क्या चाहते हैं ट्रंप, वेनेजुएला ही नहीं; दुनिया के 10 से ज्यादा देशों में अमेरिका ने खोल रखा है मोर्चा, किससे कैसा विवाद?
अमेरिका को अक्सर वैश्विक राजनीति में एक्टिव पावर कहा जाता है. लोकतंत्र, मानवाधिकार, सुरक्षा और आर्थिक हितों के नाम पर अमेरिका दुनिया के कई देशों से तनाव, प्रतिबंध, रणनीतिक टकराव या खुले राजनीतिक मतभेद में रहा है. वेनेजुएला इसका ताजा उदाहरण है, लेकिन सूची इससे कहीं लंबी है. डोनाल्ड ट्रंप की नीतियों के कारण अमेरिका वेनेजुएला, चीन, रूस, ईरान समेत 10 से ज्यादा देशों से टकराव में है. जानिए किससे कैसा विवाद.
डोनाल्ड ट्रंप की राजनीति सिर्फ अमेरिका तक सीमित नहीं रही, बल्कि उनकी आक्रामक विदेश नीति ने पूरी दुनिया में अफरा माहौल पैदा कर दिया है. वेनेजुएला से लेकर रूस, चीन, ईरान, भारत, उत्तर कोरिया, क्यूबा और अफगानिस्तान तक, ऐसा शायद ही कोई क्षेत्र बचा हो जहां अमेरिका किसी न किसी विवाद में न उलझा हो. सवाल यह है कि ट्रंप आखिर चाहते क्या हैं? क्या यह अमेरिका की ताकत दिखाने की रणनीति है, या फिर वैश्विक राजनीति में वर्चस्व कायम रखने की कोशिश? इस रिपोर्ट में जानिए उन 10 से ज्यादा देशों के नाम और वजहें, जिनसे अमेरिका ने मोर्चा खोल रखा है.
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1. वेनेजुएला
अमेरिका और वेनेजुएला के बीच विवाद का मुख्य कारण वेनेजुएला की समाजवादी सरकार, लोकतांत्रिक संस्थाओं की कमजोरी, मानवाधिकार उल्लंघन और तेल उद्योग पर सरकारी नियंत्रण है. अमेरिका राष्ट्रपति निकोलस मादुरो की सरकार को अवैध मानता है. उस पर आर्थिक प्रतिबंध लगाए हुए हैं. हाल ही में ट्रंप प्रशासन ने निकोलस मादुरो को गैर कानूनी तरीके से गिरफ्तार भी किया है.जबकि वेनेजुएला अमेरिका पर हस्तक्षेप और सत्ता परिवर्तन की कोशिश का आरोप लगाता है.
2. रूस
अमेरिका और रूस के बीच तनाव शीत युद्ध के समय से चला आ रहा है. हाल के वर्षों में यूक्रेन युद्ध, साइबर हमले, चुनावों में दखल, नाटो विस्तार और परमाणु हथियारों को लेकर विवाद बढ़ा है. अमेरिका रूस पर आक्रामक नीति अपनाने का आरोप लगाता है और उस पर कड़े प्रतिबंध लगाए हैं.
3. चीन
अमेरिका और चीन के बीच विवाद व्यापार असंतुलन, तकनीकी प्रतिस्पर्धा, ताइवान मुद्दा, दक्षिण चीन सागर, मानवाधिकार (विशेषकर शिनजियांग) और वैश्विक नेतृत्व को लेकर है. अमेरिका चीन को रणनीतिक प्रतिद्वंद्वी भी मानता है. जबकि चीन अमेरिकी दबाव का विरोध करता है.
4. भारत
भारत और अमेरिका पूर्ण दुश्मन नहीं हैं, लेकिन कुछ मतभेद हैं. इनमें रूस से भारत के संबंध, व्यापार शुल्क, कृषि सब्सिडी, वीजा नीति और मानवाधिकार पर अमेरिकी टिप्पणियां शामिल हैं. फिर भी दोनों देश रणनीतिक साझेदार हैं और रक्षा व तकनीक में सहयोग करते हैं.
5. ईरान
अमेरिका और ईरान के बीच विवाद 1979 की ईरानी क्रांति के बाद से है. मुख्य मुद्दे हैं ईरान का परमाणु कार्यक्रम, तेल उत्पादन और बिक्री, पश्चिम विरोधी नीति, मध्य-पूर्व में प्रभाव बढ़ाना और अमेरिका-विरोधी समूहों को समर्थन. अमेरिका ने ईरान पर कड़े आर्थिक प्रतिबंध लगाए हैं.
6. उत्तर कोरिया
अमेरिका और उत्तर कोरिया के बीच तनाव का कारण उत्तर कोरिया का परमाणु और मिसाइल कार्यक्रम है. अमेरिका इसे वैश्विक सुरक्षा के लिए खतरा मानता है. उत्तर कोरिया अमेरिका पर दुश्मनी और सैन्य दबाव का आरोप लगाता है, जिसके कारण संबंध बेहद खराब हैं.
7. क्यूबा और निकारागुआ
अमेरिका और क्यूबा के बीच विवाद शीत युद्ध काल से है. क्यूबा की कम्युनिस्ट सरकार और अमेरिका-विरोधी नीति के कारण अमेरिका ने दशकों से उस पर आर्थिक प्रतिबंध लगाए हुए हैं। मानवाधिकार और राजनीतिक स्वतंत्रता भी विवाद के मुद्दे हैं.
अमेरिका निकारागुआ की सरकार पर तानाशाही, चुनावी धांधली और मानवाधिकार उल्लंघन का आरोप लगाता है. राष्ट्रपति डेनियल ओर्तेगा की सरकार अमेरिका को आंतरिक मामलों में हस्तक्षेप करने वाला मानती है, जिससे संबंध तनावपूर्ण हैं.
8. अफगानिस्तान
अमेरिका और अफगानिस्तान का विवाद मुख्य रूप से तालिबान, आतंकवाद और राजनीतिक अस्थिरता से जुड़ा रहा है. 2021 में अमेरिकी सेना की वापसी और तालिबान की सत्ता वापसी के बाद अमेरिका ने अफगान सरकार को मान्यता नहीं दी और आर्थिक प्रतिबंध लगाए.
9. मेक्सिको
अमेरिका और मेक्सिको के बीच विवाद अवैध आव्रजन, ड्रग तस्करी, सीमा सुरक्षा और व्यापार को लेकर है. अमेरिका मेक्सिको से अवैध प्रवास रोकने की अपेक्षा करता है. जबकि मेक्सिको अमेरिकी हथियारों और नीतियों को हिंसा के लिए जिम्मेदार मानता है.
10. नाइजीरिया और कांगो
अमेरिका और नाइजीरिया के बीच तनाव आतंकवाद (बोको हराम), भ्रष्टाचार, मानवाधिकार उल्लंघन और सुरक्षा सहयोग को लेकर है. अमेरिका नाइजीरियाई सुरक्षा बलों के तरीकों पर सवाल उठाता है, जबकि नाइजीरिया अमेरिका से अधिक समर्थन चाहता है. अमेरिका और कांगो के बीच विवाद राजनीतिक अस्थिरता, भ्रष्टाचार, चुनावी पारदर्शिता और मानवाधिकार मुद्दों से जुड़ा है. अमेरिका कांगो में लोकतंत्र और स्थिरता चाहता है, लेकिन वहां की सरकार पर सुधारों में विफल रहने के आरोप लगते रहे हैं.
इसके अलावा, भी अमेरिका ने कई देशों के साथ विवाद चल रहा है. इनमें इराक, सीरिया फिलिस्तीन, यमन, सउदी अरब व अन्य देश शामिल हैं.
अमेरिका के दबाव बनाने के टूल्स
अमेरिका विरोधी देशों को दबाने के लिए सबसे ज्यादा किसी देश के बैंकिंग सिस्टम, तेल निर्यात, व्यापार और डॉलर लेन-देन पर रोक लगाता रहा है. जैसे ईरान, रूस, वेनेजुएला, उत्तर कोरिया, क्यूबा आदि. अमेरिका आयात पर भारी टैक्स (Tariff) लगाकर दूसरे देशों की अर्थव्यवस्था पर दबाव डालता है. इसमें भारत, चीन व अन्य देश शामिल हैं. ट्रंप प्रशासन द्वारा इसे सबसे बड़े हथियार के रूप में इस्तेमाल किया जा रहा है. इसके अलावा? राजदूत वापस बुलाना, बातचीत बंद करना, अंतरराष्ट्रीय मंचों पर विरोध करना आदि शामिल हैं. बतौर उदाहरण अफगानिस्तान, ईरान, रूस.
अमेरिका अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं जैसे IMF, World Bank, WTO और UN का इस्तेमाल अपना प्रभाव जमाने के लिए करता है. जैसे किसी देश को लोन, मदद या समर्थन से वंचित कर सकता है. विकासशील और संकटग्रस्त देश.
सैन्य अभ्यास, युद्धपोत तैनाती, मिसाइल सिस्टम, यह सीधे युद्ध नहीं होता, लेकिन डर पैदा करता है. जैसे उत्तर कोरिया, चीन (दक्षिण चीन सागर), ईरान व अन्य देश. खुफिया एजेंसियां सीआईए और साइबर दबाव के जरिए विरोधी देश में अस्थिरता का माहौल पैदा करना. अमेरिका मानवाधिकार उल्लंघन को आधार बनाकर प्रतिबंध और अंतरराष्ट्रीय दबाव भी बनाता है. उदाहरण - वेनेजुएला, ईरान, निकारागुआ.
इतना ही नहीं, अंतरराष्ट्रीय मीडिया और रिपोर्ट्स के जरिए किसी देश की छवि खराब करता है, जिससे वैश्विक समर्थन कम हो जाता है. विरोधी देशों में सीधे तख्तापलट नहीं, लेकिन विपक्षी समूहों को समर्थन, प्रतिबंध और दबाव से सरकार कमजोर करना. वेनेजुएला में तो ट्रंप प्रशासन ने सभी नियमों को ताक पर रखकर मादुरो को गिरफ्तार तक कर लिया.





