अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल (क्रूड ऑयल) की कीमतें 100 डॉलर प्रति बैरल से नीचे बनी हुई हैं, लेकिन इसके बावजूद भारत में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में राहत मिलने की उम्मीद फिलहाल नजर नहीं आ रही है. उल्टा, आने वाले महीनों में ईंधन की कीमतों में बढ़ोतरी की आशंका जताई जा रही है. दिलचस्प बात यह है कि भारत के पड़ोसी देशों जैसे पाकिस्तान, चीन और नेपाल में वैश्विक तेल कीमतों में नरमी का असर उपभोक्ताओं तक पहुंचा है और वहां ईंधन की कीमतों में कटौती देखने को मिली है. हालांकि, भारत में पेट्रोल-डीजल के दाम लंबे समय से लगभग स्थिर बने हुए हैं. इस बीच रेटिंग एजेंसी CRISIL की एक हालिया रिपोर्ट ने नई चिंता बढ़ा दी है. रिपोर्ट के अनुसार, यदि वैश्विक बाजार में तेल की कीमतों और आयात लागत पर दबाव बढ़ता है, तो भारत में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में करीब 2.5 रुपये प्रति लीटर या उससे अधिक की बढ़ोतरी हो सकती है. विशेषज्ञों का मानना है कि भारत में ईंधन की कीमतें केवल कच्चे तेल के दाम पर निर्भर नहीं करतीं. इसमें केंद्र और राज्य सरकारों द्वारा लगाए जाने वाले टैक्स, एक्साइज ड्यूटी, वैट, रिफाइनिंग लागत, परिवहन खर्च और ऑयल मार्केटिंग कंपनियों की रणनीति भी अहम भूमिका निभाती है. यही वजह है कि वैश्विक बाजार में तेल सस्ता होने के बावजूद भारतीय उपभोक्ताओं को तुरंत राहत नहीं मिलती. दूसरी ओर, यदि अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियों के कारण कच्चे तेल की कीमतों में फिर उछाल आता है, तो घरेलू बाजार में ईंधन महंगा होने की संभावना बढ़ सकती है. आने वाले महीनों में सरकार की कर नीति, वैश्विक तेल बाजार की स्थिति और भू-राजनीतिक घटनाक्रम यह तय करेंगे कि भारतीय उपभोक्ताओं को राहत मिलेगी या पेट्रोल-डीजल के लिए अधिक कीमत चुकानी पड़ेगी.