5000 करोड़ रुपये के कथित नकली दवा रैकेट की जांच के बीच एक नया विवाद सामने आया है. सीबीआई की एफआईआर के अनुसार, दिल्ली पुलिस के एक इंस्पेक्टर और उनके एक सहयोगी पर मुख्य आरोपी से करोड़ों रुपये की रिश्वत मांगने का आरोप लगा है. दावा किया गया है कि बदले में सीबीआई केस में राहत दिलाने और जांच का मनचाहा परिणाम सुनिश्चित करने का भरोसा दिया गया. एफआईआर के मुताबिक, 1.5 करोड़ रुपये एडवांस देने की बात हुई थी, जिसमें हवाला के जरिए 1 करोड़ रुपये पहुंचाए गए और बाद में लाखों रुपये नकद भी बरामद किए गए. सीबीआई का यह भी आरोप है कि दिल्ली के एयरोसिटी में एक बैठक हुई थी, जहां कथित तौर पर प्रभाव का इस्तेमाल कर मामले में मदद का आश्वासन दिया गया. रिपोर्ट में कहा गया कि अगर ये आरोप सही साबित होते हैं तो यह केवल भ्रष्टाचार का मामला नहीं बल्कि जनता के भरोसे पर बड़ा हमला होगा, क्योंकि एक तरफ नकली दवाओं से लोगों की सेहत से खिलवाड़ का आरोप है और दूसरी तरफ उसी मामले की जांच को प्रभावित करने की कथित कोशिश. हालांकि आरोपी पक्ष ने अदालत में सभी आरोपों को खारिज करते हुए खुद को निर्दोष बताया है और कहा है कि उन्हें झूठा फंसाया जा रहा है. अब इस पूरे मामले में सच क्या है, इसका फैसला जांच और अदालत की प्रक्रिया के बाद ही सामने आएगा. रिपोर्ट में यह भी कहा गया कि दोषी चाहे कितना भी प्रभावशाली क्यों न हो, उसके खिलाफ कानून के मुताबिक कार्रवाई होनी चाहिए और यदि किसी पर गलत आरोप लगाए गए हैं तो उसे भी न्याय मिलना चाहिए.