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UPSC Controversy: रोल नंबर तक नहीं देखा सिर्फ नाम पढ़ा और परिवार मनाने लगा जश्न, UPSC Result पर अब खुली पोल तो उतरा शिखा का चेहरा

यूपीएससी सिविल सेवा परीक्षा 2025 में 113वीं रैंक को लेकर उत्तर प्रदेश के बुलंदशहर से बड़ा विवाद सामने आया है. यहां की एक युवती ने इस रैंक का दावा किया था, लेकिन प्रशासनिक जांच में यह दावा गलत निकला. बाद में पता चला कि असली 113वीं रैंक दिल्ली की रहने वाली दूसरी शिखा की है.

UPSC Controversy: रोल नंबर तक नहीं देखा सिर्फ नाम पढ़ा और परिवार मनाने लगा जश्न, UPSC Result पर अब खुली पोल तो उतरा शिखा का चेहरा
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( Image Source:  X- @SachinGuptaUP )
समी सिद्दीकी
Edited By: समी सिद्दीकी5 Mins Read

Updated on: 12 March 2026 9:30 AM IST

UPSC Shikha Controversy: यूपीएससी परीक्षा को देश की सबसे कठिन और प्रतिष्ठित परीक्षाओं में माना जाता है. हर साल लाखों युवा इस परीक्षा को पास कर आईएएस, आईपीएस जैसे पदों पर पहुंचने का सपना देखते हैं. लेकिन कभी-कभी इस परीक्षा से जुड़े झूठे दावे भी सामने आ जाते हैं, जो बाद में विवाद का कारण बन जाते हैं.

हाल ही में उत्तर प्रदेश के बुलंदशहर से ऐसा ही एक मामला सामने आया, जहां एक युवती ने यूपीएससी सिविल सेवा परीक्षा 2025 में 113वीं रैंक हासिल करने का दावा किया. बाद में प्रशासनिक जांच में यह दावा गलत पाया गया. इससे पहले बिहार में भी इसी तरह का मामला सामने आ चुका है.

क्या है पूरा मामला?

रिपोर्ट के अनुसार बुलंदशहर की रहने वाली शिखा गौतम ने यूपीएससी सिविल सेवा परीक्षा 2025 का परिणाम घोषित होने के बाद दावा किया कि उन्हें 113वीं रैंक मिली है. यह खबर तेजी से फैल गई और स्थानीय स्तर पर उनकी सफलता की खूब चर्चा होने लगी. कई जगहों पर उन्हें बधाई दी जाने लगी और उनकी कहानी लोगों के बीच प्रेरणा के रूप में साझा की जाने लगी.

हालांकि कुछ समय बाद दिल्ली की रहने वाली एक अन्य शिखा सामने आईं और उन्होंने कहा कि यूपीएससी परीक्षा में 113वीं रैंक उनकी है. इसके बाद यह मामला प्रशासन तक पहुंचा और पूरे मामले की जांच शुरू कराई गई.

दिल्ली की शिखा ने क्या एक्शन लिया?

दिल्ली की शिखा ने इस मामले में यूपीएससी को ईमेल भेजकर स्पष्टीकरण जारी करने की मांग की थी. इसके बाद आयोग ने बुलंदशहर की जिलाधिकारी श्रुति को मामले की जांच कराने के निर्देश दिए. जिलाधिकारी ने यह जिम्मेदारी एडीएम प्रशासन को सौंपी. इसके बाद सदर तहसीलदार मनोज रावत को शिखा गौतम के घर भेजकर मामले की जांच कराई गई.

जांच में क्या आया सामने?

प्रशासनिक सूत्रों के अनुसार जांच के दौरान शिखा गौतम का परिवार अपने दावे के समर्थन में कोई ठोस प्रमाण नहीं दे सका. स्थानीय मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक तहसीलदार की जांच में यह भी सामने आया कि शिखा गौतम यूपीएससी की मेंस परीक्षा ही पास नहीं कर पाई थीं. इस कारण उनका इंटरव्यू के लिए चयन भी नहीं हुआ था.

जांच के दौरान यह भी पता चला कि उनके दस्तावेजों में नाम शिखा गौतम नहीं बल्कि शिखा रानी लिखा हुआ है. बाद में परिजनों ने प्रशासन के सामने खेद व्यक्त किया और दिल्ली की शिखा की रैंक को सही बताया.

बताया जा रहा है कि दिल्ली की रहने वाली शिखा का ही यूपीएससी सिविल सेवा परीक्षा 2025 में 113वीं रैंक पर चयन हुआ है. सोशल मीडिया पर भी उनके चयन से जुड़े कई प्रमाण सामने आए हैं. रिपोर्ट्स के अनुसार दिल्ली की शिखा वर्तमान में हरियाणा में ब्लॉक विकास एवं पंचायत अधिकारी (BDPO) के पद पर कार्यरत हैं.

बुलंदशहर की शिखा के परिवार ने क्या कहा?

बुलंदशहर की शिखा के परिजनों ने उनसे फोन पर संपर्क कर अपनी गलती के लिए माफी भी मांगी है. बुलंदशहर की शिखा को शुरुआत में इसलिए भी ज्यादा सुर्खियां मिली थीं क्योंकि उन्हें एक चौथी श्रेणी कर्मचारी की बेटी बताया गया था. कई मीडिया रिपोर्ट्स में ‘चपरासी की बेटी बनी आईएएस’ जैसे शीर्षकों के साथ उनकी कहानी प्रकाशित की गई.

जब वह बुलंदशहर पहुंचीं तो उनका स्वागत ढोल-नगाड़ों के साथ किया गया. लोगों ने उन्हें फूल-मालाएं पहनाकर सम्मानित किया और कई जगहों पर उनके इंटरव्यू भी लिए गए. उनकी सफलता की खबर सुनकर उनके दादा भावुक हो गए थे और रो पड़े थे. उनके रोने की तस्वीरें और वीडियो सोशल मीडिया पर काफी वायरल हुए थे.

इससे पहले बिहार में भी ऐसा ही एक मामला सामने आ चुका है. वहां आकांक्षा सिंह नाम की एक युवती ने यूपीएससी परीक्षा में 301वीं रैंक हासिल करने का दावा किया था. हालांकि बाद में आयोग ने स्पष्ट किया कि 301वीं रैंक उत्तर प्रदेश के गाजीपुर की आकांक्षा सिंह की है. इसके बाद बिहार की आकांक्षा सिंह का दावा गलत साबित हो गया था.

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