UPSC Success Story: IIT से पढ़ाई, पहले अटैंप्ट में नाकामयाबी और अब बने अफसर, क्रिकेट स्टार वैभव सूर्यवंशी के मामा की सक्सेस स्टोरी
समस्तीपुर के मोहिउद्दीननगर के रहने वाले अभिषेक चौहान ने UPSC सिविल सेवा परीक्षा में सफलता हासिल कर अपने परिवार और जिले का नाम रोशन किया है. क्रिकेटर वैभव सूर्यवंशी के मामा अभिषेक की यह कहानी खास इसलिए है क्योंकि उन्होंने पहले प्रयास में असफल होने के बाद भी हार नहीं मानी और अपनी कमियों को समझते हुए बेहतर स्ट्रैटेजी के साथ अगला अटैंप्ट दिया और कामयाबी हासिल की.
UPSC Success Story: बिहार के समस्तीपुर जिले के मोहिउद्दीननगर प्रखंड के रहने वाले अभिषेक चौहान ने यूपीएससी एग्जाम में सफलता हासिल कर अपने परिवार और जिले का नाम रोशन किया है. उनकी सफलता की कहानी केवल परीक्षा पास करने की नहीं है, बल्कि असफलता से सीख लेकर लगातार मेहनत और दृढ़ संकल्प के साथ मंजिल तक पहुंचने की प्रेरक कहानी है.
अभिषेक चौहान उस परिवार से आते हैं जिसकी चर्चा अक्सर खेल के मैदान में शानदार प्रदर्शन करने वाले समस्तीपुर के चर्चित नाम वैभव सूर्यवंशी के कारण भी होती रहती है. हालांकि इस बार परिवार में चर्चा का केंद्र अभिषेक चौहान रहे, जिन्होंने पढ़ाई के क्षेत्र में अपनी अलग पहचान बनाई है. बता दें, अभिषेक चौहान रिश्त में वैभव सूर्यवंशी के मामला लगते हैं.
क्या है बिहार के अभिषेक चौहान की UPSC सक्सेस स्टोरी?
अभिषेक चौहान की प्रारंभिक शिक्षा पश्चिम बंगाल के पुरुलिया स्थित आरके मिशन से हुई, जहां से उन्होंने दसवीं का एग्जाम पास किया. इसके बाद उन्होंने हाजीपुर के गुरु वशिष्ठ स्कूल से इंटरमीडिएट की पढ़ाई पूरी की. हायर एजुकेशन के लिए उन्होंने भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (IIT) में एडमिशन लिया और वहां से जियोलॉजी विषय में इंटीग्रेटेड एमटेक की डिग्री हासिल की.
पढ़ाई के दौरान ही उनका झुकाव सिविल सेवा की ओर बढ़ने लगा और उन्होंने इस दिशा में तैयारी शुरू कर दी. मजबूत एजुकेशनल बैकग्राउंड और अनुशासित पढ़ाई की आदत ने उन्हें इस कठिन परीक्षा के लिए तैयार होने का आत्मविश्वास दिया.
अभिषेक ने बातचीत में बताया कि उनका पहला अटैंप्ट सफल नहीं रहा था और वे प्रीलिम्स भी पास नहीं कर सके थे. हालांकि उन्होंने इस असफलता को हार के रूप में नहीं लिया. उन्होंने अपनी तैयारी की रणनीति पर दोबारा काम किया और उसे पूरी तरह से बदलने का फैसला किया.
पहला अटैंप्ट में क्यों हुए नाकामयाब?
उनके मुताबिक, पहले प्रयास में उनकी तैयारी उतनी व्यवस्थित नहीं थी, जिसके कारण मन मुताबिक रिजल्ट नहीं मिला. इसके बाद उन्होंने तय किया कि अब तैयारी को पूरी तरह नए सिरे से और बेहतर तरीके से शुरू किया जाएगा. उन्होंने अपना लगभग पूरा समय पढ़ाई को समर्पित कर दिया. सोने के समय को छोड़कर बाकी समय वे पढ़ाई में ही लगाते रहे. उन्होंने हर सब्जेक्ट को सही स्ट्रैटिजी के साथ टाइम देना शुरू किया.
उन्होंने सबसे पहले अहम एग्जाम की तैयारी पर ध्यान केंद्रित किया और उसके बाद प्रीलिम्स की तैयारी की. अभिषेक बताते हैं कि नवंबर 2023 से उन्होंने लगाता और सीरियस तरीके से पढ़ाई शुरू कर दी थी. लगातार अनुशासन और समर्पण के साथ की गई तैयारी का परिणाम अंततः सफलता के रूप में सामने आया.
USPSC में परिवार ने कैसे किया सहयोग?
अभिषेक चौहान की सफलता के पीछे उनके परिवार का भी अहम योगदान रहा है. उनके पिता डॉ. अभय सिंह नालंदा खुला विश्वविद्यालय के रजिस्ट्रार हैं और लंबे समय से शिक्षा के क्षेत्र से जुड़े हुए हैं. उन्होंने हमेशा अपने बच्चों को पढ़ाई के लिए प्रेरित किया और घर में ऐसा वातावरण बनाया जहां शिक्षा को सबसे अधिक महत्व दिया जाता है.
अभिषेक ने बताया कि परिवार ने उन्हें हर स्तर पर सहयोग दिया और पढ़ाई के दौरान कभी भी किसी प्रकार की कमी महसूस नहीं होने दी. यही समर्थन और प्रोत्साहन उनकी तैयारी के दौरान सबसे बड़ी ताकत बना.
युवाओं के लिए कैसे प्रेरणा हैं अभिषेक
आज अभिषेक चौहान की सफलता उन हजारों युवाओं के लिए प्रेरणा बन गई है जो किसी असफलता के बाद निराश हो जाते हैं. उनकी कहानी यह बताती है कि यदि असफलता के बाद भी हिम्मत न हारी जाए और निरंतर मेहनत सही स्ट्रैटीजी के साथ जारी रखी जाए, तो सफलता हासिल करना संभव है.




