Operation Sindoor: पैसा, मीटिंग्स और सिफारिशें... इज्जत बचाने के चक्कर में पाक की हो गई थू-थू! पढ़ें Inside Story
Operation Sindoor ने अंतरराष्ट्रीय मंच पर भारत-पाकिस्तान गतिरोध को नई दिशा दी है. इससे बचने के लिए पाकिस्तान ने अमेरिकी लॉबिस्ट्स के साथ 60 से ज्यादा मीटिंग की. $5 मिलियन से ज्यादा खर्च किया और ट्रंप प्रशासन में भारत विरोधी पैरोकारी की. वेस्ट की मीडिया में खबरें छपवाई. ताकि भारत को रोक सके. बावजूद इसके, भारत की कूटनीतिक, सैन्य और राजनीतिक तैयारी ने पाकिस्तानी कोशिशों को नाकाम कर दिया.
दरअसल, इस्लामाबाद की कार्रवाई का मकसद वाशिंगटन पर दखल देने का दबाव डालना और जम्मू-कश्मीर के पहलगाम आतंकी हमले के बाद भारत के मिलिट्री कैंपेन (Operation Sindoor) को किसी भी तरह रोकना था. रिपोर्ट में ट्रंप प्रशासन की फाइलों से पता चला है कि पाकिस्तान ने वाशिंगटन में जबरदस्त लॉबिंग की थी, जिससे मई 2025 में ऑपरेशन सिंदूर के दौरान भारत के मिलिट्री जवाब को कमजोर करने की इस्लामाबाद की कोशिशों के दौरान डाले गए डिप्लोमैटिक दबाव का पैमाना सामने आया है.
60 से ज्यादा बैठक
मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक पाकिस्तानी राजनयिकों और रक्षा अधिकारियों ने अप्रैल 2025 में जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में पाकिस्तान समर्थित आतंकी हमले के बाद ऑपरेशन सिंदूर शुरू होने और सीजफायर के पूरी तरह लागू होने के बीच अमेरिकी प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारियों, सांसदों और प्रभावशाली मीडिया आउटलेट्स के साथ 60 से ज्यादा बैठक की. अमेरिकी फॉरेन एजेंट्स रजिस्ट्रेशन एक्ट (FARA) के रिकॉर्ड बताते हैं कि अमेरिका में पाकिस्तान के राजदूत और उसके रक्षा अटैची ने 60 से ज्यादा अधिकारियों और बिचौलियों से ईमेल, फोन कॉल और आमने-सामने की बैठकों के जरिए बार-बार संपर्क किया.
क्या बात हुई?
पाकिस्तान सरकार ने सोर्स के जरिए अमेरिकी कांग्रेस, पेंटागन, विदेश विभाग और जाने-माने अमेरिकी पत्रकारों तक से संपर्क साधा और व्हाइट हाउस तक इंडिया की मुहिम को रोकने का प्रेशर डलवाया. पाकिस्तानी प्रतिनिधियों ने कश्मीर, क्षेत्रीय सुरक्षा, दुर्लभ खनिज और व्यापक द्विपक्षीय संबंधों पर चर्चा की. साथ ही प्रमुख अमेरिकी मीडिया संगठनों के साथ इंटरव्यू और बैकग्राउंड ब्रीफिंग भी मांगी.
$5 मिलियन के कॉन्ट्रैक्ट पर किए साइन
पाकिस्तान की ओर से लॉबिंग में तेजी अचानक नहीं आई. नवंबर 2025 में द न्यूयॉर्क टाइम्स ने बताया कि पाकिस्तान ने ट्रम्प प्रशासन तक जल्द पहुंच बनाने और अनुकूल व्यापार और राजनयिक परिणाम हासिल करने के लिए छह वाशिंगटन लॉबिंग फर्मों के साथ सालाना लगभग $5 मिलियन के कॉन्ट्रैक्ट पर साइन किए. इस्लामाबाद द्वारा जेवलिन एडवाइजर्स के जरिए सेडेन लॉ LLP के साथ डील करने के हफ्तों बाद, तत्कालीन अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने व्हाइट हाउस में पाकिस्तान के आर्मी चीफ फील्ड मार्शल आसिम मुनीर की मेजबानी की. बाद में इन मुलाकातों को पाकिस्तान की अमेरिकी सत्ता के उच्चतम स्तरों तक दोबारा पहुंच के प्रतीक के तौर पर देखा गया.
नोबेल के लिए ट्रंप के नाम को आगे बढ़ाया
न्यूयॉर्क टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार पाकिस्तान ने अप्रैल और मई में लॉबिंग पर अपना खर्च नाटकीय रूप से बढ़ा दिया. इसी अवधि में भारत की तुलना में कम से कम तीन गुना ज्यादा पैसा खर्च किया. अखबार के मुताबिक इसके परिणामस्वरूप हुए नीतिगत बदलावों को पहले से तनावपूर्ण अमेरिका-पाकिस्तान संबंधों से एक बड़ा बदलाव आया. ऐसा इसलिए हुआ कि पाकिस्तान ने राष्ट्रपति ट्रंप की सार्वजनिक प्रशंसा की. नोबेल शांति पुरस्कार के लिए उनके नाम की पैरोकारी की. इसके बदले आकर्षक व्यापार और वाणिज्यिक रियायतों की को हासिल किया.
FARA फाइल में छुपी है साजिश की कहानी
सूत्रों के मुताबिक 2025 की FARA फाइलिंग एक व्यापक पैटर्न की पुष्टि करती है. पाकिस्तान ने कैपिटल हिल और अमेरिकी मीडिया में अपनी लॉबिंग की पहुंच का विस्तार किया, जिसमें कुछ व्यक्तिगत अनुबंधों और आउटरीच प्रयासों पर लाखों डॉलर खर्च हुए. हालांकि, ऐसे संकेत हैं कि साल के अंत में खर्च कम हो गया था. ये दस्तावेज एक ऐसा तस्वीर पेश करते हैं, जिससे साफ होता है कि भारत की ओर से सैन्य कार्रवाई के दौरान पाकिस्तान जरूरत से ज्यादा दबाव में था.





