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LPG की किल्लत बढ़ी तो सबसे पहले मेनू से गायब होंगी ये चीजें, जानिए क्यों

अगर एलपीजी गैस की कमी बढ़ती है, तो इसका सीधा असर रेस्टोरेंट, ढाबों और हॉस्टलों के किचन पर पड़ सकता है. गैस कम होने की स्थिति में आपके मेन्यू से कई चीजें हट सकती हैं.

man making roti
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( Image Source:  AI SORA )
हेमा पंत
Edited By: हेमा पंत3 Mins Read

Updated on: 13 March 2026 4:14 PM IST

ईरान और इजरायल के बीच युद्ध चल रहा है. ऐसे में इसका असर भारत पर भी देखने को मिल सकता है. अगर यह स्थिति लंबे समय तक बनी रहती है और कुछ समुद्री रास्ते बंद हो सकते हैं, जहां से भारत को तेल और गैस सप्लाई की जाती है. अगर एलपीजी गैस की सप्लाई में किसी तरह की दिक्कत आती है, तो इसका असर सीधे रेस्टोरेंट, ढाबों और हॉस्टलों के किचन पर पड़ सकता है.

गैस कम होने की कंडीशन में आपके किचन से लेकर रेस्टोरेंट तक कई जगहों पर खाना बनाने का तरीका बदलना पड़ सकता है और मेन्यू में भी बदलाव देखने को मिल सकता है. ऐसे में सवाल उठता है कि अगर एलपीजी की किल्लत बढ़ती है, तो सबसे पहले मेन्यू से कौन-सी चीजें गायब हो सकती हैं.

क्या रोटी हो जाएगी थाली से गायब?

एलपीजी की कमी होने पर सबसे पहले असर रोटियों और चपातियों पर पड़ता है. हर रोटी को तवे पर अलग-अलग पकाना पड़ता है और कई बार उसे सीधे आग पर फुलाना भी होता है. अगर किसी रेस्टोरेंट या हॉस्टल में रोज सैकड़ों लोगों को खाना परोसा जाता है, तो रोटियां बनाने में बहुत ज्यादा गैस खर्च होती है.

डीप फ्राइड फूड

अगर आप भी पूरी, भटूरा, पकौड़े और वड़ा जैसे डीप फ्राइड फूड्स के शौकीन हैं, तो आपको झटका लग सकता है. गैस की किल्लत के चलते आप इन चीजों का स्वाद नहीं ले पाएंगे, क्योंकि इन्हें बनाने के लिए तेल को लंबे समय तक तेज आंच पर रखना पड़ता है. तेल को गर्म रखने के लिए लगातार गैस जलती रहती है, जिससे काफी गैस खर्च होता है.

कैसे साउथ इंडियन फूड पर खर्च होती है ज्यादा गैस?

ज्यादातर लोग साउथ इंडियन फूड के शौकीन होते हैं. डोसा से लेकर उत्तपम तक ये सारी खाने की चीजें टेस्ट के साथ-साथ बॉडी के लिए भी हेल्दी होती हैं, लेकिन क्योंकि देश में एलपीजी का संकट मंडरा रहा है, तो आपके मेन्यू से ये फूड्स गायब हो सकते हैं. इन डिशेज के लिए बड़े तवे को लगातार गर्म रखना पड़ता है. इसके अलावा डोसा धीरे-धीरे पकता है और उसे बनाने के लिए लगातार आंच चाहिए होती है.

राजमा, छोले और चने

राजमा, छोले और चने की सब्जियां भी काफी देर तक पकती हैं. कई बार इन्हें पहले भिगोना पड़ता है और फिर लंबे समय तक प्रेशर कुकर या धीमी आंच पर पकाया जाता है. इसी वजह से गैस की कमी होने पर कई हॉस्टल और कैंटीन इन डिशेज को भी मेनू से हटा देते हैं.

कैसे चाय और और कॉफी पर पड़ सकता है असर?

एलपीजी की कमी का असर सिर्फ खाने पर ही नहीं बल्कि ड्रिंक्स पर भी पड़ सकता है. चाय और कॉफी को बनाने के लिए पानी और दूध को अच्छे से उबालना पड़ता है, जिसके कारण ज्यादा गैस खर्च होती है.


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