Iran का बड़ा पलटवार! बहरीन में अमेरिकी नेवी हेडक्वार्टर धधका, कुवैत में भी हमला; क्या अब और बिगड़ जाएंगे हालात? डिटेल में समझें
ईरान ने अमेरिकी हमलों के जवाब में बहरीन और कुवैत में अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर हमले का दावा किया. बहरीन में फिफ्थ फ्लीट मुख्यालय में भीषण आग लग गई. अब इसके बाद जंग और भयानक रूप लेती दिख रही है.
ईरान ने गुरुवार को अमेरिका की ताजा सैन्य कार्रवाई के जवाब में बहरीन और कुवैत में मौजूद अमेरिकी सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया. ईरानी सरकारी मीडिया के मुताबिक, ईरान ने बहरीन में अमेरिकी नौसेना के फिफ्थ फ्लीट (Fifth Fleet) के मुख्यालय और कुवैत में स्थित एक अमेरिकी सैन्य बेस पर हवाई हमले किए.
ईरानी मीडिया का दावा है कि बहरीन में अमेरिकी नौसेना के फिफ्थ फ्लीट मुख्यालय पर हमले के बाद वहां आग लग गई. वहीं, ईरानी मीडिया ने कुछ वीडियो भी जारी किए, जिनके बारे में दावा किया गया कि उनमें कुवैत स्थित अमेरिकी सैन्य बेस को निशाना बनाते हुए दिखाया गया है. ईरानी मीडिया ने इस बेस को "अमेरिकी आतंकवादियों का ठिकाना" बताया. रिपोर्ट्स के मुताबिक बहरीन की राजधानी मनामा में कई धमाकों की आवाजें सुनी गईं. इससे कुछ देर पहले अधिकारियों ने संभावित हमले की चेतावनी देते हुए एयर रेड सायरन बजाए थे.
कुवैत ने क्या कहा?
यह घटनाक्रम ऐसे समय में हुआ जब ईरान की रिवोल्यूशनरी गार्ड्स (Revolutionary Guards) ने अमेरिका की ताजा सैन्य कार्रवाई के बाद चेतावनी दी थी कि वह "करारा और विनाशकारी जवाब" देंगे. उधर, कुवैत की सेना ने कहा कि उसकी एयर डिफेंस प्रणाली "दुश्मन के मिसाइल और ड्रोन हमलों" को रोक रही है.
कुवैत की सेना के जनरल स्टाफ ने एक्स (X) पर पोस्ट करते हुए कहा, "जो धमाकों की आवाजें सुनाई दे रही हैं, वे हमारी एयर डिफेंस प्रणाली द्वारा दुश्मन के हमलों को रोकने की कार्रवाई का परिणाम हैं." हालांकि, सेना ने यह नहीं बताया कि मिसाइल और ड्रोन किस तरफ से आए थे.
बहरीन के गृह मंत्रालय ने क्या कहा?
इससे पहले बहरीन के गृह मंत्रालय ने पुष्टि की थी कि ईरान की रिवोल्यूशनरी गार्ड्स द्वारा अमेरिका के खिलाफ जवाबी कार्रवाई की धमकी दिए जाने के बाद एयर रेड सायरन बजाए गए. गृह मंत्रालय ने एक्स पर पोस्ट कर कहा, "सायरन बजा दिए गए हैं. सभी नागरिकों और निवासियों से अपील है कि वे शांत रहें और अपने सबसे नजदीकी सुरक्षित स्थान पर चले जाएं."
क्या इससे पहले अमेरिका ने किए थे हमले?
इससे पहले गुरुवार को अमेरिका ने ईरान पर एक और बड़े सैन्य हमले किए थे. अमेरिका का कहना है कि ये हमले स्ट्रेट ऑफ होर्मुज (Strait of Hormuz) में जहाजों की सुरक्षित आवाजाही सुनिश्चित करने के लिए किए गए हैं. अमेरिका के अनुसार, मंगलवार को इस अहम समुद्री मार्ग से गुजर रहे तीन मालवाहक जहाजों पर हुए हमलों के बाद यह कार्रवाई की गई.
डोनाल्ड ट्रंप ने सीजफायर पर क्या कहा?
ये हमले उस समय किए गए जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि ईरान के साथ युद्ध खत्म करने के लिए हुआ संघर्षविराम अब "खत्म हो चुका है." रिपोर्टों के मुताबिक, अमेरिकी हमलों के कारण ईरान के दक्षिणी तटीय इलाकों के कई शहरों में जोरदार धमाके हुए और कुछ इलाकों में बिजली आपूर्ति भी प्रभावित हुई थी.
अमेरिकी सेना ने क्या कहा था?
अमेरिकी सेना की मध्य पूर्व कमान सेंटकॉम (CENTCOM) ने एक्स पर लिखा, "अमेरिकी सेंट्रल कमांड की सेना ने ईरान की उस क्षमता को और कमजोर करने के लिए अतिरिक्त हमले शुरू किए हैं, जिससे वह स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में नौवहन की स्वतंत्रता को खतरा पहुंचा सके." सेंटकॉम ने आगे कहा, "अंतरराष्ट्रीय जलमार्ग से गुजर रहे व्यावसायिक जहाजों और नागरिक क्रू पर हाल में हुए बिना उकसावे वाले हमलों के लिए अमेरिका ईरान को जिम्मेदार ठहराता है."
क्या अब और बिगड़ जाएंगे हालात?
ईरान के हमले के बाद अब हालात और नाजुक होते दिख रहे हैं. डोनाल्ड ट्रंप इसको लेकर पहले ही चेतावनी दे चुके हैं. ट्रंप ने कहा था अगर फिर हमला हुआ तो हालात और बिगड़ेंगे. उन्होंने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म Truth Social पर लिखा, "यह कार्रवाई ईरान द्वारा कल जहाजों पर किए गए हमलों के जवाब में की गई है. अगर ऐसा दोबारा हुआ तो हालात इससे भी ज्यादा खराब होंगे."
कितना अहम है स्ट्रेट ऑफ होर्मुज?
स्ट्रेट ऑफ होर्मुज दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री व्यापार मार्गों में से एक है. अमेरिका और इज़राइल द्वारा 28 फरवरी को ईरान पर हवाई हमले शुरू होने से पहले दुनिया के लगभग पांचवें हिस्से (करीब 20%) का तेल इसी रास्ते से गुजरता था. हालांकि, ईरान ने मालवाहक जहाजों पर हुए हमलों की जिम्मेदारी नहीं ली है, लेकिन अमेरिका लगातार इन हमलों के लिए तेहरान को जिम्मेदार ठहरा रहा है.
क्या खत्म हो गई सीजफायर की उम्मीद?
इन नए हमलों के बाद 17 जून को हस्ताक्षरित उस अंतरिम मेमोरेंडम ऑफ अंडरस्टैंडिंग (MoU) के भविष्य पर भी सवाल खड़े हो गए हैं, जिससे युद्ध समाप्त होने की उम्मीद जगी थी. तुर्की में नाटो शिखर सम्मेलन से पहले जब ट्रंप से पूछा गया कि क्या यह अंतरिम समझौता अब खत्म माना जाए, तो उन्होंने कहा, "यह बहुत दिलचस्प सवाल है. मेरी नजर में यह खत्म हो चुका है. मैं अब उनसे कोई बातचीत नहीं करना चाहता." ट्रंप ने आगे कहा, "अगर हम ईरान के साथ कोई समझौता भी करते हैं, तो मुझे नहीं लगता कि वह टिक पाएगा. मैंने उन्हें बेहद बेईमान लोग पाया है."
हालांकि, समझौते को लगभग खत्म बताते हुए भी ट्रंप ने कहा कि उन्हें नहीं लगता कि यह संघर्ष फिर से पूरी तरह युद्ध का रूप लेगा. उन्होंने यह भी कहा कि स्थायी समाधान के लिए आगे बातचीत होगी या नहीं, इस पर अभी कुछ तय नहीं है. ट्रंप ने कहा, "अब जो भी होगा, वह बहुत जल्दी खत्म होगा... और इससे हालात पहले से ज्यादा सुरक्षित होंगे, खासकर तेल आपूर्ति के लिहाज से."




