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'हिंदू ही हिंदू का सबसे बड़ा दुश्मन', अंतिम संस्कार के बाद फेंके गए रजाई-गद्दे उठाकर बेचने वाले गिरोह का पर्दाफाश; सोशल पर भड़के यूजर्स

देहरादून जिले से एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जहां धार्मिक परंपराओं से जुड़े सामान के कथित दुरुपयोग ने स्थानीय लोगों में भारी आक्रोश पैदा कर दिया. रानी पोखरी क्षेत्र में मृत परिजनों के अंतिम संस्कार के बाद फेंके गए रजाई-गद्दों को उठाकर दोबारा बेचने के आरोप में पुलिस ने तीन लोगों को गिरफ्तार किया है.

हिंदू ही हिंदू का सबसे बड़ा दुश्मन, अंतिम संस्कार के बाद फेंके गए रजाई-गद्दे उठाकर बेचने वाले गिरोह का पर्दाफाश; सोशल पर भड़के यूजर्स
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( Image Source:  X/ @ocjain4 @KumaonJagran )
विशाल पुंडीर
Edited By: विशाल पुंडीर

Updated on: 7 Jan 2026 1:58 PM IST

Dehradun: उत्तराखंड के देहरादून जिले से एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जहां धार्मिक परंपराओं से जुड़े सामान के कथित दुरुपयोग ने स्थानीय लोगों में भारी आक्रोश पैदा कर दिया. रानी पोखरी क्षेत्र में मृत परिजनों के अंतिम संस्कार के बाद फेंके गए रजाई-गद्दों को उठाकर दोबारा बेचने के आरोप में पुलिस ने तीन लोगों को गिरफ्तार किया है.

पुलिस के अनुसार, इस मामले को लेकर स्थानीय निवासियों ने शिकायत दर्ज कराई थी. लोगों का कहना था कि उनके क्षेत्र की एक दुकान पर ऐसे रजाई-गद्दे बेचे जा रहे हैं, जिन्हें मृतकों के परिजन धार्मिक मान्यताओं के तहत त्याग देते हैं. इससे न केवल सामाजिक मर्यादाओं का उल्लंघन हुआ, बल्कि लोगों की धार्मिक भावनाएं भी आहत हुईं.

स्थानीय लोगों की शिकायत के बाद खुलासा

पुलिस ने बताया कि रानी पोखरी क्षेत्र के निवासियों ने शिकायत की थी कि एक दुकान पर संदिग्ध तरीके से इस्तेमाल किए गए रजाई-गद्दों की बिक्री हो रही है. शिकायत में कहा गया कि ये वही रजाई-गद्दे हैं, जिन्हें अंतिम संस्कार के बाद मृतकों के परिजन फेंक देते हैं. शिकायत की गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने तुरंत जांच शुरू की, जिसमें आरोप सही पाए गए.

3 आरोपियों की गिरफ्तारी

शुरुआती जांच के बाद पुलिस ने दुकान संचालक सलमान, उसके पिता हामिद अली और संजय को गिरफ्तार किया गया. सलमान और हामिद अमरोहा के रहने वाले हैं. जबकि संजय ऋषिकेश का रहने वाला है. तीनों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर लिया गया है.

कहां से लाए जाते थे रजाई-गद्दे?

पुलिस के अनुसार, ऋषिकेश स्थित पूर्णानंद घाट पर अंतिम संस्कार के बाद लोग अपने परिजनों के रजाई-गद्दे रास्ते में सात मोड़ नामक स्थान पर एक पीपल के पेड़ के नीचे छोड़ देते हैं. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इन्हें दोबारा उपयोग में नहीं लाया जाता. आरोप है कि आरोपी इन रजाई-गद्दों को वहां से उठाकर साफ-सफाई के बाद अन्य लोगों को बेच देते थे.

वीडियो वायरल होने पर भड़के लोग

सोशल मीडिया पर वीडियो वायरल होने के बाद यूजर्स तरह-तरह की कमेंट कर रहे हैं. एक यूजर ने कमेंट करके लिखा 'सस्ता पाने की लालच ने धार्मिक और नैतिक भावनाओं को तार-तार कर दिया. धोखाधड़ी और धर्म का अपमान दोनों सामने हैं. सावधानी और विवेक से ही खरीदी करनी चाहिए, चाहे दाम कितना भी आकर्षक क्यों न हो.'

दूसरे यूजर ने लिखा 'यही तो विडम्बना है, जहां सस्ता माल मिला वहीं मुंह मार लिया बिना सोचे समझे.' तीसरे यूजर ने लिखा 'यह तो बहुत ही अच्छी जानकारी दी है आपने अब तो हम दुकान पर हिंदू तभी लेंगे जब हिंदू विक्रेता होगा नहीं तो पूरा बहिष्कार करेंगे हर जगह कुछ ना कुछ गड़बड़ होती है.'

उत्तराखंड न्‍यूज
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