ईरान-इजराइल को आपस में अमेरिका ने जंग-ए-मैदान में भिड़वा तो डाला है. यह जंग कब कहां और कितने बदतर मुकाम पर जाकर रुकेगी या इस जंग को कौन विराम दिलाएगा? इस सवाल का जवाब अमेरिका के पास भी नहीं है. महाधूर्त अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के चेहरे पर हवाइयां उड़ रही हैं. युद्ध में सीधे न उतरने के बाद भी मक्कार ट्रंप की चाल-चेहरा देखकर साफ-साफ अंदाजा लगने लगा है कि उसने ईरान-इजराइल को भिड़ाकर न केवल जिंदगी की पहली और अंतिम बड़ी गलती कर डाली है. अपितु यह जंग तीसरे विश्वयुद्ध का ‘रिहर्सल’ भी है. आज नहीं तो कल इस खूनी जंग की तपिश में अमेरिका और ट्रंप तो स्वाहा होने ही हैं. ऐसे में डॉलर, सोना, चांदी, रुपया, तेल, विदेश व्यापार नीति का क्या होगा? क्या जिन देशों या जिन लोगों के पास सोने चांदी का भंडार होगा वे संभावित तीसरे विश्वयुद्ध की मार से महफूज रह पाएंगे? इन्हीं तमाम बेहद उलझे हुए यक्ष प्रश्नों के माकूल जवाब की उम्मीद में स्टेट मिरर हिंदी के एडिटर इनवेस्टीगेशन ने एक्सक्लूसिव बात की भारत के मशहूर अर्थशास्त्री डॉ. शरद कोहली से. डॉ. कोहली ने जो कुछ बताया इस इंटरव्यू के जरिए वह सुनकर आप घबराइए नहीं मगर आपको और हमें सतर्क हो जाने की जरूरत है.