‘योगी जी के खिलाफ था, इसलिए चुनाव छोड़ भाग गया’, बाबा के खिलाफ जंग पर मनोज तिवारी का तंज
बीजेपी सांसद मनोज तिवारी ने स्टेट मिरर के एक पॉडकास्ट में खुलासा किया कि योगी आदित्यनाथ के खिलाफ चुनाव लड़ने का फैसला उनका नहीं था. उन्होंने इसे जिंदगी की सबसे बड़ी राजनीतिक गलती बताया. योगी आदित्यनाथ के खिलाफ चुनाव लड़ने पर मनोज तिवारी ने कहा कि यह मेरी सबसे बड़ी गलती थी. जानिए बाबा के खिलाफ जंग पर क्या बोले दिल्ली के सांसद.
भोजपुरी स्टार से सांसद बने मनोज तिवारी के में राजनीति करने के ख्याल था, पर कब चुनावी राजनीति में एंट्री होगी, इसके बारे में उन्होंने कभी सोचा नहीं. सपा के एक कद्दावर नेता, जिनसे उनका आत्मीय रिश्ता था, ने अचानक मैदान उतार दिया. गोरखपुर से उनके चुनाव लड़ने का एलान भी हो गया, लेकिन जब उन्हें पता चला कि वो अब योगी आदित्यनाथ के खिलाफ मैदान में है तो वह मैदान छोड़कर भाग गए. स्टेट मिरर के पॉडकास्ट में उन्होंने कहा कि जब उन्हें पता चला कि मुकाबला योगी जी से है, तो वे चुनाव छोड़कर निकल जाना चाहते थे, यूं कहें कि मैदान से हटने का मन बना लियसा था, लेकिन, हालात ऐसे बने कि उन्हें चुनावी मैदान में उतरना पड़ा.
योगी आदित्यनाथ के खिलाफ चुनाव पर क्या बोले मनोज तिवारी?
मनोज तिवारी ने कहा, “मुझे तो यह पता ही नहीं था कि योगी जी के खिलाफ चुनाव लड़ना है. जब जानकारी मिली, तो मैं हैरान रह गया और चुनाव छोड़कर निकल भी गया था.”
‘सिचुएशन ऐसी थी कि मना नहीं कर पाया’
उन्होंने बताया कि पूरा चुनावी दौर महज तीन महीने का था और उस समय परिस्थितियां ऐसी थीं कि वे साफ मना नहीं कर पाए. मनोज तिवारी के मुताबिक, यह फैसला पूरी तरह परिस्थितिजन्य था, न कि उनकी अपनी इच्छा.
अमर सिंह की भूमिका का खुलासा
मनोज तिवारी ने यह भी बताया कि इस फैसले के पीछे अमर सिंह की अहम भूमिका थी. उन्होंने कहा कि अमर सिंह उनके बड़े भाई जैसे थे और उनके आग्रह को वे टाल नहीं सके. हमारे लिए डिफिकल्ट सिचुएशन था. सपा के जिला जिला अध्यक्ष रोज कहा करते थे भैया यहां से चुनाव लड़कर तुम फंस गए.
‘100% गलत फैसला था, जिंदगी भर मलाल रहेगा’
दिल्ली से बीजेपी सांसद मनोज तिवारी ने साफ शब्दों में स्वीकार किया कि गोरखपुर से चुनाव लड़ने का फैसला 100 प्रतिशत गलत था और इसका मलाल उन्हें हमेशा रहेगा.
योगी आदित्यनाथ के लिए सम्मान
उन्होंने यह भी कहा कि चुनाव के दौरान उन्होंने कभी योगी आदित्यनाथ के खिलाफ कुछ नहीं कहा. “मैं तो मन से उन्हें प्रणाम करता था. योगी जी जैसे नेता अगर हार जाते, तो देश का नुकसान होता.”
राजनीति में ‘यूज’ होने का अहसास
मनोज तिवारी ने माना कि उस चुनाव में वे राजनीतिक रूप से ‘यूज’ हो गए थे. उन्होंने कहा कि जातीय समीकरण और रणनीति का खेल कुछ और ही था, जिसे बाद में उन्होंने समझा.
हार नहीं, सीख मानते हैं उस चुनाव को
मनोज तिवारी के मुताबिक, योगी आदित्यनाथ से हार को वे हार नहीं, बल्कि सीख मानते हैं. यही अनुभव उन्हें आगे बढ़ने और बीजेपी ज्वाइन करने का आधार बना.
BJP ज्वाइन करने का फैसला क्यों लिया?
मनोज तिवारी ने कहा कि 2009 के चुनाव के बाद उन्हें एहसास हुआ कि राजनीति पार्ट-टाइम नहीं, बल्कि फुल-टाइम कमिटमेंट मांगती है. यही वजह रही कि बाद में उन्होंने बीजेपी ज्वाइन की. बता दें कि योगी आदित्यनाथ के खिलाफ चुनाव लड़ना मनोज तिवारी के राजनीतिक जीवन का सबसे विवादित फैसला रहा. आज वह इसे अपनी गलती मानते हैं और इसे सीख के रूप में देखते हैं. एक ऐसा अनुभव जिसने उन्हें आगे की राजनीति के लिए तैयार किया.





