Begin typing your search...

Bangladesh Hindu Violence: चोरी के शक में भीड़ ने दौड़ाया, जान बचाने को नहर में कूदा… बांग्लादेश में एक और हिंदू युवक की मौत

बांग्लादेश में धार्मिक अल्पसंख्यकों पर हमले लगातार बढ़ते जा रहे हैं. शरियतपुर जिले में चोरी के शक में भीड़ द्वारा पीछा किए जाने पर 25 वर्षीय हिंदू युवक मिथुन सरकार ने नहर में छलांग लगा दी, जिससे उसकी मौत हो गई. यह घटना 12 फरवरी को होने वाले संसदीय चुनावों से पहले सामने आई है. दिसंबर-जनवरी में हिंदुओं की हत्या, लिंचिंग, आगजनी और गोलीबारी की कई घटनाएं हो चुकी हैं.

Bangladesh Hindu Violence: चोरी के शक में भीड़ ने दौड़ाया, जान बचाने को नहर में कूदा… बांग्लादेश में एक और हिंदू युवक की मौत
X
सागर द्विवेदी
Edited By: सागर द्विवेदी

Published on: 6 Jan 2026 10:36 PM

बांग्लादेश में धार्मिक अल्पसंख्यकों, खासकर हिंदुओं के खिलाफ हिंसा का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है. ताजा मामला देश के शरियतपुर जिले का है, जहां चोरी के शक में भीड़ द्वारा पीछा किए जाने के बाद 25 वर्षीय हिंदू युवक मिथुन सरकार ने जान बचाने के लिए नहर में छलांग लगा दी. नहर में डूबने से उसकी मौत हो गई. मंगलवार दोपहर पुलिस ने शव बरामद किया.

मृतक की पहचान भांडारपुर गांव निवासी मिथुन सरकार के रूप में हुई है. स्थानीय सूत्रों के अनुसार, मिथुन पर चोरी का शक जताया गया था, जिसके बाद लोगों की भीड़ ने उसे दौड़ा लिया. घबराहट में वह पास की नहर में कूद गया, लेकिन तैर न पाने के कारण उसकी जान चली गई.

चुनाव से पहले डर का माहौल, एक के बाद एक हत्याएं

मिथुन सरकार की मौत कोई अकेली घटना नहीं है. बीते कुछ दिनों में बांग्लादेश में हिंदू समुदाय के खिलाफ हुई हिंसक घटनाओं ने पूरे देश में डर और असुरक्षा का माहौल बना दिया है, खासतौर पर तब जब देश 12 फरवरी को होने वाले संसदीय चुनावों की तैयारी कर रहा है. यह चुनाव 2024 के जनविद्रोह के बाद पहली बार हो रहे हैं, जिसमें शेख हसीना सरकार सत्ता से बाहर हुई थी.

एक ही दिन में दो हिंदुओं की हत्या

सोमवार को ही बांग्लादेश के जेसोर जिले में एक हिंदू कारोबारी, जो एक अखबार का कार्यवाहक संपादक भी था, की अज्ञात हमलावरों ने सिर में गोली मारकर हत्या कर दी. इसी दिन नरसिंदी शहर में 40 वर्षीय हिंदू किराना दुकानदार की तेजधार हथियार से हत्या कर दी गई.

जिंदा जलाया गया, पीट-पीटकर मार डाला गया

हिंसा का यह सिलसिला जनवरी की शुरुआत से ही जारी है. 3 जनवरी को शरियतपुर जिले के दमुद्या क्षेत्र में खोकोन चंद्र दास (50) पर हमला कर उसे जिंदा जला दिया गया, जिससे उसकी मौत हो गई. 24 दिसंबर को राजबाड़ी जिले में कथित उगाही के आरोप में अमृत मंडल की पीट-पीटकर हत्या कर दी गई. 18 दिसंबर को मयमनसिंह शहर में कथित ईशनिंदा के आरोप में दीपु चंद्र दास (25) को भीड़ ने मार डाला और बाद में उसके शव को जला दिया गया.

51 घटनाएं, 10 हत्याएं: परिषद का खुलासा

काउंसिल फॉर हिंदू, बौद्ध और क्रिश्चियन यूनिटी ने मंगलवार को जारी बयान में खुलासा किया कि सिर्फ दिसंबर महीने में ही अल्पसंख्यकों पर कम से कम 51 लक्षित हमले हुए, जिनमें 10 हत्याएं शामिल हैं. परिषद के मुताबिक, इन घटनाओं में आगजनी, बलात्कार, लूटपाट और जानलेवा हमले शामिल हैं. परिषद ने आशंका जताई कि ये हमले चुनाव से पहले अल्पसंख्यकों को डराने और चुप कराने की संगठित कोशिश हो सकते हैं.

राजनीतिक अस्थिरता और सांप्रदायिक तनाव का खतरनाक मेल

परिषद की रिपोर्ट में कहा गया, “बांग्लादेश पहले भी राजनीतिक उथल-पुथल देख चुका है, लेकिन मौजूदा हालात संस्थागत कमजोरी और बढ़ती सांप्रदायिक बेचैनी के खतरनाक मेल को दर्शाते हैं.” मानवाधिकार संगठनों का मानना है कि हालिया हत्याएं महज अलग-अलग घटनाएं नहीं हैं, बल्कि यह राज्य की उस विफलता का संकेत हैं, जिसमें वह अपने सबसे कमजोर नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने में नाकाम हो रहा है.

अंतरराष्ट्रीय चिंता, अल्पसंख्यकों की सुरक्षा पर सवाल

जैसे-जैसे 12 फरवरी के चुनाव नजदीक आ रहे हैं, वैसे-वैसे अंतरराष्ट्रीय समुदाय भी बांग्लादेश में अल्पसंख्यकों की सुरक्षा और अंतरिम प्रशासन की स्थिरता को लेकर चिंता जता रहा है. विशेषज्ञों का कहना है कि यदि हालात नहीं सुधरे, तो चुनावी प्रक्रिया की निष्पक्षता और सामाजिक शांति दोनों पर गंभीर खतरा मंडरा सकता है.

अगला लेख