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EXCLUSIVE: चीन-रूस और अमेरिका के लिए ‘गोश्त’ का टुकड़ा है पाकिस्तान, ईरानी जंग ने बताया कैसे सिर्फ 'रोटी-बोटी' का है रिश्ता

ईरान के जवाबी हमलों के बाद भी पाकिस्तान क्यों खामोश रहा? पूर्व लेफ्टिनेंट कर्नल JS सोढ़ी ने मध्य पूर्व की जियोपॉलिटिक्स और पाकिस्तान की नीति पर बड़ा खुलासा किया.

EXCLUSIVE: चीन-रूस और अमेरिका के लिए ‘गोश्त’ का टुकड़ा है पाकिस्तान, ईरानी जंग ने बताया कैसे सिर्फ रोटी-बोटी का है रिश्ता
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संजीव चौहान
By: संजीव चौहान7 Mins Read

Updated on: 11 March 2026 8:17 PM IST

अमेरिका के इशारे या उसके उकसाने पर इजराइल की ओर से शुरू की गई खूनी जंग में ईरान ने जवाबी हमलों में कोई लिहाज नहीं किया है. फिर चाहे वह इजराइल हो अमेरिका या फिर बाकी अन्य वे तमाम मुस्लिम देश जिनकी हदों में अमेरिकी-सैन्य अड्डे थे. बेशक अमेरिका के उकसाने पर बम-बारूद के लालच में ईरान से जंग इजराइल लड़ रहा है. मगर घर बैठे जबरिया ही सिर पर आ टंगी जंग में ईरान ने उन मुस्लिम देशों को भी उनकी औकात बता दी है जिनकी, जमीन पर अमेरिका अपने सैन्य अड्डे स्थापित करके खुद को दुनिया के तमाम मुस्लिम देशों को अपना गुलाम या खुद को उनका ‘बॉस-दादा’ समझ रहा था.

कौन हैं जसिंदर सिंह सोढ़ी

अंतरराष्ट्रीय विदेश, सैन्य सामरिक, रक्षा और कूटनीति व जियोपॉलिटिक्स से जुड़ी इन तमाम अंदर की बातों का खुलासा किया है भारतीय थलसेना के रिटायर्ड लेफ्टिनेंट कर्नल जसिंदर सिंह सोढ़ी (Lt Col JS Sodhi, Indian Army) ने. इन दिनों महाराष्ट्र में मौजूद जे एस सोढ़ी भारत की राजधानी नई दिल्ली में मौजूद “स्टेट मिरर हिंदी” के एडिटर इनवेस्टीगेशन से

एक्सक्लूसिव बात कर रहे थे. भारतीय फौज के पूर्व लेफ्टिनेंट कर्नल से पूछा गया कि, 'सऊदी अरब पर हुए ईरानी हमले को देखने के बाद भी पाकिस्तान खामोश क्यों रहा है? जबकि बीते साल यानी साल 2025 के सितंबर महीने में ही सऊदी अरब और पाकिस्तान के बीच अहम सैन्य समझौता-संधि हुई थी, जिसके मुताबिक इन दोनो देशों में से किसी के भी ऊपर दुश्मन द्वारा किया गया हमला, दूसरे देश पर हमला माना जाएगा. और जिस देश पर हमला हुआ होगा उसकी मदद के लिए तुरंत वह देश सैन्य बल के साथ खड़ा होगा, जिसके ऊपर हमला न हुआ होगा.'

ईरान को क्यों दाद देनी चाहिए?

स्टेट मिरर हिंदी के सवाल के जवाब में पूर्व लेफ्टिनेंट कर्नल जेएस सोढ़ी ने कहा, “ईरान जिस दिलेरी के साथ खुद पर जबरन अमेरिका और इजराइल द्वारा थोपी जा चुकी जंग का जवाब दे रहा है. उसने इजराइल-अमेरिका को कहीं मुंह दिखाने के काबिल नहीं छोड़ा है. दुनिया भले देख रही हो कि हमला इजराइल ने अमेरिका के इशारे पर ईरान पर किया है. मैं एक पूर्व भारतीय फौजी अफसर होने के नाते मगर इसे इस नजर से देख रहा हूं कि कैसे न केवल अमेरिका, इजराइल अपितु अन्य उन देशों पर हमले बोलकर ईरान ने बहादुरी की मिसाल कायम की है, जिन मुस्लिम देशों में अमेरिका अपने सैन्य अड्डे बनाकर खुद को बहुत ताकतवर और बाकी मुस्लिम देशों को अपना ‘पालतू या गुलाम’ समझ रहा था.'

पाकिस्तान ‘गोश्त’ का टुकड़ा क्यों?

भारतीय फौज के पूर्व अफसर अपनी बात जारी रखते हुए और स्टेट मिरर हिंदी के सवालों के जवाब में कहते हैं, “पाकिस्तान का अपना कोई ईमान-धर्म नहीं है. वह बनना तो इस्लामिक कंट्रीज का गुरु चाहता है मगर उसकी ओछी हरकतें उसे हर जगह ले जा पटक कर नंगा कर देती हैं. सच पूछिए तो पाकिस्तान सिर्फ और सिर्फ भारत का सबसे बड़ा सिर-दर्द और दुनिया की तीन महाशक्तियों (चीन अमेरिका रुस) के लिए गोश्त का वह टुकड़ा भर है, जिसका इस्तेमाल यह दुनिया के सबसे ताकतवर देश आइंदा भविष्य में कभी भी अपने शिकार को हलाक-खल्लास करने के लिए एक ‘गोश्त के टुकड़े’ की तरह आगे फेंक कर करेंगी.”

पाकिस्तान रोटी-बोटी का दोस्त ही क्यों?

स्टेट मिरर हिंदी के साथ अपनी लंबी और विशेष बातचीत आगे बढ़ाते हुए भारतीय थलसेना के अनुभवी पूर्व लेफ्टिनेंट कर्नल जसिंदर सिंह सोढ़ी कहते हैं, “ दुनिया पूछ रही है कि जब ईरान ने पाकिस्तान के पक्के दोस्त और इस्लामिक कंट्री सऊदी अरब की जमीन पर मौजूद अमेरिकी सैन्य अड्डों पर बेखौफ होकर ऊपर हमला किया. तब भी पाकिस्तान कुछ महीनों पहले ही इन दोनो देशों (पाकिस्तान-सऊदी अरब) के बीच हुई सैन्य-संधि के बावजूद, पाकिस्तान दुम दबाकर बिल में छिपा बैठा रहा है? जबकि संधि के हिसाब से पाकिस्तान को सऊदी अरब पर ईरानी हमले के जवाब में तुरंत ईरान के ऊपर जवाबी हमला बोल देना चाहिए था. पाकिस्तान ऐसा कभी करने की औकात ही नहीं रखता है. क्योंकि पाकिस्तान की कोई विदेश, कूटनीति सैन्य या सामरिक नीति या जियोपॉलिटिक्स तो है ही नहीं. उसका दुनिया में अगर किसी से कोई रिश्ता है तो सिर्फ ‘मतलबपरस्ती’ का और ‘रोटी-बोटी’ भर का.

महाशक्तियों से भी इतनी ही दोस्ती क्यों?

अमेरिका, चीन या रूस जो भी दुनिया की वह महाशक्ति या फिर सामान्य देश भी, जो पाकिस्तान को दौलत देता रहेगा, पाकिस्तान उसकी के पावों में पड़ा लोटता रहेगा. पाकिस्तान का अंतरराष्ट्रीय नीति और संबंधों से कोई वास्ता तो दूर दूर तक का है ही नहीं. पाकिस्तान का सिर्फ वही दोस्त है जो उसके घरों के चूल्ले जलवाता रहे. जो देश पाकिस्तानी फौज के अफसरों और वहां के नेताओं-हुक्मरानों की जेबों में नोट और मुंह में बोटी-बिरयानी भरता रहे. वही पाकिस्तान का दोस्त है. और पाकिस्तान भी उसी का दोस्त है.

पाकिस्तान की इज्जत क्यों नहीं?

भारत को चिंता दुनिया में मौजूद अपने अन्य दुश्मनों से ज्यादा पाकिस्तान से खतरे की होनी चाहिए. क्योंकि रोटी-बोटी का यह दोस्त और दुनिया की तीन महशक्तियों (चीन अमेरिका रूस) के लिए महज उन्हें अपना शिकार हलाक करने के वास्ते, उस शिकार के सामने डालने के लिए ‘गोश्त का टुकड़ा’ से ज्यादा पाकिस्तान जब कोई अहमियत ही नहीं रखता. तो फिर पाकिस्तान के लिए कैसी इज्जत और किसकी इज्जत. वैसे भी देख लीजिए पाकिस्तान को अपनी इज्जत का ही ख्याल होता तो क्या वह, कटोरा लेकर एक छोड़ तीन तीन देशों (चीन अमेरिका पाकिस्तान) की चौखटों पर भीख में चंद कौड़ियों की खातिर दिन रात खड़ा होकर क्या एड़ियां रगड़ रहा होता?

बेशर्मी की भी क्या कोई हद होती है?

ऐसे में अगर पाकिस्तान से कोई यह सवाल करे कि उसके दोस्त सऊदी अरब में मौजूद अमेरिकी सैन्य अड्डों पर भीषड़ ईरानी हमलों के बाद भी आखिर पाकिस्तान ने जवाब में ईरान पर हमला क्यों नहीं बोला? यह सवाल कोई मायने नहीं रखता है. जमाना तो पाकिस्तान से पूछ रहा है कि उसने ईरान द्वारा सऊदी अरब के ऊपर किए गए हमले का जवाब क्यों नहीं दिया? मैं पूछता हूं कि क्या पाकिस्तान अपने ही घर में होने वाले हमलों (बलोचिस्तान) से आज तक अपने को कभी बचा पाया है. जबकि बलोच फौज दिन रात पाकिस्तानी फौज का कत्ल-ए-आम करके वहां के हुक्मरानों की खिल्ली उड़ाते रहते हैं.

स्टेट मिरर स्पेशल
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