UPITS 2026: संभल का हुनर, भदोही की कालीन, मुरादाबाद का पीतल और नोएडा की टेक्नोलॉजी, एक छत के नीचे UP की ताकत कैसे?
UPITS 2026 में संभल का हस्तशिल्प, भदोही की कालीन, मुरादाबाद का पीतल और नोएडा की टेक्नोलॉजी ने एक मंच पर UP की कारोबारी ताकत दिखाई.
UP International Trade Show 2026 में एक ही छत के नीचे कहीं सदियों पुराना हुनर है तो कहीं भविष्य की टेक्नोलॉजी. ग्रेटर नोएडा के India Expo Centre & Mart में यही बदलती तस्वीर नजर आ रही है. संभल के Horn-Bone से बने नायाब उत्पाद, भदोही की हाथ से बुनी कालीन, लखनऊ का दहाड़ता ब्रह्मोस और मुरादाबाद का चमकता पीतल, गाजियाबाद के टेक्सटाइल-गारमेंट और नोएडा की EV, इलेक्ट्रॉनिक्स व IT इंडस्ट्री, सब एक ही मंच पर हैं. यहां सवाल सिर्फ यह नहीं कि UP के जिलों में क्या बनता है, बल्कि यह भी है कि इन स्थानीय उत्पादों की दुनिया के बाजार में कितनी जगह बना सकती है.
यानी UPITS 2026 में तस्वीर सिर्फ 'क्या बनता है' की नहीं है, बल्कि यह भी दिख रहा है कि उत्तर प्रदेश के स्थानीय उत्पाद किस तरह खरीदार, कारोबारी नेटवर्क और संभावित निर्यात बाजार तक पहुंचने की कोशिश कर रहे हैं.
Credit: State Mirror
संभल की कलाकारी में ऐसा क्या जो विदेशी बाजार तक पहुंची?
संभल उत्तर प्रदेश के प्रमुख हस्तशिल्प केंद्रों में शामिल है. इसकी सबसे खास पहचान Horn and Bone Craft से जुड़ी है. यहां सींग और हड्डी से सजावटी और उपयोगी सामान बनाए जाते हैं. इनमें ज्वेलरी, बॉक्स, कटलरी हैंडल, सजावटी वस्तुएं और दूसरे क्राफ्ट उत्पाद शामिल हैं. इसके अलावा लकड़ी के हस्तशिल्प, रेजिन आर्ट, कांच और पीतल से जुड़े उत्पाद भी बाजार में मौजूद हैं.
UPITS में संभल की खासियत सिर्फ पुराने डिजाइन को दिखाना नहीं, बल्कि पारंपरिक कारीगरी को आधुनिक बाजार की पसंद के मुताबिक पेश करना भी है. यहां एक तरफ कारीगरों का हुनर दिखाई देता है तो दूसरी तरफ स्थानीय खाद्य पहचान भी सामने आती है.
संभल की पहचान सोनपापड़ी से भी जुड़ी है. One District One Cuisine के तहत स्थानीय खाद्य उत्पादों को भी बड़े बाजार और संभावित खरीदारों तक पहुंचाने की कोशिश की जा रही है. यानी संभल की कहानी सिर्फ हस्तशिल्प की नहीं, बल्कि क्राफ्ट और पारंपरिक स्वाद दोनों की है.
Credit: State Mirror
Credit: State Mirror
भदोही की कालीन में ऐसा क्या है जो अलग पहचान देती है?
भदोही का नाम आते ही सबसे पहले कालीन और हैंडमेड फ्लोर कवरिंग की पहचान सामने आती है. यहां हाथ से बनी कालीनों की बारीक बुनाई, आकर्षक डिजाइन, रंगों की विविधता और फिनिशिंग उन्हें अलग पहचान देती है. पारंपरिक पैटर्न के साथ बदलते बाजार की पसंद के हिसाब से आधुनिक डिजाइन वाली कालीन भी तैयार की जाती हैं.
भदोही का कालीन कारोबार लंबे समय से कारीगरी और निर्यात कारोबार के बीच एक महत्वपूर्ण कड़ी रहा है. यहां की कालीनों में हाथ से होने वाली बुनाई की बारीकी और कारीगरों का अनुभव सबसे बड़ी खासियत है.
UPITS में अंतरराष्ट्रीय खरीदारों की मौजूदगी स्थानीय कालीन कारोबारियों के लिए नए कारोबारी संपर्क बनाने का अवसर देती है. हालांकि कालीन कारोबारी असलम ने बताया कि इस बार कालीन की मांग में कमी आई है. यह बताता है कि वैश्विक बाजार में पहचान के बावजूद कारोबार के सामने मांग और प्रतिस्पर्धा जैसी चुनौतियां भी मौजूद हैं.
Credit: State Mirror
Credit: State Mirror
वस्त्र मंत्रालय के परिधान में लोगों की दिलचस्पी क्यों?
UPITS में टेक्सटाइल और apparel को भी प्रमुख जगह दी गई है. भारत सरकार के वस्त्र मंत्रालय की ओर से लगाए गए एग्जिबिट्स में हैंडलूम, टेक्सटाइल, हैंडीक्राफ्ट और परिधान से जुड़े उत्पाद लोगों की दिलचस्पी का केंद्र बने हुए हैं.
उत्तर प्रदेश की पारंपरिक बुनाई और हस्तकला के साथ तैयार परिधान तथा आधुनिक फैशन के उत्पाद भी यहां दिखाई दे रहे हैं. बनारसी टेक्सटाइल से लेकर अलग-अलग जिलों के हैंडलूम और गारमेंट उत्पादों तक, स्थानीय उत्पादन को बड़े बाजार से जोड़ने पर जोर दिखाई देता है.
इस हिस्से की खासियत यह है कि यहां सिर्फ कपड़ा या तैयार कपड़े नहीं दिखते, बल्कि पूरी वैल्यू चेन की झलक मिलती है. कहीं हैंडलूम है, कहीं पारंपरिक कढ़ाई, तो कहीं आधुनिक garment और lifestyle products.
मुरादाबाद का पीतल सजावट से ग्लोबल बाजार तक कैसे?
मुरादाबाद का Metalware और Brassware उत्तर प्रदेश के उन उत्पादों में शामिल है जिसकी अंतरराष्ट्रीय पहचान पहले से बनी हुई है. पीतल और दूसरी धातुओं से बने सजावटी सामान, घरेलू उपयोग की वस्तुएं और आधुनिक डिजाइन वाले उत्पाद यहां आकर्षण का केंद्र हैं.
मुरादाबाद की पहचान अब सिर्फ पारंपरिक पीतल के बर्तनों तक सीमित नहीं है. डिजाइन में बदलाव के साथ यहां के उत्पाद होम डेकोर, लाइफस्टाइल और गिफ्टिंग मार्केट से भी जुड़ रहे हैं. पीतल के अलावा एल्युमिनियम, आयरन और स्टेनलेस स्टील जैसे धातुओं से भी उत्पाद तैयार किए जाते हैं.
ट्रेड शो में मौजूद एक दुकानदार ने बताया कि दिवाली नजदीक होने की वजह से लोग पारंपरिक उत्पादों में खास रुचि दिखा रहे हैं. ऐसे में घरेलू मांग के साथ अंतरराष्ट्रीय खरीदारों तक पहुंच बनाना कारोबार के लिए महत्वपूर्ण है.
गाजियाबाद क्या लेकर पहुंचा और इसकी कहानी कैसे अलग?
गाजियाबाद की भागीदारी पारंपरिक और आधुनिक उत्पादों का मिश्रण है. जिले के कारोबारियों की ओर से परफ्यूम, कैंडल, अचार-चटनी, हैंडब्लॉक प्रिंट, टेक्सटाइल गारमेंट, होम फर्निशिंग, फैशन ज्वेलरी और आयुर्वेदिक-लाइफस्टाइल उत्पाद ट्रेड शो में प्रदर्शित किए गए हैं.
गाजियाबाद की औद्योगिक पहचान Engineering Products से भी जुड़ी है. ऐसे में यहां पारंपरिक consumer products के साथ manufacturing और engineering sector की मौजूदगी भी दिखाई देती है.
उद्यमी विधि अरोड़ा ने बताया कि उनका फोकस नए खरीदारों और विदेशों में बाजार तलाशने पर भी है. खासकर टेक्सटाइल, गारमेंट, हैंडलूम और मेटल क्राफ्ट जैसे सेक्टर को अंतरराष्ट्रीय कारोबारी संपर्क से जोड़ने का अवसर यहां मिल रहा है.
Credit: State Mirror
Credit: State Mirror
नोएडा की भूमिका सिर्फ मेजबानी तक क्यों नहीं?
इंडिया एक्सपो सेंटर एंड मार्ट में आयोजित यह शो उत्तर प्रदेश के पारंपरिक जिलों को नोएडा-ग्रेटर नोएडा के आधुनिक औद्योगिक और कारोबारी इकोसिस्टम के साथ जोड़ता है. नोएडा और गौतम बुद्ध नगर से जुड़े आधुनिक उद्योगों के साथ IT, स्टार्टअप, इलेक्ट्रॉनिक्स, EV, रियल एस्टेट, ट्रांसपोर्ट और दूसरे सेक्टर भी इस बड़े कारोबारी मंच का हिस्सा बने हैं.
दरअसल, यूपी ट्रेड शो की सबसे दिलचस्प तस्वीर यही है. एक तरफ संभल का सदियों पुराना हस्तशिल्प है, दूसरी तरफ भदोही की हाथ से बुनी कालीन. एक तरफ मुरादाबाद की Metal Craft है तो दूसरी तरफ नोएडा-ग्रेटर नोएडा का Electronics, EV, IT और Startup Ecosystem. यानी एक ही परिसर में उत्तर प्रदेश की पुरानी अर्थव्यवस्था और नई अर्थव्यवस्था दोनों दिखाई दे रही हैं.
इस लिहाज से UPITS को सिर्फ उत्पादों की प्रदर्शनी के तौर पर देखना पूरी तस्वीर नहीं होगी. यहां असली कहानी यह है कि किसी जिले की पहचान जब स्थानीय बाजार से निकलकर buyer, exporter, investor और global sourcing network के सामने पहुंचती है तो उसकी कारोबारी संभावनाओं के लिए नए रास्ते खुल सकते हैं.
Credit: State Mirror
Credit: State Mirror
UPITS 2026 क्या?
उत्तर प्रदेश के अलग-अलग जिलों की पहचान अब सिर्फ स्थानीय बाजार और पारंपरिक कारोबार तक सीमित नहीं दिख रही है. 25 से 29 सितंबर तक ग्रेटर नोएडा के इंडिया एक्सपो सेंटर एंड मार्ट में चल रहे UP International Trade Show 2026 में प्रदेश के पारंपरिक हुनर से लेकर आधुनिक उद्योग तक एक ही मंच पर दिखाई दे रहे हैं. आयोजन में 2,400 से ज्यादा प्रदर्शक, 600 से अधिक अंतरराष्ट्रीय खरीदार और करीब 90 देशों की कारोबारी भागीदारी बताई गई है. आयोजन में ODOP, हस्तशिल्प, टेक्सटाइल, हैंडलूम, फूड, इलेक्ट्रॉनिक्स, ऑटोमोबाइल, EV, स्टार्टअप और आधुनिक उद्योगों को एक ही मंच पर रखा गया है.




