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जंग में मरना या सरेंडर करना नहीं, खुद को उड़ाना वफादारी; नॉर्थ कोरिया के सैनिकों को लेकर क्यों खुश हैं किम जोंग उन?

उत्तर कोरिया के शासक किम जोंग उन ने रूस-यूक्रेन युद्ध में आत्महत्या करने वाले सैनिकों को 'वफादार' बताया है, जिससे बड़ा विवाद खड़ा हो गया है. किंग जोंग का यह बयान उत्तर कोरिया की सैन्य नीति और युद्ध में उसकी भूमिका को उजागर करता है.

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किम जोंग उन 

( Image Source:  X@havadisver )

उत्तर कोरिया के नेता किम जोंग उन (Kim Jong Un) के एक बयान से दुनिया भर में हलचल मच गई है, जिसमें उन्होंने युद्ध के दौरान आत्महत्या करने वाले सैनिकों की खुलकर प्रशंसा की है. यह बयान उस समय आया, जब राजधानी Pyongyang के बाहरी इलाके में रूस और उत्तर कोरिया के सैनिकों की संयुक्त स्मृति में एक विशाल स्मारक का उद्घाटन किया गया.

राज्य मीडिया Korean Central News Agency (KCNA) के मुताबिक, किम ने उन सैनिकों को 'सबसे वफादार' बताया, जिन्होंने पकड़े जाने से बचने के लिए खुद को विस्फोट से उड़ा लिया या आत्महत्या कर ली. यह बयान लंबे समय से चल रही उस आशंका की पुष्टि करता है कि उत्तर कोरियाई सैनिकों को दुश्मन के हाथ लगने के बजाय खुद की जान लेने का निर्देश दिया जाता रहा है.


क्यों खास है स्मारक?

यह स्मारक सिर्फ एक कब्रिस्तान नहीं, बल्कि एक बड़ा प्रचार केंद्र भी है, जहां सैनिकों की कब्रें, उनके अवशेष, व्यक्तिगत सामान और कथित तौर पर कब्जे में लिए गए हथियार प्रदर्शित किए गए हैं. रिपोर्ट्स के अनुसार, इस परिसर में हजारों सैनिकों के नाम दर्ज हैं, जो Russia-Ukraine War में मारे गए बताए जा रहे हैं. यह पहली बार है जब उत्तर कोरिया ने इतने खुले तौर पर इस युद्ध में अपनी भूमिका को स्वीकार किया है.

उत्तर कोरिया के कितने सैनित कुर्स्क में तैनात किए गए थे?

दक्षिण कोरिया और पश्चिमी देशों के अनुमान के मुताबिक, 10,000 से ज्यादा उत्तर कोरियाई सैनिक रूस के कुर्स्क क्षेत्र में तैनात किए गए थे, जिनमें से कई मारे गए या घायल हुए हैं. हालांकि, उत्तर कोरिया ने पहले कभी इस स्तर पर अपने नुकसान को सार्वजनिक रूप से स्वीकार नहीं किया था.


क्यों मचा है विवाद?

इस पूरे घटनाक्रम ने एक नया अंतरराष्ट्रीय विवाद भी खड़ा कर दिया है. कुछ उत्तर कोरियाई सैनिक यूक्रेन के कब्जे में जिंदा पकड़े गए हैं. अंतरराष्ट्रीय कानून के तहत युद्ध खत्म होने के बाद इन्हें वापस भेजना होगा, लेकिन मानवाधिकार संगठनों का कहना है कि उन्हें वापस भेजना उनके लिए खतरनाक साबित हो सकता है. किम जोंग उन का यह बयान न सिर्फ उत्तर कोरिया की सैन्य सोच को उजागर करता है, बल्कि रूस-यूक्रेन युद्ध में उसकी बढ़ती भूमिका और रणनीति की भी साफ तस्वीर पेश करता है.

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