आज की मौजूदा पीढ़ी नौकरी के छह महीने बाद ही सीधे बैंक और क्रेडिट कार्ड की ओर आंख मूंद कर दौड़ती है. ताकि आसानी से हर जरूरत की चीज ‘लोन’ पर लेकर जीवन को पटरी पर लाया जा सके. लोन की किश्त की चिंता पहले किसी को नहीं होती है. लेकिन अब इतना क्यों और ये कितना सही या कितना गलत है?