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Middle East War: ईरान का ‘Peace Formula’ या दबाव की राजनीति? जंग रोकने के लिए रखीं 3 शर्तें, क्या तेहरान सच में इतनी मजबूत स्थिति में है?

ईरान ने अमेरिका और इजरायल के साथ जारी युद्ध को खत्म करने के लिए तीन शर्तें रखी हैं. ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन नेतन्याहू और डोनाल्ड ट्रंप को पैगाम दिया है और कहा है कि अगर ये शर्तें मान ली जाती हैं तो जंग खत्म हो जाएगी.

Middle East War: ईरान का ‘Peace Formula’ या दबाव की राजनीति? जंग रोकने के लिए रखीं 3 शर्तें, क्या तेहरान सच में इतनी मजबूत स्थिति में है?
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समी सिद्दीकी
Edited By: समी सिद्दीकी5 Mins Read

Updated on: 12 March 2026 11:37 AM IST

Israel US Iran War: ईरान ने अमेरिका और इजरायल के साथ चल रहे युद्ध को खत्म करने के लिए तीन शर्तें सामने रखी हैं. ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन ने कहा कि किसी भी समझौते में ईरान के वैध अधिकारों को मान्यता दी जानी चाहिए और यह गारंटी दी जानी चाहिए कि भविष्य में देश पर कोई हमला नहीं होगा.

सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर किए गए एक पोस्ट में पेजेशकियन ने यह भी कहा कि युद्ध के दौरान हुए नुकसान के लिए ईरान को मुआवजा दिया जाना चाहिए. उन्होंने लिखा कि रूस और पाकिस्तान के नेताओं से बातचीत के दौरान उन्होंने क्षेत्र में शांति के लिए ईरान की प्रतिबद्धता दोहराई है.

क्या है जंग खत्म करने का तरीका?

उनके अनुसार इस युद्ध को खत्म करने का एकमात्र तरीका यह है कि ईरान के वैध अधिकारों को मान्यता दी जाए, युद्ध के नुकसान की भरपाई की जाए और भविष्य में किसी भी तरह के हमले से बचाव के लिए अंतरराष्ट्रीय गारंटी दी जाए.

सशस्त्र सेनाओं के प्रवक्ता अबोलफजल ने क्या दी चेतावनी?

ईरानी राष्ट्रपति की ओर से यह प्रस्ताव उस समय आया जब ईरान की सशस्त्र सेनाओं के प्रवक्ता अबोलफजल शेखरची ने चेतावनी दी कि अगर अमेरिका ईरान के बंदरगाहों पर हमला करता है तो फारस की खाड़ी में कोई भी बंदरगाह या आर्थिक केंद्र ईरान की पहुंच से बाहर नहीं रहेगा. उन्होंने सरकारी टीवी आईआरआईबी से बातचीत में कहा कि अगर ईरान के बंदरगाहों और गोदियों को खतरा हुआ तो क्षेत्र के सभी बंदरगाह ईरान के लिए वैध लक्ष्य बन जाएंगे.

शेखरची ने यह भी चेतावनी दी कि अगर ईरानी बंदरगाहों पर हमला हुआ तो सशस्त्र बल अब तक के मुकाबले और भी बड़ा सैन्य अभियान चलाएंगे. उन्होंने क्षेत्र के देशों से यह भी कहा कि वे अपने यहां से अमेरिकी सेना को बाहर निकाल दें.

क्या ईरान सही में इतनी मज़बूत पॉजीशन में है?

जानकारों की मानें तो ईरान अभी इस पॉज़ीशन में नहीं है कि वह ऐसी शर्तें रख सकें. इस्लामिक रिपब्लिक में एक हजार तीन सौ से ज्यादा मौतें और इन्फ्रास्ट्रक्चर को भारी नुकसान हुआ है. वहीं इजराइल में दो दर्जन से भी कम मौतें हुई हैं. सीधे तौर पर ईरान के राष्ट्रपति की यह एक चाल नजर आती है. ताकि एक संदेश जा सके कि ईरान किसी भी मोर्चे पर कमजोर नहीं है और अमेरिका-इजराइल पर दबाव बनाए हुए है.

क्या गिर जाएगी ईरान सरकार?

इस बीच युद्ध को लेकर इजरायल का आकलन भी सामने आया है. समाचार एजेंसी रॉयटर्स की एक रिपोर्ट के अनुसार बंद कमरे में हुई चर्चाओं में इजरायली अधिकारियों ने माना है कि यह निश्चित नहीं है कि ईरान के खिलाफ युद्ध से वहां की धार्मिक सरकार गिर जाएगी. बमबारी के बावजूद ईरान में किसी बड़े जनविद्रोह के संकेत भी नहीं दिख रहे हैं.

जंग के खात्मे पर क्या है इजराइल का कहना?

रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भले ही संकेत दिया हो कि युद्ध जल्द खत्म हो सकता है, लेकिन इजरायल का मानना है कि वाशिंगटन अभी इस संघर्ष को खत्म करने के निर्देश देने के करीब नहीं है. यह जानकारी दो इजरायली अधिकारियों के हवाले से दी गई है.

अमेरिका और इजरायल की ओर से किए गए भारी हवाई हमलों में ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई और कई वरिष्ठ सैन्य कमांडर मारे गए हैं. हालांकि इन हमलों में आम नागरिकों की भी मौत हुई है और कई घरों तथा सार्वजनिक इमारतों को नुकसान पहुंचा है, जिससे ईरान में लोगों में गुस्सा भी बढ़ा है.

तेहरान और अन्य शहरों में लगातार मिसाइल हमले हो रहे हैं. वहीं ईरानी अधिकारियों ने किसी भी तरह के विरोध प्रदर्शन पर कड़ी कार्रवाई की चेतावनी दी है. ऐसे में कई लोग जो सामान्य स्थिति में सड़कों पर उतर सकते थे, वे युद्ध खत्म होने तक ऐसा करने से डर रहे हैं.

ईरान इजरायल युद्धवर्ल्‍ड न्‍यूज
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