कोरिया की फैंटेसी में फ़ना हुईं तीन बहनें; परवरिश जिम्मेदार या कुछ और? वर्चुअल हैप्पीनेस-रियल लाइफ हार्टब्रेक
गाज़ियाबाद में तीन बहनों ने सोशल मीडिया पर MARIA, ALIZA और CINDY नाम क्यों रखे? कोरियन कल्चर और ऑनलाइन दुनिया के असर की पूरी कहानी.
गाज़ियाबाद की तीन बहनों की कहानी सिर्फ एक हादसा नहीं, बल्कि उस जेनरेशन की सच्चाई भी है जो रियल लाइफ से ज्यादा वर्चुअल दुनिया में जीने लगी है. K-pop, K-drama और कोरियन लाइफस्टाइल के ग्लैमर ने उनके दिल-दिमाग पर ऐसा असर डाला कि उन्होंने अपनी असली पहचान से दूरी बना ली. सोशल मीडिया पर वे खुद को MARIA, ALIZA और CINDY कहती थीं, और उसी दुनिया को अपनी असली लाइफ मानने लगी थीं.
जब घर की हकीकत और ऑनलाइन फैंटेसी के बीच टकराव हुआ, तो यह टकराव इतना गहरा हो गया कि तीनों बहनों की जिंदगी ही खत्म हो गई. शुरूआती जांच में पता चला कि तीनों बहनों पर लगाम लगाने के लिए इसके पिता ने काफी सख्ती की थी. सुसाइड नोट में लिखा था कि वो मार खाने के लिए इस दुनिया में नहीं आई है. इसमें पिता यह कहानी सिर्फ एक परिवार की नहीं, बल्कि उस Gen-Z दुनिया की है जहां स्क्रीन पर दिखने वाला सपना कई बार हकीकत से ज्यादा ताकतवर बन जाता है.
क्या वे खुद को कोरियन मानने लगी थीं?
कुछ रिपोर्ट्स के मुताबिक, जब पिता ने उनकी शादी की बात कही तो बहनों ने जवाब दिया कि वे शादी नहीं कर सकतीं क्योंकि वे “भारतीय नहीं, कोरियन” हैं. यह बयान उनकी मानसिक स्थिति और उस वर्चुअल पहचान को दर्शाता है, जिसे उन्होंने सोशल मीडिया पर अपनाया हुआ था.
मोबाइल फोन छीने जाने से क्या बदला?
जांच में पता चला कि करीब 10 दिन पहले पिता को उनके सोशल मीडिया अकाउंट्स और ऑनलाइन गतिविधियों की जानकारी मिली. इसके बाद उन्होंने अकाउंट डिलीट कर दिए और मोबाइल फोन अपने पास रख लिए. आर्थिक तंगी के चलते फोन बेचने की भी बात सामने आई है. इससे तीनों बहनों का सोशल मीडिया और ऑनलाइन दुनिया से संपर्क पूरी तरह टूट गया, जिससे वे काफी परेशान हो गईं.
सुसाइड नोट में क्या-क्या लिखा था?
कोरियन स्टार्स के प्रति गहरी दीवानगी: सुसाइड नोट में तीनों बहनों ने K-pop और कोरियन स्टार्स के प्रति अपने लगाव का जिक्र किया. उन्होंने लिखा कि वे कोरियन कंटेंट से बेहद प्रभावित थीं और उसी लाइफस्टाइल को अपनाना चाहती थीं. रहन-सहन, कपड़े और हेयरस्टाइल तक उन्होंने उसी अंदाज़ में बदल लिए थे.
खुद को कोरियन पहचान से जोड़ना: नोट में यह भी सामने आया कि उन्होंने अपने नाम बदलकर मारिया, एलिजा और सिंडी रख लिए थे. वे खुद को “कोरियन और के-पॉप” मानती थीं और लिखती थीं कि कोरियन स्टार्स ही उनकी असली दुनिया हैं.
छोटी बहन को भी ‘कोरियन’ बनाना चाहती थीं: तीनों बहनों ने नोट में लिखा कि वे अपनी छोटी बहन देवु को भी कोरियन कल्चर से जोड़ना चाहती थीं. लेकिन परिवार के लोग उसे भारतीय चीजें दिखाते थे, जिससे वे नाराज रहती थीं. उन्होंने लिखा कि उन्हें मौका नहीं दिया गया कि देवु को “कोरियन लवर” बना सकें.
परिवार से मार-डांट का जिक्र: नोट में यह भी लिखा गया कि इस बात को लेकर घर में उन्हें डांट-फटकार और मार भी पड़ती थी. इससे वे नाराज और आहत रहती थीं. उन्होंने परिवार के व्यवहार से खुद को अलग-थलग महसूस करने की बात लिखी.
रिश्तों को लेकर अलग सोच: उन्होंने लिखा कि वे कोरियन स्टार्स को अपने “रिश्तेदार” की तरह मानती थीं और छोटी बहन को भी वैसा ही सिखाना चाहती थीं. लेकिन परिवार इसे गलत बताता था, जिससे उन्हें बुरा लगता था.
“हम कोरियन हैं, आप इंडिया-बॉलीवुड”: नोट में एक जगह उन्होंने लिखा कि “हम कोरियन और के-पॉप हैं, तुम इंडिया और बॉलीवुड हो.” इससे साफ होता है कि उन्होंने अपनी पहचान को परिवार और भारतीय माहौल से अलग मानना शुरू कर दिया था.
घरवालों से ज्यादा कोरियन स्टार्स से लगाव: सुसाइड नोट में यह भी लिखा मिला कि वे कोरियन स्टार्स को घरवालों से ज्यादा चाहती थीं और उन्हें ही अपनी जिंदगी का सबसे अहम हिस्सा मानती थीं.
मौत को मार से बेहतर बताया: नोट के अंत में उन्होंने लिखा कि वे मार खाने के लिए इस दुनिया में नहीं आई हैं और उन्हें मार से बेहतर मौत लगती है. यह पंक्ति उनकी मानसिक स्थिति और गहरे तनाव को दर्शाती है.
क्या वे किसी ऑनलाइन गेम या कम्युनिटी से जुड़ी थीं?
कुछ रिपोर्ट्स में यह भी सामने आया कि तीनों बहनें एक चैट-आधारित ऑनलाइन गेम और कम्युनिटी से जुड़ी थीं. इस वर्चुअल दुनिया में विदेशी या कोरियन नामों का इस्तेमाल आम था. यहीं उनकी दोस्ती और पहचान बनी हुई थी, जो फोन छिनने के बाद अचानक खत्म हो गई.
क्या किसी 'कोरियन गेम टास्क' का था दबाव?
शुरुआती खबरों में यह चर्चा थी कि किसी कोरियन गेम या ऑनलाइन चैलेंज का दबाव हो सकता है. लेकिन बाद की जांच में पुलिस ने कहा कि ऐसा कोई ठोस सबूत नहीं मिला है कि किसी गेम के टास्क की वजह से यह घटना हुई. फिलहाल जांच परिवारिक तनाव, आर्थिक समस्याओं और बहनों की मानसिक स्थिति के सभी पहलुओं को ध्यान में रखकर की जा रही है.
इस घटना से क्या सबक मिलता है?
यह मामला दिखाता है कि किशोर उम्र में सोशल मीडिया और वर्चुअल दुनिया का असर कितना गहरा हो सकता है. विशेषज्ञों का कहना है कि बच्चों की ऑनलाइन गतिविधियों पर निगरानी के साथ-साथ उनसे खुलकर बातचीत करना भी उतना ही जरूरी है, ताकि वे किसी भी मानसिक दबाव या भ्रम की स्थिति में अकेले न पड़ें.
अगर आप या आपके आसपास कोई व्यक्ति मानसिक तनाव, निराशा या आत्महत्या जैसे विचारों से जूझ रहा है, तो तुरंत मदद लेना बहुत जरूरी है. भारत में कई भरोसेमंद सुसाइड हेल्पलाइन उपलब्ध हैं.
राष्ट्रीय और प्रमुख हेल्पलाइन नंबर
किरण मानसिक स्वास्थ्य हेल्पलाइन (सरकार द्वारा संचालित): 1800-599-0019
(24×7, मुफ्त और गोपनीय सेवा)
स्नेहा फाउंडेशन: 044-24640050
(24×7, चेन्नई आधारित लेकिन पूरे भारत के लिए)
आसरा हेल्पलाइन: 9820466726
(24×7, आत्महत्या रोकथाम सहायता)
iCALL (टाटा इंस्टीट्यूट ऑफ सोशल साइंसेज): 9152987821
(सोमवार–शनिवार, सुबह 10 बजे से रात 8 बजे तक)
अगर स्थिति तुरंत आपातकालीन हो, तो अपने नजदीकी व्यक्ति को साथ रखें और 112 (इमरजेंसी नंबर) पर कॉल करें.





