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'सा** पंडित पागल हो गया है', आखिर अलंकार अग्निहोत्री के सामने लखनऊ से डीएम के पास किसका आया फोन?

बरेली के सिटी मजिस्ट्रेट पद से इस्तीफा देने वाले अलंकार अग्निहोत्री ने सनसनीखेज दावा किया है. उन्होंने कहा कि उन्हें लखनऊ से फोन पर ‘जातीय गाली’ दी गई. इस घटना के SSP समेत 5 वरिष्ठ अधिकारी प्रत्यक्ष गवाह रहे.

Alankar Agnihotri claims caste-based abuse during phone call
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“जातीय गाली, 5 अफसर गवाह” -अलंकार अग्निहोत्री का बड़ा खुलासा

( Image Source:  Sora_ AI )

Alankar Agnihotri caste slur allegation: यूजीसी और शंकराचार्य विवाद को लेकर बरेली के सिटी मजिस्ट्रेट से इस्तीफा देने वाले अलंकार अग्निहोत्री ने गंभीर आऱोप लगाया है. उन्होंने दावा किया है कि उन्हें लखनऊ से फोन पर ‘जातीय अपशब्द’ कहे गए, और इस पूरी बातचीत के पांच वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी प्रत्यक्ष गवाह हैं. इसका वीडियो भी जमकर वायरल हो रहा है.

अलंकार अग्निहोत्री के मुताबिक, यह घटना उस समय हुई जब बरेली के जिलाधिकारी अविनाश सिंह के फोन पर कथित रूप से उन्हें अपमानजनक और जाति-सूचक भाषा (सा** पंडित पागल हो गया है) में संबोधित किया गया. उन्होंने दावा किया कि उस वक्त वह अकेले नहीं थे, बल्कि प्रशासन के कई शीर्ष अधिकारी उनके साथ मौजूद थे, जिन्होंने यह पूरी बातचीत सुनी.

पांच अधिकारी रहे घटना के गवाह

अलंकार अग्निहोत्री ने जिन अधिकारियों को इस कथित घटना का प्रत्यक्ष गवाह बताया है, वे हैं;

  • बरेली के SSP अनुराग आर्या
  • ADM सिटी, बरेली
  • ADM (ज्यूडिशियल), बरेली
  • ADM (एग्जीक्यूटिव), बरेली
  • SDM, बरेली

अलंकार अग्निहोत्री का कहना है कि ये सभी अधिकारी उस समय मौके पर मौजूद थे और उन्होंने स्वयं वह कथित टिप्पणी सुनी.

“सबूत भी हैं, गवाह भी”, जांच की मांग तेज

अलंकार अग्निहोत्री ने दावा किया है, “इस मामले में सिर्फ आरोप नहीं हैं, बल्कि सबूत मौजूद हैं, गवाह मौजूद हैं और एक सोच भी उजागर हो चुकी है.” उनका कहना है कि यदि इतने वरिष्ठ अधिकारियों की मौजूदगी में यह घटना हुई है, तो अब स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच से पीछे हटने का कोई कारण नहीं होना चाहिए. इस खुलासे के बाद प्रशासनिक और राजनीतिक हलकों में हलचल तेज हो गई है. माना जा रहा है कि इस प्रकरण में स्वतंत्र जांच आयोग या उच्चस्तरीय विभागीय जांच की मांग अब और तेज हो सकती है.

‘ब्राह्मण विरोधी सोच’ का आरोप

अलंकार अग्निहोत्री ने इस पूरे घटनाक्रम को केवल व्यक्तिगत अपमान नहीं, बल्कि एक व्यापक ‘ब्राह्मण विरोधी मानसिकता’ से जोड़कर देखा है. उनका आरोप है कि प्रशासनिक तंत्र के भीतर एक वर्ग विशेष के प्रति सोच और व्यवहार में भेदभाव स्पष्ट रूप से दिखाई दे रहा है, जिसे अब नजरअंदाज नहीं किया जा सकता.

प्रशासनिक संकट बनता जा रहा मामला

यह मामला अब निलंबन, जातीय टिप्पणी, वरिष्ठ अधिकारियों के गवाह होने और सार्वजनिक आरोप-प्रत्यारोप के चलते केवल एक अफसर का विवाद नहीं, बल्कि पूरे प्रशासनिक ढांचे की विश्वसनीयता से जुड़ा सवाल बनता जा रहा है. अगर स्वतंत्र जांच होती है, तो यह मामला आने वाले दिनों में उत्तर प्रदेश प्रशासन की सबसे बड़ी आंतरिक जांचों में से एक बन सकता है.

अलंकार अग्निहोत्री ने क्यों दिया सिटी मजिस्ट्रेट पद से इस्तीफा?

अलंकार अग्निहोत्री 2016 बैच के पीसीएस अधिकारी हैं. उन्होंने इस्तीफा देते हुए कहा कि वह शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद और उनके शिष्यों के साथ हुई कथित घटना से आहत हैं और यूजीसी के नए कानून का विरोध करते हैं. इस्तीफे के साथ ही अलंकार अग्निहोत्री की एक तस्वीर सोशल मीडिया पर वायरल हो गई, जिसमें वह पोस्टर लेकर खड़े नजर आ रहे हैं. पोस्टर पर लिखा है, “#UGC Rollback… काला कानून वापस लो, शंकराचार्य और संतों को यह अपमान नहीं सहेगा हिंदुस्तान.” इस तस्वीर के सामने आते ही प्रशासनिक और राजनीतिक गलियारों में हलचल तेज हो गई.

27 मई 2025 को बने थे बरेली के सिटी मजिस्ट्रेट

कानपुर नगर के मूल निवासी अलंकार अग्निहोत्री का चयन 2019 में डिप्टी कलेक्टर पद पर हुआ था. उन्होंने इससे पहले उन्नाव, बलरामपुर, एटा और लखनऊ में अपनी सेवाएं दी हैं. उनका जन्म 19 मई 1982 को हुआ.

‘पुनरुत्थान बरेली परिवार’ नाम से बनाया था सोशल मीडिया ग्रुप

बरेली में तैनाती के बाद अलंकार अग्निहोत्री ने ‘पुनरुत्थान बरेली परिवार’ नाम से एक व्हाट्सएप ग्रुप बनाया था, जिसमें इस समय 529 सदस्य जुड़े हुए हैं. सोमवार को उनके इस्तीफे की खबर सबसे पहले इसी ग्रुप पर वायरल हुई.

यूजीसी के नए कानून पर तीखा विरोध

अलंकार अग्निहोत्री ने कहा कि यूजीसी के नए नियम सामान्य वर्ग के छात्रों के लिए खतरनाक हैं. उनका आरोप है कि सामान्य वर्ग के छात्रों को स्वघोषित अपराधी मान लिया गया है. यह नियम करियर और निजी जीवन को जोखिम में डाल सकते हैं. इससे शोषण और विषमता बढ़ेगी. उन्होंने ब्राह्मण समाज के सांसदों और विधायकों पर भी निशाना साधते हुए कहा, “वे कॉरपोरेट कंपनी के कर्मचारियों की तरह काम कर रहे हैं. जब तक सीईओ नहीं बोलेगा, उनके हाथ नहीं हिलेंगे.” उन्होंने ब्राह्मण सांसदों और विधायकों से इस्तीफा देकर समाज के साथ खड़े होने की अपील की.

अलंकार अग्निहोत्री ने इस्तीफे में क्या लिखा?

अलंकार अग्निहोत्री ने अपने इस्तीफे में लिखा, “प्रयागराज में माघ मेले के दौरान मौनी अमावस्या स्नान के समय ज्योतिष पीठ ज्योर्तिमठ के शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद एवं उनके शिष्यों, बटुक ब्राह्मणों के साथ स्थानीय पुलिस प्रशासन द्वारा मारपीट की गई.” उन्होंने आरोप लगाया कि बटुक ब्राह्मण को जमीन पर गिराकर पीटा गया, उसकी शिखा पकड़कर घसीटा गया, जो धार्मिक और सांस्कृतिक प्रतीक है. पत्र में आगे लिखा, “मैं स्वयं ब्राह्मण वर्ण से हूं. इस घटना से स्पष्ट है कि स्थानीय प्रशासन द्वारा ब्राह्मणों का अपमान किया गया है.” उन्होंने यह भी कहा कि ऐसी घटनाएं सरकार के दौर में होना एक साधारण ब्राह्मण की आत्मा को कंपा देता है, और इससे यह प्रतीत होता है कि राज्य सरकार ब्राह्मण विरोधी विचारधारा के साथ काम कर रही है.

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