Robots ने बनाया दुनिया का सबसे बड़ा रेलवे स्टेशन, Elon Musk भी रह गए दंग; जानें चीन के Chongqing Railway Station की कहानी
एलन मस्क ने चीन के चोंगकिंग ईस्ट रेलवे स्टेशन का वीडियो शेयर किया है, जिसे दुनिया का सबसे बड़ा रेलवे स्टेशन माना जा रहा है. जानिए कैसे 38 महीनों में रोबोट तकनीक की मदद से तैयार हुआ यह विशाल प्रोजेक्ट.
अमेरिका के राष्ट्रपति Donald Trump के साथ हाल ही में चीन दौरे पर गए अरबपति उद्योगपति Elon Musk ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर चीन के विशाल चोंगकिंग ईस्ट रेलवे स्टेशन के निर्माण से जुड़ा एक वीडियो साझा किया. यह स्टेशन दुनिया का सबसे बड़ा रेलवे स्टेशन माना जा रहा है.
मस्क ने वीडियो के साथ कोई कैप्शन या टिप्पणी नहीं लिखी, लेकिन उनका यह पोस्ट लोगों के बीच चर्चा का विषय बन गया. इसकी एक बड़ी वजह यह भी है कि एलन मस्क पहले कई बार सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था को लेकर आलोचनात्मक राय दे चुके हैं. हालांकि, इस स्टेशन की असली कहानी इससे कहीं ज्यादा दिलचस्प है, क्योंकि इसे केवल 38 महीनों में तैयार किया गया और इसके निर्माण में बड़ी संख्या में रोबोट तकनीक का इस्तेमाल हुआ.
क्या है इस रेलवे स्टेशन की खासियत?
- Chongqing East Railway Station को मई 2025 में आम लोगों के लिए खोला गया. यह एक विशाल मल्टी-मॉडल ट्रांसपोर्ट हब है और क्षेत्रफल के हिसाब से दुनिया का सबसे बड़ा रेलवे स्टेशन माना जाता है.
- यह स्टेशन दक्षिण-पश्चिम चीन के चोंगकिंग शहर में स्थित है. चोंगकिंग चीन का सबसे बड़ा शहर माना जाता है, चाहे बात आबादी की हो या प्रशासनिक क्षेत्रफल की. आज यह शहर चीन की आर्थिक ताकत का अहम केंद्र बन चुका है.
- जहां दुनिया के कई देशों में बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट पूरे होने में वर्षों या दशकों लग जाते हैं, वहीं चीन ने 12.2 लाख वर्ग मीटर में फैले इस विशाल रेलवे स्टेशन को सिर्फ 38 महीनों में तैयार कर दिया.
- इस स्टेशन को आधिकारिक तौर पर दुनिया का सबसे बड़ा रेलवे स्टेशन माना गया है. इसमें 15 प्लेटफॉर्म और 29 ट्रैक बनाए गए हैं, जिन्हें तीन अलग-अलग रेल यार्ड में बांटा गया है.
- स्टेशन को इस तरह डिजाइन किया गया है कि यहां पीक समय में हर घंटे लगभग 16 हजार यात्री आ-जा सकें. आठ मंजिला इस मल्टी-लेवल स्टेशन में हाई-स्पीड रेल, सामान्य रेलवे, मोनोरेल, बस, टैक्सी और लंबी दूरी की बस सेवाओं को एक साथ जोड़ा गया है.
- चीन की सरकारी समाचार एजेंसी Xinhua की रिपोर्ट के मुताबिक, मई 2022 में डिजाइन मंजूर होने से लेकर 2025 में उद्घाटन तक स्टेशन का निर्माण केवल 38 महीनों में पूरा हो गया. इसे “रोबोट क्रांति” का उदाहरण बताया गया है.
क्या रोबोट आर्मी के जरिए बना ये रेलवे स्टेशन?
यह प्रोजेक्ट कठिन पहाड़ी इलाके और 40 डिग्री सेल्सियस से ज्यादा तापमान वाले मौसम में बनाया गया. ऐसे हालात में पारंपरिक निर्माण तकनीकों की जगह बड़े पैमाने पर रोबोट तकनीक का इस्तेमाल किया गया. रिपोर्ट के मुताबिक, इस स्टेशन को बनाने में “रोबोटों की सेना” ने अहम भूमिका निभाई.
Robots ने कैसे बनाया दुनिया का सबसे बड़ा रेलवे स्टेशन?
LiDAR, AI और 5G तकनीक से लैस लेजर-गाइडेड रोबोटों ने कंक्रीट लेवलिंग का काम इंसानों की तुलना में तीन गुना तेजी से और बेहद सटीक तरीके से किया. इससे मजदूरी लागत में करीब 40 प्रतिशत तक कमी आई. ग्लास इंस्टॉलेशन रोबोटों ने 800 किलो तक के भारी कांच पैनलों को सुरक्षित तरीके से लगाया. इससे काम की रफ्तार तीन गुना बढ़ गई और दुर्घटनाओं का खतरा लगभग 90 प्रतिशत तक कम हो गया. इसके अलावा ऑम्निडायरेक्शनल वेल्डिंग रोबोट और 24 घंटे निगरानी करने वाले पेट्रोलिंग रोबोटों ने भी निर्माण कार्य को तेज और सुरक्षित बनाने में मदद की.
कितना आसान हुआ सफर?
China Railway 11th Bureau के अधिकारियों के मुताबिक, रोबोट तकनीक के इस्तेमाल से मजदूरी लागत लगभग आधी हो गई, काम की गति तीन गुना बढ़ी और सुरक्षा से जुड़े हादसों में 90 प्रतिशत तक कमी आई. यह स्टेशन चीन के विशाल हाई-स्पीड रेल नेटवर्क का हिस्सा है और दक्षिण-पश्चिम चीन को 14 बड़े शहरों से जोड़ता है.
चोंगकिंग से यात्री केवल एक घंटे में चेंगदू पहुंच सकते हैं. झांगजियाजी तक पहुंचने में दो से तीन घंटे लगते हैं. वहीं चांग्शा, वुहान, शिआन और कुनमिंग जैसे शहरों तक करीब तीन घंटे में पहुंचा जा सकता है. बीजिंग, शंघाई और ग्वांगझू की यात्रा लगभग छह घंटे में पूरी हो सकती है.
क्या है चोंगकिंग शहर का इतिहास?
- चोंगकिंग का इतिहास भी काफी पुराना है. यह शहर करीब 3,000 साल पुराना माना जाता है. द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान 1937 में जापानी सेना द्वारा नानकिंग पर कब्जा किए जाने के बाद चोंगकिंग चीनी राष्ट्रवादी सरकार की राजधानी भी बना था.
- चोंगकिंग का विकास खासतौर पर 1960 के दशक में तेज हुआ था. उस समय Mao Zedong ने “थर्ड फ्रंट कैंपेन” शुरू किया था. इस अभियान का उद्देश्य चीन के अंदरूनी और पिछड़े इलाकों में बड़े स्तर पर इंडस्ट्रियल डेवलपमेंट करना था.
- इस योजना के तहत चीन के समुद्री तट वाले विकसित हिस्सों से उद्योगों और निवेश को देश के पश्चिमी और अंदरूनी इलाकों की ओर भेजा गया. इसका मकसद चीन की औद्योगिक और सैन्य क्षमता को सुरक्षित और मजबूत बनाना था.
- आज चोंगकिंग पश्चिमी चीन की सबसे मजबूत अर्थव्यवस्थाओं में गिना जाता है. शहर की अर्थव्यवस्था 440 अरब डॉलर से ज्यादा की है. यहां ऑटोमोबाइल, मोटरसाइकिल, इलेक्ट्रॉनिक्स, लैपटॉप, सेमीकंडक्टर, मशीन निर्माण और केमिकल उद्योग बड़े पैमाने पर मौजूद हैं.
- यांग्त्ज़ी नदी आर्थिक क्षेत्र और चीन की बेल्ट एंड रोड पहल के बीच स्थित होने की वजह से चोंगकिंग व्यापार और लॉजिस्टिक्स के लिए भी बेहद महत्वपूर्ण बन गया है. इसी वजह से चोंगकिंग ईस्ट रेलवे स्टेशन जैसे हाई-स्पीड रेल प्रोजेक्ट को चीन के लिए रणनीतिक रूप से अहम माना गया. शहर की बढ़ती आबादी और तेज विकास के कारण पुराने स्टेशन, खासकर चोंगकिंग नॉर्थ स्टेशन, क्षमता की समस्या से जूझ रहे थे.




