सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे गीत “कहो नरेंद्र, मज़ा आ रहा?” ने देश की जमीनी हकीकत पर तीखा सवाल खड़ा कर दिया है. यह गाना सिर्फ एक धुन नहीं, बल्कि आम आदमी के दर्द, गुस्से और तंज़ का आईना है.