नाम Maria, Aliza, Cindy, पिता पर 2 करोड़ का कर्ज, गेम नहीं तो किस वजह से उठाया ये कदम, गाजियाबाद केस में क्या-क्या हुआ?
गाजियाबाद में तीन बहनों की मौत के मामले में पुलिस जांच में बड़ा खुलासा हुआ है. अब तक किसी ऑनलाइन गेम का सबूत नहीं मिला, बल्कि मानसिक तनाव, मोबाइल बंद होने और पारिवारिक हालात को वजह माना जा रहा है. साथ ही कोरियन कल्चर से अटैच होने की बात सामने आई है.
गाजियाबाद में तीन नाबालिग बहनों की मौत ने पूरे देश को झकझोर दिया, लेकिन शुरुआती अफवाहों के उलट अब जांच में जो तस्वीर उभर रही है, वह कहीं ज्यादा जटिल और चिंताजनक है. पहले इस घटना को ऑनलाइन गेम या किसी ‘कोरियन सुसाइड गेम’ से जोड़कर देखा जा रहा था, मगर पुलिस की अब तक की जांच में ऐसा कोई ठोस सबूत नहीं मिला है. इससे मामला केवल डिजिटल गेमिंग नहीं, बल्कि पारिवारिक, मानसिक और सामाजिक दबावों का मिश्रण नजर आने लगा है.
पुलिस सूत्रों के अनुसार अब तक मोबाइल की जांच, डायरी के पन्नों और अन्य डिजिटल डेटा में किसी सुसाइड चैलेंज या खतरनाक गेम का कोई संकेत नहीं मिला है. इससे यह साफ होता है कि घटना को सीधे किसी गेम से जोड़ना जल्दबाजी हो सकती है. जांच एजेंसियां अब मानसिक स्थिति और पारिवारिक परिस्थितियों पर ज्यादा फोकस कर रही हैं.
असली वजह क्या सामने आ रही है?
पुलिस के अनुसार, तीनों बहनें कोरियन संस्कृति से बेहद प्रभावित थीं. उन्होंने अपने लिए कोरियन स्टाइल के नाम तक रख लिए थे.तीनों में से एक ने MARIA, एक ने ALIZA , एक ने CINDY नाम रखा था. घर में मोबाइल फोन बंद किए जाने और शादी को लेकर हुई बातचीत के बाद वे मानसिक रूप से परेशान रहने लगी थीं. माना जा रहा है कि इसी दबाव और इमोशनल ब्रेकडाउन ने उन्हें यह कदम उठाने की ओर धकेला.
डायरी ने क्या खोले राज?
घटनास्थल से मिली आठ पन्नों की डायरी इस केस की अहम कड़ी बनकर सामने आई है. उसमें बच्चियों ने बार-बार कोरियन म्यूजिक, फिल्में और सीरीज का जिक्र किया है. एक जगह अंग्रेजी में लिखा था, “WE LOVE KOREAN CULTURE.” पुलिस का मानना है कि यह केवल शौक नहीं, बल्कि एक गहरी भावनात्मक निर्भरता बन चुकी थी.
मोबाइल बंद होने से क्यों बढ़ा तनाव?
जांच में सामने आया है कि कुछ समय पहले परिवार ने बच्चियों के मोबाइल इस्तेमाल पर रोक लगा दी थी. डायरी में उन्होंने इस फैसले को लेकर अपनी परेशानी लिखी थी. उनके लिए मोबाइल सिर्फ मनोरंजन का साधन नहीं, बल्कि भावनात्मक सहारा बन चुका था. जब यह अचानक छिन गया, तो वे खुद को पूरी तरह अकेला महसूस करने लगीं.
क्या स्कूल से दूरी भी बनी वजह?
पुलिस जांच में यह भी सामने आया कि तीनों बहनें पिछले दो-तीन साल से नियमित स्कूल नहीं जा रही थीं. कोरोना काल के बाद पढ़ाई छूट गई और उनका सामाजिक दायरा बेहद सीमित हो गया. धीरे-धीरे उनकी दुनिया घर की चार दीवारों और मोबाइल स्क्रीन तक सिमट गई, जिससे मानसिक संतुलन पर असर पड़ना स्वाभाविक माना जा रहा है.
परिवार की आर्थिक हालत कितनी अहम कड़ी है?
जानकारी के मुताबिक बच्चियों के पिता पर करीब दो करोड़ रुपये का कर्ज था. घर की आर्थिक स्थिति इतनी खराब बताई जा रही है कि बिजली बिल भरने के लिए बेटी का फोन तक बेचना पड़ा. ऐसे माहौल में बच्चों पर मानसिक दबाव बढ़ना असामान्य नहीं माना जाता.
जांच में क्या सामने आया?
- पिता पर भारी कर्ज का बोझ
- घर में 9 लोगों का परिवार
- बेटियों की पढ़ाई छूटी
- मोबाइल फोन पर रोक
- आर्थिक तनाव और पारिवारिक बहस
क्या शादी का दबाव भी एक कारण बना?
हाल ही में पिता और बच्चियों के बीच बहस हुई थी. इस दौरान पिता ने उनकी शादी की बात भी छेड़ी थी. बताया जा रहा है कि बच्चियां कोरियन संस्कृति से इतनी प्रभावित थीं कि वे उसी तरह का जीवन चाहती थीं. शादी की चर्चा ने उन्हें और मानसिक रूप से अस्थिर कर दिया.
घर का माहौल कितना जटिल था?
परिवार का माहौल भी जांच का अहम हिस्सा है. घर में पिता, दो पत्नियां, एक साली, चार बेटियां और एक मूकबधिर बेटा रहता था. दो शादियों और बड़े परिवार के बीच तनावपूर्ण माहौल की संभावना से इनकार नहीं किया जा रहा. हालांकि पुलिस ने अभी तक घरेलू हिंसा का कोई सीधा सबूत नहीं बताया है.
कमरे की दीवारों पर क्या लिखा मिला?
पुलिस जब कमरे में पहुंची तो वहां का माहौल बेहद सन्नाटे भरा था. दीवार पर अंग्रेजी में लिखा मिला, “I AM REALLY VERY ALONE. MY LIFE IS VERY VERY ALONE.” ये शब्द बच्चियों के अंदर की अकेलेपन की भावना को दर्शाते हैं, जो इस केस की मनोवैज्ञानिक दिशा की ओर इशारा करते हैं.
पुलिस की अब तक की जांच क्या कहती है?
डीसीपी के मुताबिक अब तक किसी ऑनलाइन गेम या सुसाइड चैलेंज का कोई सबूत नहीं मिला है. जांच में सामने आया है कि बच्चियां डिजिटल कंटेंट और कोरियन संस्कृति से भावनात्मक रूप से जुड़ी थीं. मोबाइल बंद होने और सामाजिक अलगाव ने उनके तनाव को बढ़ा दिया.
इस केस से समाज के लिए क्या सबक?
गाजियाबाद की यह घटना सिर्फ एक क्राइम स्टोरी नहीं, बल्कि बदलती डिजिटल दुनिया और बच्चों की मानसिक स्थिति पर गंभीर सवाल खड़े करती है. यह बताती है कि अकेलापन, डिजिटल निर्भरता, आर्थिक दबाव और पारिवारिक तनाव मिलकर कितनी बड़ी त्रासदी को जन्म दे सकते हैं. अंतिम निष्कर्ष जांच पूरी होने के बाद ही सामने आएगा, लेकिन यह मामला पहले ही समाज और अभिभावकों के लिए चेतावनी बन चुका है.





