गोली मार दो हमें...हिरासत के बाद महिला थाने में भड़कीं सांसद Iqra Hasan, आखिर क्या है पूरा मामला?
सहारनपुर में DIG ऑफिस के बाहर हंगामे के दौरान कैराना सांसद Iqra Hasan को महिला थाने ले जाया गया. पीड़ित महिला के समर्थन, पुलिस से बहस और प्रशासन पर लगाए गए आरोपों को लेकर मामला चर्चा में है.
Iqra Hasan: सहारनपुर में बुधवार को उस समय विवाद की स्थिति बन गई, जब कैराना की सांसद Iqra Hasan को पुलिस ने डीआईजी कार्यालय परिसर से महिला थाने पहुंचा दिया. सांसद एक बुजुर्ग पीड़ित महिला के साथ बेटे की हत्या के मामले में न्याय की मांग को लेकर डीआईजी कार्यालय गई थीं. इसी दौरान वहां बहस और विरोध की स्थिति बन गई.
जानकारी के अनुसार, पीड़ित महिला शामली जिले के दशाले गांव की रहने वाली हैं. महिला अपने बेटे की हत्या के मामले में पुलिस की कार्रवाई से संतुष्ट नहीं थी और निष्पक्ष जांच की मांग को लेकर अधिकारियों से मिलने सहारनपुर पहुंची थी. सांसद इकरा हसन भी महिला के साथ डीआईजी कार्यालय पहुंचीं.
सांसद ने क्या लगाए आरोप?
सांसद का आरोप है कि अधिकारियों ने पीड़ित महिला की बात ठीक से नहीं सुनी. उनके मुताबिक, बातचीत के दौरान महिला भावुक हो गई और रोते हुए दफ्तर से बाहर निकल आई. इसके बाद इकरा हसन ने महिला के समर्थन में विरोध जताया.
कैसे मामले ने पकड़ा तूल?
मामले ने उस समय ज्यादा तूल पकड़ लिया जब पुलिस और सांसद के बीच कहासुनी शुरू हो गई. विवाद पार्किंग और विरोध प्रदर्शन तक पहुंच गया. इसके बाद महिला पुलिसकर्मी सांसद को वहां से महिला थाने ले गईं. बताया गया कि उन्हें करीब 10 मिनट तक महिला थाने में बैठाया गया.
क्या पुलिस अधिकारी के साथ हुई तीखी बहस?
इस दौरान मौके पर मौजूद पुलिस अधिकारी Vyom Bindal से सांसद की तीखी बहस भी हुई. इकरा हसन ने नाराजगी जताते हुए कहा, “आप मार दो गोली हमें, चढ़ा दो फांसी पर हमको, हम डरने वाले नहीं हैं. प्रोटोकॉल तो छोड़िए, आप में इंसानियत तक नहीं है. हमारी वजह से न कोई जाम लगा और न कोई विवाद हुआ, फिर भी हमें थाने ले जाकर बैठा दिया गया.”
मीडिया से क्या बोलीं सांसद?
बाद में मीडिया से बातचीत में सांसद ने कहा कि पुलिस ने ट्रैफिक प्रभावित होने और सड़क जाम का हवाला देकर उन्हें महिला थाने पहुंचाया, जबकि मौके पर ऐसी कोई स्थिति नहीं थी. उन्होंने कहा कि पूरे घटनाक्रम का वीडियो भी उनके पास मौजूद है.
इकरा हसन ने आरोप लगाया कि प्रशासन पीड़ित लोगों की बात सुनने के बजाय उन पर दबाव बनाने का काम कर रहा है. उनका कहना था कि अगर अधिकारियों ने महिला की शिकायत को गंभीरता से सुना होता तो विवाद की स्थिति पैदा नहीं होती. महिला थाने में पानी दिए जाने की बात पर सांसद ने कथित तौर पर कहा, “हमें आपका पानी नहीं पीना.”
पुलिस ने क्या कहा?
इस मामले में अभी तक पुलिस प्रशासन की ओर से कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है. हालांकि डीआईजी कार्यालय के बाहर हुए घटनाक्रम और सांसद को महिला थाने ले जाने की कार्रवाई को लेकर जिले में चर्चाएं तेज हैं.
सांसद इकरा हसन ने पुलिस प्रशासन पर तानाशाही रवैया अपनाने का आरोप लगाया. उन्होंने कहा कि एक पीड़ित महिला का समर्थन करने और विरोध दर्ज कराने पर उन्हें जबरन पार्किंग से उठाकर महिला थाने ले जाया गया.
सांसद के मुताबिक, शामली की रहने वाली पीड़ित मां अपने बेटे की हत्या के मामले में न्याय की मांग को लेकर अधिकारियों के पास पहुंची थी, क्योंकि वह पुलिस जांच से संतुष्ट नहीं थी. उनका आरोप है कि डीआईजी ने महिला की बात सुनने से इनकार कर दिया, जिसके बाद वह रोते हुए बाहर निकली.
इकरा हसन ने कहा कि उन्होंने इसी रवैये के खिलाफ आवाज उठाई थी. उन्होंने पुलिस के ट्रैफिक जाम और सड़क बाधित होने के दावों को “ड्रामेबाजी” बताया और कहा कि उनके पास इसका वीडियो सबूत मौजूद है.




