कम खर्च में बड़ा वार! रूस-यूक्रेन मॉडल से सीखकर US ने Iran में उतारा LUCAS, क्या है ये घातक ड्रोन?
कम बजट में भारी तबाही मचाने वाला ड्रोन LUCAS अब ग्लोबल डिसकशन का विषय बन गया है. रूस-यूक्रेन युद्ध से मिली सीख के बाद अमेरिका ने ईरान के खिलाफ इस सस्ते लेकिन असरदार हथियार का इस्तेमाल किया है. सवाल यह है कि आखिर क्या है LUCAS और कैसे यह मॉडर्न वॉर की रणनीति को बदल सकता है?
Israel-Iran War Update: अमेरिका ने अपने ड्रोन युद्ध की क्षमता में बड़ा इजाफा करते हुए पहली बार ईरान के खिलाफ उसकी ही रणनीति का इस्तेमाल किया. अमेरिका ने इजराइल के साथ मिलकर 'ऑपरेशन एपिक फ्यूरीट के तहत कम लागत वाले एकतरफा हमले वाले ड्रोन लो-कॉस्ट अनमैन्ड कॉम्बैट अटैक सिस्टम’ (LUCAS) का इस्तेमाल किया.
शनिवार को अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और इजराइली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के नेतृत्व में हुए इन हमलों में ईरान की अहम सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया गया. इन हमलों में तेहरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्लाह अली खामेनेई भी मारे गएय
अमेरिका ने कम लागत में कैसे पहुंचाया भारी नुकसान?
इस ऑपरेशन में अमेरिका और इजराइल ने आधुनिक और कम लागत वाले हथियारों की मिक्स्ड कैटेगरी का इस्तेमाल किया. अगली पीढ़ी के फाइटर जेट और लंबी दूरी की क्रूज मिसाइलों के साथ सस्ते ड्रोन भी तैनात किए गए. इसे रणनीति और पैमाने दोनों के लिहाज से बड़ा कदम माना जा रहा है.
ऑपरेशन एपिक फ्यूरी के तहत अमेरिकी सेना ने LUCAS ड्रोन का इस्तेमाल किया, जो एकतरफा 'कामिकाजे' ड्रोन है. इसे ईरान के शाहेद-136 ड्रोन प्लेटफॉर्म के आधार पर तैयार किया गया है. यूएस सेंट्रल कमांड (CENTCOM) ने एक्स पर बताया कि ये कम लागत वाले ड्रोन ईरान के शाहेद ड्रोन की तर्ज पर बनाए गए हैं.
क्या है LUCAS ड्रोन?
LUCAS को कम लागत और एक बार इस्तेमाल होने वाले सिस्टम के रूप में डिजाइन किया गया है. इसे बड़े पैमाने पर अलग-अलग निर्माता कंपनियों के जरिए बनाया जा सकता है. एक ड्रोन की कीमत लगभग 35,000 डॉलर बताई गई है, जो कई पारंपरिक सटीक हथियारों से काफी सस्ता है.
सस्ते हथियारों की बड़ी तादाद में तैनाती की इस रणनीति को 'अफोर्डेबल मास' कहा जा रहा है, यानी कम कीमत के ज्यादा हथियारों से दुश्मन को घेरना. रूस-यूक्रेन युद्ध के बाद ड्रोन की प्रभावशीलता को देखते हुए इस रणनीति को ज़्यादा अहमियत मिली है.
कैसे काम करता है LUCAS?
- LUCAS ड्रोन को इस तरह बनाया गया है कि इसे अलग-अलग कामों के लिए आसानी से इस्तेमाल किया जा सके. जरूरत के हिसाब से इसमें अलग तरह का सामान (पेलोड) लगाया या बदला जा सकता है.
- यह दुश्मन पर हमला करने, निगरानी करने और संचार में मदद करने जैसे कई काम कर सकता है.
- यह ट्रेनिंग के दौरान अभ्यास के लिए टारगेट ड्रोन की तरह भी इस्तेमाल हो सकता है और असली युद्ध में हमलावर ड्रोन के रूप में भी काम करता है.
- सबसे खास बात यह है कि इसे चलाने के लिए बहुत ज्यादा तकनीकी विशेषज्ञ होने की जरूरत नहीं है. आम सैनिक भी थोड़ी ट्रेनिंग के बाद इसे संभाल सकते हैं. इसलिए आधुनिक युद्ध में इसे एक बड़ा और उपयोगी हथियार माना जा रहा है.
अमेरिका और इजराइल ने ईरान की किन जगहों को बनाया निशाना?
CENTCOM के मुताबिक ऑपरेशन एपिक फ्यूरी में इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) के कमांड और कंट्रोल केंद्र, ईरानी एयर डिफेंस सिस्टम, मिसाइल और ड्रोन लॉन्च साइट्स और सैन्य एयरफील्ड को निशाना बनाया गया है.
क्या है टॉमहॉक क्रूज मिसाइल जिसका अमेरिका ने किया इस्तेमाल?
हमलों में टॉमहॉक लैंड अटैक मिसाइलों का भी इस्तेमाल किया गया ता. ये लंबी दूरी की, सटीक निशाना साधने वाली क्रूज मिसाइलें हैं, जिन्हें आमतौर पर समुद्र से लॉन्च किया जाता है. टॉमहॉक करीब 1,000 मील (1,600 किलोमीटर) दूर तक निशाना साध सकती हैं. इसकी लंबाई लगभग 20 फीट (6.1 मीटर), पंखों का फैलाव 8.5 फीट और वजन करीब 3,330 पाउंड (1,510 किलोग्राम) है।.
क्या पहले टॉम हॉक मिसाइल का हो चुका है इस्तेमाल?
पेंटागन के बजट दस्तावेजों के अनुसार अमेरिका 2026 में 57 टॉमहॉक मिसाइल खरीदने की योजना बना रहा है, जिनकी औसत कीमत लगभग 1.3 मिलियन डॉलर प्रति मिसाइल है. इससे पहले भी टॉमहॉक मिसाइलों का इस्तेमाल यमन में हूती ठिकानों पर हमलों में किया जा चुका है.
क्या फाइटर जेट का हुआ इस्तेमाल?
ऑपरेशन में एफ-35 और एफ/ए-18 जैसे आधुनिक लड़ाकू विमान भी शामिल थे. एफ-35 पांचवीं पीढ़ी का स्टील्थ फाइटर जेट है, जिसे रडार से बचते हुए सटीक हथियार ले जाने के लिए डिजाइन किया गया है. यह दुश्मन के रडार सिस्टम को निशाना बनाने वाली मिसाइलें भी दाग सकता है. एफ/ए-18, जिसे बोइंग बनाती है, मल्टी-रोल विमान है और हवा से हवा तथा हवा से जमीन दोनों तरह के मिशन कर सकता है. इसमें अलग-अलग तरह के बम और मिसाइल लगाए जा सकते हैं.




