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1 अप्रैल से महंगाई का डबल झटका! उत्तराखंड में पानी महंगा, बिजली बिल पर भी बढ़ेगा बोझ?

उत्तराखंड में 1 अप्रैल 2026 से पानी की दरों में बढ़ोतरी तय है, जिससे ग्रामीण और शहरी दोनों उपभोक्ताओं पर असर पड़ेगा. बिजली दरों में बड़ी बढ़ोतरी की संभावना कम है, लेकिन FPPCA के कारण बिल पर अतिरिक्त बोझ पड़ सकता है.

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( Image Source:  AI Sora )
रूपाली राय
Edited By: रूपाली राय4 Mins Read

Published on: 26 March 2026 10:39 AM

उत्तराखंड में एक अप्रैल 2026 से पानी और बिजली दोनों की दरें बढ़ने वाली हैं. हालांकि बिजली दरों में इस बार बहुत ज्यादा बढ़ोतरी की उम्मीद नहीं है, क्योंकि यह चुनावी साल है. हर साल 1 अप्रैल को उत्तराखंड में पानी के बिलों में बढ़ोतरी कर दी जाती है. इस बार भी 1 अप्रैल 2026 से पानी के दाम बढ़ जाएंगे. घरेलू उपभोक्ताओं के लिए पानी की दरों में 9 प्रतिशत की बढ़ोतरी होगी. व्यावसायिक (दुकान, ऑफिस आदि) कनेक्शनों में 15 प्रतिशत की बढ़ोतरी होगी.

ग्रामीण क्षेत्रों में पहले पानी का बिल हर महीने 117 रुपये था. अब यह बढ़कर 121 रुपये प्रति महीना हो जाएगा यानी हर महीने 4 रुपये का इजाफा होगा. शहरी क्षेत्रों में पानी का बिल पहले 360 रुपये प्रति महीना था, जो अब बढ़कर 373 रुपये प्रति महीना हो जाएगा. यानी शहरों में हर महीने 13 रुपये ज्यादा देने पड़ेंगे. जल संस्थान शहरी इलाकों में पानी का बिल भवन (मकान) के कर मूल्य के आधार पर तय करता है, जबकि ग्रामीण क्षेत्रों में फिक्स्ड राशि ली जाती है. यह बढ़ोतरी 2013 के बेस रेट के हिसाब से हर साल की जाती है.

बिजली दरों में क्या होगा?

बिजली की नई दरें 31 मार्च 2026 को उत्तराखंड विद्युत नियामक आयोग (Electricity Regulatory Commission) द्वारा जारी की जाएंगी और ये 1 अप्रैल से लागू होंगी. चूंकि इस साल राज्य में चुनाव होने वाले हैं इसलिए बिजली दरों में बहुत बड़ी बढ़ोतरी की संभावना कम है. खासकर आम घरेलू उपभोक्ताओं को राहत देने की कोशिश की जा सकती है. अधिकारियों का कहना है कि पहले से ही हर महीने फ्यूल पावर परचेज कॉस्ट एडजस्टमेंट (FPPCA) के नाम पर बिजली बिल में अतिरिक्त राशि बढ़ रही है. ऐसे में सालाना बिजली दरों में भी ज्यादा बढ़ोतरी करने से उपभोक्ताओं पर दोहरा बोझ पड़ जाएगा. इसलिए घरेलू श्रेणी में इस बार दरें स्थिर रखी जा सकती हैं या बहुत कम बढ़ाई जा सकती हैं.

पिछले साल क्या हुआ था?

पिछले साल यानी 2025 में बिजली की दरों में कुल 5.62 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई थी. हालांकि बिजली कंपनी (यूपीसीएल) ने 12.01 प्रतिशत बढ़ोतरी का प्रस्ताव दिया था, लेकिन नियामक आयोग ने उसे कम करके 5.62 प्रतिशत ही मंजूर किया. उस समय:

  • घरेलू उपभोक्ताओं के लिए 33 पैसे प्रति यूनिट बढ़ी थी
  • व्यावसायिक उपभोक्ताओं के लिए 42 पैसे प्रति यूनिट
  • छोटे उद्योगों के लिए 36 पैसे प्रति यूनिट बढ़ोतरी हुई थी
  • अप्रैल में उपभोक्ताओं पर डबल झटका
  • अप्रैल महीने में बिजली उपभोक्ताओं को दो तरह का असर झेलना पड़ सकता है:
  • 31 मार्च को सालाना बिजली दरों की घोषणा
  • अप्रैल के पहले सप्ताह में फ्यूल पावर परचेज कॉस्ट एडजस्टमेंट (FPPCA) की नई दरें जारी होंगी
  • पिछले कई महीनों से FPPCA की दरें लगातार बढ़ रही हैं, इसलिए अप्रैल में बिजली बिल थोड़ा और महंगा हो सकता है

अधिकारियों ने क्या कहा?

विद्युत नियामक आयोग के अध्यक्ष एम.एल. प्रसाद ने कहा कि बिजली कंपनी और अन्य निगमों से आए प्रस्तावों का अच्छी तरह अध्ययन किया जा चुका है. जल्द ही नई बिजली दरें जारी कर दी जाएंगी, जो 1 अप्रैल से लागू होंगी. जल संस्थान के सीजीएम डी.के. सिंह ने बताया कि पानी के बिल में हर साल 1 अप्रैल से बढ़ोतरी होती है. घरेलू श्रेणी में 9% और व्यावसायिक श्रेणी में 15% की बढ़ोतरी तय है. यह बढ़ोतरी समय पर लागू कर दी जाएगी.

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