तृणमूल कांग्रेस में कथित बगावत और सांसदों के दूसरे खेमे में जाने की चर्चाओं के बीच शत्रुघ्न सिन्हा ने साफ कहा कि उनका किसी दूसरी दिशा में जाने का कोई इरादा नहीं है और वह ममता बनर्जी के साथ थे, हैं और रहेंगे. उन्होंने कहा कि पार्टी छोड़ने वाले नेताओं के अपने-अपने कारण हो सकते हैं, कोई लालच में, कोई डर या दबाव में, तो कोई एजेंसियों जैसे ईडी और सीबीआई के कारण ऐसा कर रहा हो सकता है. हालांकि उन्होंने कहा कि उन्हें ऐसे लोगों से कोई शिकायत नहीं है क्योंकि वे उनके साथी और सहयोगी रहे हैं. शत्रुघ्न सिन्हा ने कहा कि तृणमूल कांग्रेस में उनका नेता सिर्फ ममता बनर्जी हैं, कोई दूसरा नहीं. उन्होंने सवाल उठाया कि जो लोग आज शिकायतें कर रहे हैं, क्या उन्हें यह बातें पहले नहीं कहनी चाहिए थीं, जब वे लगातार ममता बनर्जी के साथ खड़े नजर आते थे. आरजी कर मेडिकल कॉलेज और संदेशखाली जैसे मामलों पर उन्होंने कहा कि ऐसी घटनाएं बेहद शर्मनाक और निंदनीय हैं, लेकिन किसी अपराध के लिए सीधे मुख्यमंत्री को जिम्मेदार ठहराना उचित नहीं है. उन्होंने उत्तराखंड, हाथरस और उन्नाव जैसे मामलों का उदाहरण देते हुए कहा कि हर अपराध के लिए मुख्यमंत्री को कटघरे में नहीं खड़ा किया जा सकता. बीजेपी में वापसी या एनडीए समर्थक गुट से जुड़ने के सवाल पर उन्होंने कहा कि बीजेपी में उनके कई पुराने दोस्त हैं और किसी ने उन्हें आमंत्रित भी किया होगा, लेकिन उनकी भलाई इसी में है कि वह उस नेता के साथ खड़े रहें जिन्होंने मुश्किल समय में उनका साथ दिया. उन्होंने कहा कि ममता बनर्जी ने उन्हें आसनसोल की जनता के बीच काम करने का मौका दिया और वह इसके लिए आभारी हैं. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 12 साल पूरे होने पर की गई तारीफ को लेकर उठे सवालों पर शत्रुघ्न सिन्हा ने कहा कि मोदी देश के प्रधानमंत्री हैं, उनके पुराने सहयोगी और मित्र भी रहे हैं, इसलिए उन्हें बधाई देना स्वाभाविक था. इसका तृणमूल कांग्रेस छोड़ने या किसी नए राजनीतिक खेमे से जुड़ने से कोई संबंध नहीं है. उन्होंने दोहराया कि उनकी विचारधारा और राजनीतिक प्रतिबद्धता फिलहाल ममता बनर्जी के साथ है.