कोई किसी का नहीं, ये झूठे नाते हैं! तिहाड़ में बंद Rajpal Yadav के सहारे करियर की बुलंदियां छूने वाले दोस्त भी हो गए बेगाने
कॉमेडियन राजपाल यादव चेक बाउंस केस में तिहाड़ जेल पहुंचे और सरेंडर से पहले फूट-फूटकर रो पड़े. उनका बयान बॉलीवुड में रिश्तों की हकीकत उजागर करता है.
राजपाल यादव (Rajpal Yadav) वो नाम जो सालों से बॉलीवुड में हंसी की गूंज बनकर गूंजता रहा है. 'भूल भुलैया', 'हेरा फेरी', 'चुप चुप के' जैसी फिल्मों में उनकी कॉमेडी ने लाखों लोगों के चेहरे पर मुस्कान बिखेरी. लेकिन आज उनकी आंखों में आंसू हैं, और दिल में एक गहरा दर्द. एक ऐसा दर्द जो अकेलेपन का है, जहां सफलता की चमक के बावजूद कोई साथ नहीं दे रहा.
राजपाल यादव ने अपनी पहली निर्देशित फिल्म 'अता पता लापता' बनाने का सपना देखा. फिल्म बनाने के लिए उन्हें पैसे की जरूरत थी, तो उन्होंने दिल्ली की एक कंपनी मुरली प्रोजेक्ट्स प्राइवेट लिमिटेड से करीब 5 करोड़ रुपये का लोन लिया. उम्मीद थी कि फिल्म चल जाएगी, पैसे वापस हो जाएंगे और सब ठीक हो जाएगा. लेकिन फिल्म बॉक्स ऑफिस पर फ्लॉप हो गई. सपना टूट गया, और आर्थिक मुसीबतें शुरू हो गईं. लोन चुकाने के लिए दिए गए कई चेक बाउंस हो गए. कंपनी ने परक्राम्य लिखत अधिनियम (नीगोशिएबल इंस्ट्रूमेंट्स एक्ट) की धारा 138 के तहत केस कर दिया.
क्यों मिली छह महीने की कैद?
अदालत ने 2018 में राजपाल यादव और उनकी पत्नी को दोषी ठहराया. सजा मिली छह महीने की कैद की, साथ में जुर्माना और मुआवजा. राजपाल ने अपील की, कई बार राहत मांगी. कोर्ट ने भी बार-बार मौका दिया, समय बढ़ाया, समझौते की कोशिश की. उन्होंने कुछ पैसे चुकाए भी, जैसे 2025 में 75 लाख रुपये दिए. लेकिन बाकी रकम जो ब्याज और समय के साथ बढ़कर करोड़ों में पहुंच गई वापस नहीं हो पाई. कोर्ट ने उनकी बार-बार की देरी और वादे तोड़ने पर सख्त टिप्पणी की. कहा गया कि 'गंभीरता की कमी' है, और कोई भी व्यक्ति चाहे कितना भी मशहूर क्यों न हो कानून से ऊपर नहीं है.
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जब हंसाने वाला रो पड़ा
फिर आया वो आखिरी दिन फरवरी 2026 में दिल्ली हाई कोर्ट की जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा ने उनकी आखिरी याचिका खारिज कर दी. एक हफ्ते की मोहलत भी नहीं मिली. कोर्ट ने साफ कहा, 'अब सरेंडर करो, बिना देरी के और 5 फरवरी 2026 को शाम करीब 4 बजे, राजपाल यादव तिहाड़ जेल पहुंचे. जेल के अधिकारियों के सामने सरेंडर किया. लेकिन सरेंडर करने से ठीक पहले उनका वो भावुक बयान... दिल को छू गया. वे फूट-फूटकर रो पड़े और बोले, 'सर, क्या करूं? मेरे पास पैसे नहीं हैं और कोई उपाय नहीं दिखता… सर, यहां हम सब अकेले हैं. कोई दोस्त नहीं है मुझे इस संकट से खुद ही निपटना होगा.'
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कोई साथ क्यों नहीं आया?
ये शब्द सुनकर मन उदास हो जाता है. एक आदमी जिसने 30 साल से ज्यादा समय इंडस्ट्री में बिताए, 200 से ज्यादा फिल्मों में काम किया, हंसी बांटी, लोगों को खुश किया. उसके सबसे मुश्किल वक्त में कोई साथ क्यों नहीं आया? 2.5 करोड़ जैसी रकम बॉलीवुड के कई बड़े सितारों के लिए छोटी हो सकती है, लेकिन किसी ने हाथ नहीं बढ़ाया.क्यों? शायद इसलिए कि इंडस्ट्री में रिश्ते सतही होते हैं. सफलता में सब साथ देते हैं, तालियां बजाते हैं, लेकिन मुसीबत में अकेला छोड़ देते हैं. राजपाल यादव ने खुद कहा, 'यहां हम सब अकेले हैं.' ये सच है कई बार लोग मदद मांगते हैं, लेकिन डर लगता है क्या पता कल मेरी बारी आए या फिर पुरानी दुश्मनी, जलन, या बस उदासीनता. राजपाल की कॉमेडी ने सबको हंसाया, लेकिन उनका दर्द कोई नहीं समझ सका, या समझना नहीं चाहा.
स्ट्रगलर्स का कभी ठिकाना था राजपाल का घर
मनोज बाजपेयी ने समेत और कई अन्य एक्टर्स ने राजपाल यादव के उन संघर्ष के दिनों का जिक्र किया है, जब उनका घर मुंबई में स्ट्रगल कर रहे कलाकारों के लिए एक तरह का लंगर बन जाता था. राजपाल यादव ने अपने घर में रोज़ाना ढेर सारे लोगों को खाना खिलाया. कई बार ऐसे लोग जो भूखे थे, पैसे नहीं थे, काम की तलाश में थे, NSD (नेशनल स्कूल ऑफ ड्रामा) से आए नए लड़के, या बस मुंबई की चकाचौंध में खोए हुए. मनोज बाजपेयी ने इंटरव्यूज में बताया है कि राजपाल का घर उस वक्त एक ऐसा ठिकाना था जहां कोई भी आ सकता था, खाना खा सकता था, और थोड़ा सुकून पा सकता था. नवाजुद्दीन सिद्दीकी ने भी कई बार भावुक होकर ये बात कही है कि राजपाल भैया ने उनके और कई साथियों के मुश्किल दिनों में खाना खिलाकर मदद की. विजय वर्मा जैसे एक्टर्स ने भी यही कहा कि NSD के ग्रुप में राजपाल का घर सबके लिए खुला था भूख मिटाने का सहारा.
कहां गए वो बड़े स्टार्स?
ये वो दौर था जब राजपाल खुद स्ट्रगल कर रहे थे छोटे-छोटे रोल, कभी-कभी काम नहीं मिलता, लेकिन फिर भी वो दूसरों की मदद करते थे. उनका दिल इतना बड़ा था कि भले खुद के पास कम हो, लेकिन जो भी आता, उसे खाली पेट नहीं जाने देते थे. लोग कहते हैं कि उनका घर 'भूख के मसीहा' जैसा था. जहां हंसी-मजाक के साथ खाना भी मिलता था और आज जब राजपाल यादव खुद सबसे बड़े संकट में हैं तिहाड़ जेल में, चेक बाउंस के केस में, करोड़ों का बोझ तो वही सवाल उठता है: जिन्हें उन्होंने खाना खिलाया, जिनके लिए उनका घर खुला था, वो आज कहां हैं? मनोज बाजपेयी, नवाजुद्दीन, और कई और बड़े नामों ने उनके घर की मेहमाननवाजी की तारीफ की, लेकिन मदद की बात पर चुप्पी क्यों?.
मुसीबत में अकेला छोड़ देते हैं
ये दुखद है, लेकिन सच है इंडस्ट्री में रिश्ते अक्सर सफलता तक सीमित रह जाते हैं. मुसीबत में अकेला छोड़ देते हैं. राजपाल यादव ने कभी किसी से कुछ मांगा नहीं, बस दिया. आज वो रोते हुए कह रहे हैं, 'मेरे पास पैसे नहीं हैं, कोई उपाय नहीं दिखता... यहां हम सब अकेले हैं.' शायद यही जीवन का कड़वा सच है जो दिल से देता है, वो अक्सर अकेला पड़ जाता है. लेकिन राजपाल यादव जैसे इंसान की हिम्मत और नेकी कभी नहीं मिटती. उम्मीद है कि ये दौर जल्दी गुजर जाए, और वो फिर से हंसते-मुस्कुराते लौटें क्योंकि उनकी हंसी ने लाखों को खुश किया है, और उनकी नेकी ने कई दिलों को सहारा दिया.





