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UPSC 2025 Result के बाद क्यों चर्चा में आईं आस्था जैन? IPS बनने के बाद किया बड़ा हेरफेर, मार्कशीट बनी सबूत

UPSC सिविल सेवा परीक्षा 2025 में AIR-9 हासिल करने वाली आस्था जैन पर EWS कैटेगरी के इस्तेमाल को लेकर सोशल मीडिया में सवाल उठ रहे हैं. हालांकि UPSC या सरकार की तरफ से अभी तक इस मामले पर कोई आधिकारिक बयान या जांच की पुष्टि नहीं हुई है.

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( Image Source:  X: @Shubhamshuklamp )
रूपाली राय
Edited By: रूपाली राय4 Mins Read

Published on: 12 March 2026 9:01 AM

यूपीएससी सिविल सेवा परीक्षा 2025 के फाइनल रिजल्ट के बाद एक नया विवाद सुर्खियों में आ गया है. यह विवाद उत्तर प्रदेश के शामली जिले की रहने वाली आस्था जैन (Aastha Jain) से जुड़ा हुआ है, जिन्होंने इस बार ऑल इंडिया रैंक 9 हासिल की है. सोशल मीडिया पर कई लोग और इन्फ्लूएंसर्स उन पर गंभीर आरोप लगा रहे हैं कि उन्होंने EWS (Economically Weaker Section) कैटेगरी का गलत इस्तेमाल करके यह रैंक हासिल की है. हालांकि, अभी तक इन आरोपों की कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है और UPSC की तरफ से कोई स्पष्टीकरण भी जारी नहीं किया गया है.

विवाद की असली वजह क्या है?

बड़ी समस्या यह है कि आस्था जैन ने पहले UPSC परीक्षा में जनरल (सामान्य) कैटेगरी से सिलेक्टेड होकर IPS (Indian Police Service) बन चुकी हैं, लेकिन इस बार उन्होंने EWS कैटेगरी का इस्तेमाल किया और बहुत ऊंची रैंक लाकर IAS बनने की राह पर हैं.

  • 2023 में: उन्होंने EWS कैटेगरी से रैंक 131 हासिल की और IPS चुनी.
  • 2024 में: जनरल कैटेगरी से परीक्षा दी, 969 मार्क्स के साथ रैंक 186 आई और IPS के लिए सिलेक्शन हुआ. वे वर्तमान में हैदराबाद में IPS ट्रेनिंग ले रही हैं.
  • 2025 में: फिर EWS कैटेगरी से परीक्षा दी, 1033 मार्क्स के साथ रैंक 9 हासिल की. इससे उन्हें IAS सर्विस मिलना लगभग तय है.
  • सोशल मीडिया पर लोग सवाल उठा रहे हैं
  • अगर वे जनरल कैटेगरी से IPS बन गईं और ट्रेनिंग भी शुरू कर दी, तो उनकी आर्थिक स्थिति इतनी कमजोर कैसे हो गई कि वे EWS के दायरे में आ गईं?.
  • IPS अधिकारी बनने के बाद सैलरी और अन्य सुविधाएं मिलती हैं, फिर EWS सर्टिफिकेट कैसे जारी हुआ? क्या परिवार की सालाना आय 8 लाख रुपये से कम है, जैसा EWS नियम में जरूरी है?
  • क्या यह EWS कोटे का दुरुपयोग है, जिससे असली जरूरतमंद गरीब उम्मीदवारों का हक प्रभावित होता है?

क्या यह फ्रॉड है?

कई लोग इसे 'सिस्टम का खेल' या 'फ्रॉड' बता रहे हैं और जांच की मांग कर रहे हैं. कुछ का कहना है कि EWS नियमों में ऐसी छूट है कि कैंडिडेट हर साल अलग-अलग कैटेगरी चुन सकते हैं, अगर सर्टिफिकेट वैलिड हो। लेकिन नैतिक रूप से यह सही नहीं लगता, क्योंकि EWS का मकसद आर्थिक रूप से कमजोर लोगों को मदद देना है, न कि पहले से सेलेक्टेड अधिकारियों को ऊंची सर्विस दिलाने का जरिया बनाना.

आस्था जैन कौन हैं?

आस्था जैन उत्तर प्रदेश के शामली जिले के कंधला इलाके की रहने वाली हैं. वे एक बहुत साधारण परिवार से आती हैं. उनके पिता अजय कुमार जैन एक छोटी सी किराना (परचून) की दुकान चलाते हैं. परिवार की आर्थिक स्थिति सामान्य से नीचे बताई जाती है. आस्था ने दिल्ली यूनिवर्सिटी से पढ़ाई की है और उन्होंने इंटरमीडिएट में भी बहुत अच्छे नंबर (496/500) लाए थे. उनकी मेहनत और लगन की वजह से उन्होंने तीनों अटेम्प्ट में UPSC क्लियर किया है. पहले अटेम्प्ट में IPS, दूसरे में फिर IPS (लेकिन IAS के लिए फिर ट्राई किया), और तीसरे में टॉप रैंक के साथ IAS का रास्ता साफ. उनकी सफलता की कहानी प्रेरणादायक है, क्योंकि वे लगातार मेहनत करती रहीं और हार नहीं मानी.

अभी क्या स्थिति है?

सोशल मीडिया पर यह मामला बहुत वायरल हो रहा है, जहां लोग मीम्स, वीडियो और पोस्ट शेयर कर रहे हैं. कुछ लोग उनकी मेहनत की तारीफ कर रहे हैं, तो कुछ EWS नियमों पर सवाल उठा रहे हैं. UPSC या सरकार की तरफ से अभी कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है. अगर जांच हुई और कोई गड़बड़ी साबित हुई, तो कार्रवाई हो सकती है, वरना यह सिर्फ सोशल मीडिया का विवाद बनकर रह जाएगा.

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