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बंगाल में TMC के अंदर ‘महाभारत’! ममता बनर्जी की लीडरशिप पर उठ रहे सवाल, क्या खत्म हो जाएगी तृणमूल कांग्रेस?

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TMC Internal War Begins? Mamata Banerjee Faces Revolt | Bengal Politics Crisis | Abhishek Banerjee

पश्चिम बंगाल की राजनीति में इस वक्त सबसे बड़ा सवाल यही है - क्या तृणमूल कांग्रेस (TMC) अपने सबसे बड़े अंदरूनी संकट से गुजर रही है? एक तरफ चुनावी झटके… दूसरी तरफ भ्रष्टाचार के आरोप… और अब पार्टी के अंदर से उठती बगावत की आवाजें... ममता बनर्जी की पार्टी में सबकुछ ठीक नहीं चल रहा. हाल के दिनों में TMC के कई बड़े नेताओं के बयान और इस्तीफों ने बंगाल की राजनीति में भूचाल ला दिया है. पूर्व राज्यसभा सांसद शांतनु सेन के इस्तीफे ने इस बहस को और तेज कर दिया है. शांतनु सेन ने पार्टी छोड़ते समय सीधे-सीधे RG Kar केस, भ्रष्टाचार और नैतिक गिरावट जैसे मुद्दों का जिक्र किया. उन्होंने कहा कि मौजूदा हालात में पार्टी का बचाव करना उनके लिए संभव नहीं है। यानी सवाल सिर्फ एक नेता के इस्तीफे का नहीं…बल्कि TMC की अंदरूनी टूट का है. इसी बीच वरिष्ठ नेता तारक सिंह के बयान ने भी पार्टी नेतृत्व को कटघरे में खड़ा कर दिया. उन्होंने इशारों-इशारों में कहा कि पार्टी को अब आत्ममंथन की जरूरत है और जमीनी कार्यकर्ताओं की आवाज दबाई जा रही है. सबसे दिलचस्प बात यह है कि यह सब ऐसे समय हो रहा है जब बंगाल में TMC को हालिया चुनावों में बड़ा राजनीतिक नुकसान उठाना पड़ा है. बीजेपी ने बंगाल की राजनीति में अपनी पकड़ मजबूत की है और अब TMC के अंदर की कलह विपक्ष को बड़ा मौका देती दिख रही है. राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि पार्टी के अंदर दो धड़े साफ दिखाई दे रहे हैं. एक धड़ा ममता बनर्जी के साथ मजबूती से खड़ा है, जबकि दूसरा धड़ा पार्टी में बदलाव और नई रणनीति की मांग कर रहा है. इन सबके बीच अभिषेक बनर्जी का नाम भी लगातार चर्चा में है. सवाल उठ रहे हैं कि क्या भविष्य में पार्टी की कमान पूरी तरह अभिषेक के हाथों में जाएगी? और अगर ऐसा हुआ तो क्या TMC के पुराने नेता खुद को हाशिए पर महसूस कर रहे हैं?