दिल्ली के मालवीय नगर में हुए भीषण अग्निकांड ने पूरे सिस्टम पर सवाल खड़े कर दिए हैं, जिसमें 21 लोगों की दर्दनाक मौत हो गई. पूर्व दिल्ली चीफ फायर ऑफिसर एस. के. डेहरी ने इस घटना पर गंभीर टिप्पणी करते हुए कहा कि ऐसी इमारतों में नियमों की खुली अनदेखी की जाती है. उनके मुताबिक गेस्ट हाउस और होटल निर्माण में कई बार नक्शे से ज्यादा कमरे बना लिए जाते हैं, बेसमेंट में भी अवैध रूप से किचन और अन्य गतिविधियां चलती हैं, जिससे हादसे का खतरा कई गुना बढ़ जाता है. उन्होंने यह भी बताया कि फायर डिपार्टमेंट अकेले इस तरह की घटनाओं के लिए जिम्मेदार नहीं है, बल्कि MCD, दिल्ली पुलिस और इलेक्ट्रिसिटी विभाग जैसे कई एजेंसियां भी इसमें शामिल होती हैं. जब तक नक्शा सही तरीके से पास नहीं होता और फायर एनओसी की प्रक्रिया पूरी नहीं होती, तब तक ऐसे निर्माण नहीं होने चाहिए. लेकिन लाल डोरा और एक्सटेंडेड एरिया के नाम पर नियमों को नजरअंदाज कर दिया जाता है, जिससे ऐसी दर्दनाक घटनाएं बार-बार सामने आती हैं.