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कौन हैं वैशाली जोगी? थाईलैंड में लहराया भारत का परचम, मिस यूनिवर्स बॉडी बिल्डिंग चैंपियनशिप में जीते 2 गोल्ड मेडल- SUCCESS STORY
नोएडा की वैशाली जोगी ने आर्थिक तंगी, समाज के ताने और तमाम मुश्किलों को पीछे छोड़ते हुए थाईलैंड में आयोजित Miss Universe Bodybuilding Championship 2026 में भारत के लिए दो गोल्ड मेडल जीते. कभी मंदिर के प्रसाद से अपनी डाइट पूरी करने वाली वैशाली अब ओलंपिक में भारत का तिरंगा लहराने का सपना देख रही हैं.
वैशाली जोगी
कहते हैं कि अगर हौसले बुलंद हों तो मंजिलें खुद रास्ता बना लेती हैं. इस कहावत को सच कर दिखाया है नोएडा के चौड़ा रघुनाथपुर गांव की रहने वाली वैशाली जोगी ने... आर्थिक तंगी, समाज के ताने और परिवार की शुरुआती नाराजगी के बावजूद वैशाली ने हार नहीं मानी और अंतरराष्ट्रीय मंच पर भारत का नाम रोशन कर दिया.
वैशाली ने 12 से 14 जून 2026 के बीच आयोजित Miss Universe Bodybuilding Championship में भारत का प्रतिनिधित्व करते हुए दो अलग-अलग कैटेगरी में दो स्वर्ण पदक अपने नाम किए. इस प्रतियोगिता में पाकिस्तान, नेपाल, अमेरिका सहित 21 देशों के खिलाड़ियों ने हिस्सा लिया था.
कौन हैं वैशाली जोगी?
- वैशाली जोगी नोएडा की रहने वाली हैं. वह एक साधारण परिवार से आती हैं. घर की आर्थिक स्थिति ठीक नहीं होने के कारण उन्हें पढ़ाई बीच में ही छोड़नी पड़ी. इसके बावजूद उन्होंने बॉडीबिल्डिंग और वेटलिफ्टिंग के क्षेत्र में अपना करियर बनाने का फैसला किया.
- वैशाली पिछले चार साल से लगातार कड़ी मेहनत कर रही हैं और कई राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय उपलब्धियां हासिल कर चुकी हैं.
- स्टेट मिरर से बातचीत में वैशाली ने बताया कि शुरुआत में उनके परिवार, रिश्तेदारों और समाज ने उनके फैसले का विरोध किया. लोगों का कहना था कि बॉडीबिल्डिंग करने से उनकी बॉडी और आवाज लड़कों जैसी हो जाएगी और शादी में भी दिक्कत आएगी. हालांकि उनकी मां और भाई ने शुरुआत से उनका साथ दिया. बाद में जब परिवार ने उनकी उपलब्धियां देखीं तो सभी ने उनका समर्थन करना शुरू कर दिया.
- वैशाली ने बताया कि बॉडीबिल्डिंग में सही डाइट बेहद जरूरी होती है, लेकिन आर्थिक तंगी के कारण वह महंगी डाइट नहीं ले पाती थीं. कई दिनों तक वह सुबह मंदिर जाकर सफाई करती थीं और प्रसाद में मिलने वाले फलों को ही अपनी डाइट बनाकर खाती थीं.
- गोल्ड विनर वैशाली ने बताया कि दो साल पहले भी उनका चयन एक अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिता के लिए हुआ था, लेकिन पैसों की कमी के कारण वह हिस्सा नहीं ले सकीं. इस बार उनके पिता ने उधार लेकर फ्लाइट टिकट और प्रतियोगिता के दौरान रहने-खाने का खर्च जुटाया, जिसके बाद वह थाईलैंड जाकर भारत का प्रतिनिधित्व कर सकीं.
- वैशाली ने कहा कि दो स्वर्ण पदक जीतने के बाद उन्हें उम्मीद थी कि देश और समाज उनका सम्मान करेगा, लेकिन ऐसा नहीं हुआ. उन्होंने कहा, जब मैं थाईलैंड से वापस लौट रही थी तो लगा था कि लोग मेरी उपलब्धि पर गर्व करेंगे, लेकिन यहां आने के बाद किसी ने हाल तक नहीं पूछा.
- वैशाली ने कहा कि खिलाड़ियों को वह सम्मान नहीं मिलता जिसके वे हकदार हैं. उन्होंने सरकार से खिलाड़ियों को बेहतर सहयोग और सम्मान देने की भी अपील की.
- वैशाली का अगला लक्ष्य ओलंपिक में वेटलिफ्टिंग में भारत का प्रतिनिधित्व करना है। उनका कहना है कि वह अपने परिवार, गांव और देश का नाम पूरी दुनिया में रोशन करना चाहती हैं.
- वैशाली के पिता सुभाष जोगी एक छोटी दूध डेयरी चलाते हैं, जबकि उनकी मां उर्मिला गृहिणी हैं.
- स्टेट मिरर से बातचीत के दौरान वैशाली के माता-पिता बेटी की सफलता पर भावुक हो गए. आंखों में आंसू के साथ उन्होंने कहा कि उन्हें वैशाली पर गर्व है और वे चाहते हैं कि उनकी बेटी आगे भी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत का प्रतिनिधित्व कर देश का मान बढ़ाती रहे.




