जावेद अख्तर एक बार फिर अपने बेबाक अंदाज़ और तेज़ दिमाग की वजह से चर्चा में हैं. इस बार वजह कोई कविता या सियासी बयान नहीं, बल्कि भाषा पर दिया गया उनका मज़ेदार लेकिन गहरा भाषण है, जो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है. स्टेज पर जावेद अख्तर ने हंसी–मज़ाक के बीच ऐसा तर्क रखा कि श्रोता ठहाके लगाते रहे, लेकिन बात सीधी दिल और दिमाग तक पहुंच गई. उन्होंने बताया कि भाषा सिर्फ शब्दों का ढांचा नहीं होती, बल्कि सोच, तहज़ीब और इतिहास की वाहक होती है. उर्दू भाषा को लेकर भी उन्होंने बेहद सटीक और संतुलित बात कही, जो आज के दौर की बहसों पर सीधा प्रहार करती है. यही वजह है कि यह भाषण अब सिर्फ मनोरंजन नहीं, बल्कि भाषा और संस्कृति पर एक मजबूत संदेश बन गया है.