मौलाना साजिद रशीदी के हालिया बयानों ने धर्म, कन्वर्ज़न और संविधान की बहस को एक बार फिर तेज कर दिया है. उनका कहना है कि धर्म का चुनाव डर या दबाव से नहीं, बल्कि समझ और अध्ययन से होता है. इस चर्चा में धार्मिक आस्था, सामाजिक दबाव और भीड़ की मानसिकता जैसे सवाल सामने आते हैं. वीडियो संविधान द्वारा दिए गए सोचने, मानने और न मानने के अधिकार पर भी रोशनी डालता है. देखिए पूरी बातचीत और खुद तय कीजिए आस्था का फैसला नारे करेंगे या आपकी अपनी समझ.