप्लायर्स कितनी तेज़ी से इस मांग को पूरा कर पाते हैं.

आंकड़े बताते हैं कि भारत-अमेरिका व्यापार में पहले से ही रफ्तार दिख रही है. बीते वित्त वर्ष में भारत ने अमेरिका से 45.5 अरब डॉलर का आयात किया था, जबकि मौजूदा वित्त वर्ष के पहले नौ महीनों में ही यह आंकड़ा करीब 40 अरब डॉलर तक पहुंच गया है. इसमें सबसे बड़ा हिस्सा ऊर्जा सेक्टर का रहा है, जिसने भविष्य की दिशा साफ कर दी है.

अमेरिका से भारत सबसे ज्यादा क्या आयात कर रहा है?

सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, चालू वित्त वर्ष के पहले नौ महीनों में भारत द्वारा अमेरिका से किए गए कुल आयात में से करीब 11 अरब डॉलर केवल अमेरिकी कच्चे तेल और पेट्रोलियम उत्पादों के रहे. यह आयात पिछले वित्त वर्ष की समान अवधि के मुकाबले 35 प्रतिशत ज्यादा है. इसके अलावा, कोयला और कोक के आयात का आंकड़ा भी 2.7 अरब डॉलर तक पहुंच चुका है, जो इस बात का संकेत है कि ऊर्जा और कच्चे माल के क्षेत्र में अमेरिका भारत के लिए अहम साझेदार बनता जा रहा है.

किन सेक्टरों में तुरंत बढ़ेगा अमेरिकी आयात?

सरकारी अधिकारियों के अनुसार, तेल, गैस और कोयला ऐसे सेक्टर हैं जहां आयात में तुरंत बढ़ोतरी देखी जा सकती है. इसकी वजह यह है कि भारत अब कुछ अन्य देशों से होने वाले तेल आयात की जगह अमेरिकी तेल को प्राथमिकता देने पर विचार कर रहा है. जिसमें रूस भी शामिल हो सकता है. इसके साथ ही, भारतीय तेल कंपनियां पहले ही अमेरिका से ज्यादा LNG (तरलीकृत प्राकृतिक गैस) खरीदने के लिए समझौते कर चुकी हैं.

क्या इंडोनेशियाई कोयले की जगह अमेरिकी कोयला आएगा?

एक वरिष्ठ सरकारी अधिकारी ने बताया कि भारत इंडोनेशिया से आयात होने वाले कोकिंग कोल की जगह अमेरिकी कोयले को तरजीह दे सकता है. उनके मुताबिक, अमेरिकी कोयला न केवल सस्ता है, बल्कि उसकी गुणवत्ता भी बेहतर मानी जाती है. इससे स्टील और ऊर्जा सेक्टर को सीधा फायदा मिल सकता है.

$100 अरब डॉलर का आयात लक्ष्य कब तक संभव?

सरकार का मानना है कि अमेरिका से आयात को 100 अरब डॉलर तक पहुंचाना पहले ही साल में संभव नहीं होगा, लेकिन दिशा उसी ओर रहेगी. एक वरिष्ठ अधिकारी के मुताबिक, आयात का आंकड़ा पहले ही साल में 100 अरब डॉलर तक पहुंचना संभव नहीं है, लेकिन यह धीरे-धीरे उसी दिशा में आगे बढ़ेगा. 'यानी आयात में बढ़ोतरी धीरे-धीरे होगी, लेकिन लक्ष्य साफ है.

पीयूष गोयल ने आयात को लेकर क्या कहा?

केंद्रीय वाणिज्य और उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने साफ किया कि आयात बढ़ाने की जिम्मेदारी सरकार से ज्यादा भारतीय आयातकों और अमेरिकी विक्रेताओं पर है. उन्होंने कहा कि उन्हें ऐसा प्रस्ताव देना होगा, जिसे भारत के खरीदार ठुकरा न सकें. गोयल के अनुसार, चिप्स, सेमीकंडक्टर्स, विमान और उनके पुर्जे जैसे हाई-टेक उत्पाद भारत-अमेरिका आयात लक्ष्य को हासिल करने में अहम भूमिका निभाएंगे. हालांकि, इस बड़े आयात लक्ष्य की राह आसान नहीं है. भारतीय खरीदारों के लिए सबसे बड़ी चुनौती अमेरिकी सप्लायर्स की क्षमता है.

उदाहरण के तौर पर, Boeing जैसी कंपनियों पर पहले से ही विमानों के ऑर्डर का भारी बोझ है, जिससे समय पर डिलीवरी एक सवाल बन जाती है. वहीं, सेमीकंडक्टर चिप्स की वैश्विक मांग इतनी ज्यादा है कि भारत को भी इस दौड़ में इंतजार करना पड़ सकता है. विशेषज्ञों का मानना है कि भारत की मंशा मजबूत है और मांग भी मौजूद है, लेकिन इस लक्ष्य को पूरा करने के लिए अमेरिकी सप्लाई चेन की रफ्तार, उत्पादन क्षमता और वैश्विक हालात निर्णायक भूमिका निभाएंगे.

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