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रोम के Colosseum स्टेडियम का इतिहास क्या, जहां मोदी-मेलोनी ने एक साथ खिंचवाईं फोटो, सेल्फी भी ली

इटली दौरे पर पहुंचे प्रधानमंत्री Narendra Modi ने इटली की पीएम Giorgia Meloni के साथ रोम के ऐतिहासिक Colosseum के पास फोटो और सेल्फी ली, जिसकी खूब चर्चा हो रही है. करीब 2000 साल पुराना यह स्टेडियम कभी ग्लैडिएटरों की खतरनाक लड़ाइयों और ग्रैंड इवेंट के लिए जाना जाता था.

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रोम के Colosseum स्टेडियम का इतिहास क्या

( Image Source:  ANI )
हेमा पंत
Edited By: हेमा पंत4 Mins Read

Updated on: 20 May 2026 10:52 AM IST

हाल ही में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इटली के दौरे पर पहुंचे, जहां उनकी मुलाकात इटली की प्रधानमंत्री जियोर्जिया मेलोनी से हुई. दोनों नेताओं ने साथ में डिनर किया और कई अहम मुद्दों पर चर्चा भी की. इस दौरान दोनों की एक तस्वीर रोम के मशहूर Colosseum के पास खिंचवाई गई, जो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो गई.

दरअसल, कोलोसियम इटली की राजधानी रोम का सबसे फेमस ऐतिहासिक मॉन्यूमेंट है. करीब 2000 साल पुराना यह बड़ा स्टेडियम प्राचीन रोमन साम्राज्य की ताकत और शानदार आर्किटेक्चर का प्रतीक माना जाता है. यहां पहले ग्लैडिएटरों की लड़ाइयां, जंगली जानवरों के शिकार और बड़े पब्लिक इवेंट होस्ट किए जाते थे.

कोलोसियम का इतिहास

कोलोसियम का निर्माण रोमन सम्राट Vespasian ने लगभग 72 ईस्वी में शुरू करवाया था. उनके बेटे और अगले सम्राट Titus ने 80 ईस्वी में इसे पूरा करवाया. बाद में सम्राट Domitian ने इसमें कुछ बदलाव भी करवाए. यह इमारत “फ्लेवियन एम्फीथिएटर” नाम से भी जानी जाती थी क्योंकि इसे फ्लेवियन राजवंश के शासकों ने बनवाया था.

कोलोसियम नाम कैसे पड़ा?

माना जाता है कि कोलोसियम नाम पास में लगी सम्राट Nero की एक विशाल मूर्ति से पड़ा. यह मूर्ति इतनी बड़ी थी कि उसे Colossus कहा जाता था. उसी शब्द से आगे चलकर कोलोसियम नाम बना.

कोलोसियम का निर्माण कैसे हुआ?

कोलोसियम को बनाने में उस समय की सबसे मजबूत चीजें इस्तेमाल की गई थी. इसमें ट्रैवर्टीन पत्थर, ज्वालामुखीय चट्टान (टफ), रोमन कंक्रीट, ईंटें शामिल हैं. यह इमारत पूरी तरह स्वतंत्र रूप से खड़ी बनाई गई थी. उस समय के कई थिएटर पहाड़ियों के सहारे बनाए जाते थे, लेकिन कोलोसियम बिना किसी प्राकृतिक सहारे के बनाया गया था. इसमें एक समय में लगभग 50,000 से 80,000 लोग बैठ सकते थे. दर्शकों के बैठने की व्यवस्था सोशल लेवल के अनुसार होती थी. राजा और बड़े अधिकारी नीचे बैठते थे, जबकि आम लोग ऊपर की सीटों पर बैठते थे.

कोलोसियम में क्या-क्या होता था?

  • कोलोसियम में सबसे फेमस इवेंट में ग्लैडिएटरों की लड़ाई होती थी. ग्लैडिएटर ऐसे योद्धा होते थे जो तलवार और अन्य हथियारों से लड़ते थे. लोग इन लड़ाइयों को देखने के लिए बड़ी संख्या में आते थे.
  • यहां शेर, हाथी, बाघ, तेंदुए, भालू, जिराफ और मगरमच्छ जैसे जानवर लाए जाते थे. इन जानवरों के साथ शिकार और लड़ाई के खेल आयोजित किए जाते थे.
  • प्राचीन रोमन युद्धों और पौराणिक कहानियों पर आधारित नाटक भी यहां खेले जाते थे. कई बार नकली युद्ध और समुद्री लड़ाइयों का प्रदर्शन भी किया जाता था.

कोलोसियम का धार्मिक महत्व

कई ईसाई मानते हैं कि रोमन साम्राज्य के दौरान यहां अनेक ईसाइयों को सजा दी गई और उनकी हत्या की गई थी. इसलिए यह स्थान ईसाई धर्म में भी महत्वपूर्ण माना जाता है. आज भी हर साल “गुड फ्राइडे” के दिन पोप यहां विशेष धार्मिक यात्रा निकालते हैं.

कोलोसियम आज क्यों प्रसिद्ध है?

आज कोलोसियम दुनिया के सबसे बड़े टूरिज्म स्पॉट में से एक है. हर साल लाखों लोग इसे देखने आते हैं. यह प्राचीन रोमन सभ्यता, वास्तुकला और इतिहास का जीवित उदाहरण माना जाता है. 2007 में इसे दुनिया के “New 7 Wonders” में शामिल किया गया था.

नरेंद्र मोदी
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