UPSC 2025: मदुरै की राजेश्वरी सुवे एम. बनीं AIR-2, इंजीनियरिंग से डिप्टी कलेक्टर और अब देश की टॉपर
दुरै की राजेश्वरी सुवे एम. ने UPSC सिविल सेवा परीक्षा 2025 में ऑल इंडिया रैंक 2 हासिल कर बड़ी उपलब्धि हासिल की है. इलेक्ट्रिकल इंजीनियर से डिप्टी कलेक्टर तक का उनका सफर लाखों युवाओं के लिए प्रेरणा बन गया है.
राजेश्वरी सुवे एम. मदुरै (तमिलनाडु) की रहने वाली एक प्रतिभाशाली युवा हैं. उन्होंने यूपीएससी सिविल सेवा परीक्षा 2025 में ऑल इंडिया रैंक 2 हासिल की है. यह बहुत बड़ी अचीवमेंट है, क्योंकि इस बार टॉप 5 रैंकों में वह एकमात्र महिला हैं. उनकी इस सफलता ने पूरे देश में खासकर तमिलनाडु में बहुत खुशी और प्रेरणा फैलाई है.
राजेश्वरी ने 2018 में चेन्नई की अन्ना यूनिवर्सिटी से इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग में डिग्री पूरी की थी. लेकिन इंजीनियरिंग के बाद उन्होंने सरकारी नौकरी की राह चुनी. इससे पहले उन्होंने तमिलनाडु पब्लिक सर्विस कमीशन (TNPSC) ग्रुप I परीक्षा में भी टॉप किया था और अभी वे डिप्टी कलेक्टर (ट्रेनी) के पद पर काम कर रही हैं यानी यह उनकी दूसरी बड़ी सफलता है पहले राज्य स्तर पर टॉपर बनीं, अब देश स्तर पर भी टॉप रैंक हासिल की.
राजेश्वरी का बैकग्राउंड
उन्होंने यूपीएससी परीक्षा में समाजशास्त्र को अपना ऑप्शनल सब्जेक्ट चुना था. उनकी मातृभाषा तमिल है और उन्होंने गृह कैडर के रूप में तमिलनाडु को प्राथमिकता दी है. राजेश्वरी एक सम्मानित और पढ़ाई-लिखाई वाले परिवार से आती हैं. उनकी मां एक सरकारी कॉलेज में एसोसिएट प्रोफेसर हैं, जो पढ़ाने का काम करती हैं. उनके पिता एक छोटी सी दुकान चलाते हैं, जहां दोपहिया वाहनों (जैसे बाइक और स्कूटर) के स्पेयर पार्ट्स बिकते हैं. साथ ही वे बीमा सलाहकार का भी काम करते हैं.
कैसा रहा इंटरव्यू?
परिवार का ऐसा माहौल मिला, जहां शिक्षा और मेहनत को बहुत महत्व दिया जाता था, जिसने राजेश्वरी को आगे बढ़ने में बहुत मदद की. एक विशेषज्ञ पैनल ने उनका मॉक इंटरव्यू लिया था, जो बहुत रोचक रहा. उसमें पैनल ने उनसे मदुरै के मंदिरों, स्थानीय मुद्दों, पर्यावरण, अर्थव्यवस्था, समाजशास्त्र, प्रशासन और कई राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय विषयों पर सवाल पूछे जैसे:
- मदुरै के मीनाक्षी अम्मन मंदिर के बारे में उन्होंने बताया कि यह बहुत पुराना मंदिर है और द्रविड़ शैली की वास्तुकला के लिए मशहूर है. इसका निर्माण पांड्य वंश के राजा सुंदर पांड्या ने करवाया था.
- तिरुपरनकुंड्रम पहाड़ी पर सुब्रमण्य स्वामी मंदिर में दीपक जलाने के विवाद पर उन्होंने कहा कि अदालत ने हिंदू समूहों को अनुमति दी है क्योंकि जगह मंदिर की है. पहले जिला मजिस्ट्रेट ने सांप्रदायिक तनाव के डर से रोका था.
- अगर वे जिला कलेक्टर होतीं और वहां हिंसा होती, तो वे पहले शांति वार्ता करातीं, नेताओं से बात करतीं, फिर जरूरत पड़ने पर पुलिस की मदद से स्थिति संभालतीं और कानून के अनुसार कार्रवाई करतीं.
- पर्यावरण के सवाल पर उन्होंने पंचामृत (भारत की COP26 प्रतिबद्धताएं) के बारे में अच्छे से बताया- जैसे 2070 तक नेट जीरो, नवीकरणीय ऊर्जा 500 GW तक, आदि.
- दक्षिणी राज्यों के वित्त आयोग और परिसीमन के मुद्दे पर उन्होंने संतुलित राय दी कि दक्षिण ने परिवार नियोजन अच्छा किया, लेकिन वितरण में अन्य फैक्टर भी देखे जाते हैं.
- हिंदी थोपने के विरोध पर कहा कि धीरे-धीरे संवाद और राष्ट्रीय एकता के जरिए स्वीकार्यता बढ़ सकती है.
- तमिलनाडु के विनिर्माण क्षेत्र की सफलता पर बताया कि SIPCOT जैसी नीतियां, अच्छी बिजली, कुशल मजदूर और इंजीनियरिंग कॉलेजों की वजह से राज्य मजबूत है.
कुछ सवालों पर उन्होंने ईमानदारी से कहा कि 'मुझे और पढ़ना होगा' या 'सटीक जानकारी नहीं है', जो उनकी सच्चाई दिखाती है. कुल मिलाकर, राजेश्वरी सुवे एम. की कहानी मेहनत, लगन और सही दिशा में काम करने की मिसाल है. इंजीनियरिंग से लेकर डिप्टी कलेक्टर और अब यूपीएससी में टॉप रैंक यह सब दिखाता है कि अगर इरादा मजबूत हो तो कोई भी लक्ष्य हासिल किया जा सकता है.




