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जिस रेप केस में सपा नेता मोईद खान के घर पर चला था योगी का बुलडोजर, कोर्ट ने किया बरी, अब कानून क्या कहता है?

अयोध्या के चर्चित भदरसा गैंगरेप केस में सपा नेता मोईद खान को अदालत ने डीएनए रिपोर्ट के आधार पर बरी कर दिया. अब सवाल उठ रहा है कि बुलडोजर कार्रवाई झेल चुके मोईद खान क्या मानहानि और मुआवजे का दावा कर सकते हैं या नहीं?

जिस रेप केस में सपा नेता मोईद खान के घर पर चला था योगी का बुलडोजर, कोर्ट ने किया बरी, अब कानून क्या कहता है?
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( Image Source:  I.P. Singh @IPSinghSp )
उत्तर प्रदेश में जिस रेप केस ने राजनीति से लेकर प्रशासन तक को झकझोर दिया था, उसी मामले में अब अदालत का फैसला कई नए सवाल खड़े कर रहा है. अयोध्या के भदरसा गैंगरेप केस में समाजवादी पार्टी से जुड़े नेता मोईद खान को कोर्ट ने सभी आरोपों से बरी कर दिया है. यह वही मामला है, जिसमें आरोपी बनाए जाने के बाद मोईद खान के घर और शॉपिंग कॉम्प्लेक्स पर योगी सरकार के बुलडोजर चले थे. अब जब अदालत ने राहत दे दी है, तो सबसे बड़ा सवाल यही उठ रहा है, क्या बुलडोजर कार्रवाई झेल चुके मोईद खान कानून के तहत मानहानि और मुआवजे का दावा कर सकते हैं? और ऐसे मामलों में कानून आखिर क्या कहता है?
जिस केस में चला बुलडोजर, उसी में कोर्ट से मिली राहत

उत्तर प्रदेश के अयोध्या जिले के भदरसा गैंगरेप केस में समाजवादी पार्टी से जुड़े स्थानीय नेता मोईद खान को अदालत ने बरी कर दिया है. यह वही मामला है, जिसमें आरोपी बनाए जाने के बाद मोईद खान की बेकरी और शॉपिंग कॉम्प्लेक्स पर प्रशासन ने बुलडोजर कार्रवाई की थी.

DNA रिपोर्ट बनी बरी होने की सबसे बड़ी वजह

कोर्ट में पेश डीएनए जांच रिपोर्ट में मोईद खान का सैंपल ‘निगेटिव’ पाया गया, जबकि उनके नौकर राजू का डीएनए पॉजिटिव निकला. इसी आधार पर विशेष पॉक्सो अदालत ने मोईद खान को सभी आरोपों से मुक्त कर दिया.

मोईद खान कौन है?

मोईद खान समाजवादी पार्टी से जुड़ा एक स्थानीय नेता है, जिसकी पहचान क्षेत्रीय राजनीति और संगठनात्मक नेटवर्क के कारण रही है. हालांकि पार्टी में उसका कोई बड़ा संवैधानिक पद नहीं था, लेकिन स्थानीय स्तर पर उसका प्रभाव माना जाता रहा है.

बुलडोजर कार्रवाई क्यों हुई थी?

प्रशासन का दावा है कि मोईद खान का शॉपिंग कॉम्प्लेक्स और बेकरी अवैध निर्माण की श्रेणी में आते थे। इसी आधार पर अगस्त 2024 में अयोध्या जिला प्रशासन ने दोनों ढांचों को ध्वस्त कर दिया था.

पीड़िता की मां का बड़ा बयान: दबाव में दर्ज कराया केस

अदालत में पीड़िता की मां ने स्वीकार किया कि मुकदमा राजनीतिक दबाव में दर्ज कराया गया था. साथ ही, घटनास्थल और वीडियो सबूतों को लेकर भी पुलिस जांच में विरोधाभास सामने आए.

बरी होने के बाद बड़ा सवाल: क्या मानहानि का दावा हो सकता है?

एडवोकेट राम कुमार शर्मा का कहना है कि अगर रेप के आरोपी को अदालत ने सभी आरोपों से बरी कर दिया, तो क्या वह मानहानि और मुआवजे का दावा कर सकता है? इसका जवाब 'हां' है, लेकिन यह ऑटोमैटिक अधिकार नहीं है. उसे अदालत में यह साबित करना होगा कि उसके खिलाफ झूठा, दुर्भावनापूर्ण (malicious) और जानबूझकर मामला दर्ज कराया गया था. सिर्फ बरी होना काफी नहीं है, पीड़ित को दुर्भावना (malice) साबित करनी होगी.

कानून के अनुसार, अगर कोई आरोपी सभी आरोपों से बरी हो जाता है, तो वह मानहानि और क्षतिपूर्ति का दावा कर सकता है, लेकिन यह स्वतः अधिकार नहीं है. उसे यह साबित करना होगा कि उसके खिलाफ मामला झूठा और दुर्भावनापूर्ण तरीके से दर्ज कराया गया था.

IPC की कौन-सी धाराएं लागू हो सकती हैं?

  • IPC धारा 499: जानबूझकर झूठे आरोप लगाकर बदनाम करने पर.
  • IPC धारा 500: मानहानि के लिए दो साल तक की सजा या जुर्माना.
  • CrPC धारा 250: झूठे मुकदमे पर कोर्ट द्वारा मुआवजा दिलाने का अधिकार.

बुलडोजर कार्रवाई पर भी बन सकता है कानूनी आधार

अगर यह साबित होता है कि बुलडोजर कार्रवाई सिर्फ आरोपों के आधार पर हुई और बाद में आरोपी बरी हो गया, तो प्रभावित व्यक्ति राज्य सरकार के खिलाफ भी संवैधानिक क्षतिपूर्ति का दावा कर सकता है.

यह मामला क्यों है नजीर जैसा?

मोईद खान केस केवल एक आपराधिक फैसला नहीं, बल्कि बुलडोजर कार्रवाई, कानून, राजनीति और नागरिक अधिकारों के टकराव का उदाहरण बन गया है, जिस पर आगे भी बहस जारी रहना तय है.

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