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AI हमारी नौकरियां नहीं, पूरा कंट्रोल छीन सकता है! ब्रिटेन के टॉप एक्सपर्ट ने दी चेतावनी, कहा - कहीं हमारे पास समय खत्म न हो जाए

ब्रिटेन सरकार की एडवांस्ड रिसर्च एजेंसी ARIA से जुड़े AI सेफ्टी एक्सपर्ट डेविड डैलरिम्पल ने चेतावनी दी है कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस इतनी तेज़ी से आगे बढ़ रहा है कि दुनिया के पास उसके खतरों से निपटने के लिए समय कम पड़ सकता है. उन्होंने कहा कि आने वाले पांच वर्षों में AI मशीनें ज्यादातर आर्थिक रूप से अहम काम इंसानों से बेहतर और सस्ते तरीके से कर सकती हैं, जिससे मानव नियंत्रण, नौकरियां, सुरक्षा और वैश्विक अर्थव्यवस्था खतरे में पड़ सकती है.

AI हमारी नौकरियां नहीं, पूरा कंट्रोल छीन सकता है! ब्रिटेन के टॉप एक्सपर्ट ने दी चेतावनी, कहा - कहीं हमारे पास समय खत्म न हो जाए
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( Image Source:  Sora AI )
प्रवीण सिंह
Edited By: प्रवीण सिंह

Published on: 5 Jan 2026 10:41 AM

आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) जिस रफ्तार से आगे बढ़ रहा है, वह अब सिर्फ टेक्नोलॉजी का मुद्दा नहीं रह गया, बल्कि इंसानी सभ्यता के अस्तित्व से जुड़ा सवाल बनता जा रहा है. ब्रिटेन सरकार की एडवांस्ड रिसर्च एजेंसी से जुड़े एक शीर्ष AI सुरक्षा विशेषज्ञ ने चेताया है कि दुनिया के पास AI से जुड़े खतरों के लिए तैयारी करने का समय शायद अब बचा ही नहीं है.

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द गार्डियन की रिपोर्ट के अनुसार यह चेतावनी दी है डेविड डैलरिम्पल (David Dalrymple) ने, जो ब्रिटेन सरकार की Advanced Research and Invention Agency (ARIA) में प्रोग्राम डायरेक्टर और AI सेफ्टी एक्सपर्ट हैं.

‘AI हमसे हर जरूरी क्षेत्र में बेहतर हो जाएगा’

डेविड डैलरिम्पल का कहना है कि असली खतरा उन AI सिस्टम्स से है, जो न सिर्फ इंसानों जैसे काम कर सकें, बल्कि इंसानों से बेहतर, तेज़ और सस्ते तरीके से उन्हें अंजाम दें. डैलरिम्पल कहते हैं, “हमें उन सिस्टम्स को लेकर चिंतित होना चाहिए जो दुनिया में काम करवाने के लिए इंसानों द्वारा किए जाने वाले सभी काम, हमसे बेहतर तरीके से कर सकें. अगर ऐसा हुआ, तो जिन क्षेत्रों में हमें अपनी सभ्यता, समाज और ग्रह पर नियंत्रण बनाए रखने के लिए आगे रहना ज़रूरी है - वहीं हम पिछड़ जाएंगे.” उनका साफ कहना है कि अगर AI हर अहम डोमेन में इंसानों को पछाड़ देता है, तो मानव नियंत्रण कमजोर पड़ सकता है.

सरकार और AI कंपनियों के बीच ‘खतरनाक गैप’

डैलरिम्पल ने एक और गंभीर पहलू की ओर इशारा किया - सरकारी तंत्र और AI कंपनियों की सोच में बड़ा अंतर. उनके मुताबिक, AI पर काम कर रही प्राइवेट कंपनियां जिस तरह के ब्रेकथ्रू की उम्मीद कर रही हैं, उसकी गंभीरता को पब्लिक सेक्टर अभी पूरी तरह समझ ही नहीं पाया है. उन्‍होंने कहा, “चीज़ें बहुत तेज़ी से बदल रही हैं. हो सकता है कि हमारे पास सुरक्षा के लिहाज से आगे निकलने का वक्त ही न बचे.”

5 साल में इंसानों की जगह मशीनें?

सबसे चौंकाने वाला दावा यह है कि आने वाले पांच सालों के भीतर दुनिया की ज्यादातर आर्थिक रूप से अहम नौकरियां मशीनें संभाल सकती हैं. डेविड कहते हैं, “यह साइंस फिक्शन नहीं है कि पांच साल के भीतर अधिकतर आर्थिक रूप से मूल्यवान काम मशीनें इंसानों से बेहतर क्वालिटी और कम लागत पर करने लगें.” इसका सीधा मतलब है नौकरियों पर खतरा, आर्थिक अस्थिरता और सत्ता और नियंत्रण का संतुलन बदलना.

सरकारों के लिए भी खतरे की घंटी

डैलरिम्पल ने सरकारों को आगाह किया कि वे एडवांस्ड AI सिस्टम्स की विश्वसनीयता को हल्के में न लें. ARIA, भले ही सरकारी फंडिंग से चलती हो, लेकिन यह स्वतंत्र रूप से काम करती है और इसका फोकस है ऊर्जा इंफ्रास्ट्रक्चर, क्रिटिकल सिस्टम्स और AI से जुड़े सेफ्टी मैकेनिज़्म. उनका कहना है कि पूरी तरह भरोसेमंद AI बनाने के लिए जिस वैज्ञानिक समझ की जरूरत है, वह आर्थिक दबावों के चलते समय पर विकसित न हो पाए.

अगर परफेक्ट सुरक्षा नहीं, तो नुकसान कम करो

डैलरिम्पल मानते हैं कि अगर AI को पूरी तरह सुरक्षित बनाना समय पर संभव नहीं है, तो कम से कम उसके खतरों को कंट्रोल और मैनेज करना ज़रूरी है. वो कहते हैं, “अगर हम पूरी सुरक्षा हासिल नहीं कर सकते, तो अगला सबसे बेहतर रास्ता है - नुकसान को सीमित करना और जोखिमों को कंट्रोल में रखना.”

तेज़ टेक्नोलॉजी + कमजोर सेफ्टी = तबाही?

AI एक्सपर्ट ने चेताया कि जब टेक्नोलॉजी सेफ्टी से तेज़ भागती है, तो इसके नतीजे सिर्फ तकनीकी नहीं, बल्कि राष्ट्रीय सुरक्षा, वैश्विक अर्थव्यवस्था और सामाजिक स्थिरता, सब पर भारी पड़ सकते हैं. उनका ज़ोर है कि एडवांस्ड AI के व्यवहार को समझने और काबू में रखने के लिए ज्यादा तकनीकी रिसर्च की सख्त जरूरत है.

‘हम नींद में इस बदलाव की ओर बढ़ रहे हैं’

डैलरिम्पल का सबसे डराने वाला बयान यही है, “प्रगति अस्थिर करने वाली भी हो सकती है और अच्छी भी - यही उम्मीद AI के फ्रंटियर पर काम कर रहे लोग कर रहे हैं. मैं चीज़ों को बेहतर बनाने की कोशिश कर रहा हूं, लेकिन यह बहुत ज्यादा जोखिम भरा है. मानव सभ्यता कुल मिलाकर इस बदलाव की ओर नींद में चलते हुए बढ़ रही है.”

ब्रिटेन की AI Security Institute की रिपोर्ट क्या कहती है?

AISI की हालिया रिपोर्ट भी खतरे की पुष्टि करती है -

  • कुछ क्षेत्रों में AI की क्षमता हर 8 महीने में दोगुनी हो रही है
  • एडवांस्ड AI मॉडल्स अब 50% मामलों में अप्रेंटिस-लेवल टास्क पूरे कर रहे हैं
  • कुछ सिस्टम्स ऐसे टास्क खुद पूरा कर लेते हैं, जिनमें किसी मानव विशेषज्ञ को 1 घंटे से ज्यादा लगता है
  • सेल्फ-रिप्लिकेशन (खुद की कॉपी बनाना) जैसे खतरनाक टेस्ट में दो अत्याधुनिक AI मॉडल्स ने 60% से ज्यादा सफलता दर दिखाई

हालांकि AISI यह भी कहता है कि सबसे भयावह परिदृश्य रोज़मर्रा की परिस्थितियों में फिलहाल कम संभव है.

AI अब भविष्य की कहानी नहीं, बल्कि वर्तमान का सबसे बड़ा जोखिम और अवसर - दोनों बन चुका है. सवाल यह नहीं है कि AI आगे बढ़ेगा या नहीं, सवाल यह है कि क्या इंसान उसकी रफ्तार के साथ अपनी सुरक्षा और नियंत्रण भी बनाए रख पाएगा?

टेक न्यूज़
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