गोरखपुर में तरबूज के बाद खाई मैगी, एक ही परिवार के 11 लोग बीमार; 3 बच्चों की हालत गंभीर
गोरखपुर के मलाव गांव में एक ही परिवार के 11 सदस्य तरबूज और मैगी खाने के बाद गंभीर रूप से बीमार पड़ गए. तीन बच्चों की हालत नाजुक है और डॉक्टर फूड पॉइजनिंग की जांच कर रहे हैं.
उत्तर प्रदेश के गोरखपुर जिले में बेलीपार क्षेत्र के मलाव गांव में एक बहुत ही दुखद और चौंकाने वाला घटना सामने आई है. एक ही परिवार के 11 सदस्यों ने बुधवार की शाम तरबूज खाया और उसके कुछ देर बाद बच्चों की जिद पर मैगी भी बनाकर खाई. रात होते-होते पूरे परिवार की तबीयत अचानक बिगड़ गई. सबको उल्टी-दस्त, पेट में तेज दर्द और सांस लेने में तकलीफ शुरू हो गई. परिवार के लोग पहले घबराकर गांव के झोलाछाप डॉक्टर के पास गए और दवा ले ली, लेकिन उससे कोई फायदा नहीं हुआ. उल्टा हालत और खराब होती गई. परिवार के सदस्य कमजोर पड़ते गए और निढाल होकर गिरने लगे आखिरकार गुरुवार को पड़ोसियों और ग्रामीणों की मदद से सभी को जिला अस्पताल ले जाया गया. वहां डॉक्टरों ने तुरंत इलाज शुरू किया.
हिंदुस्ता के मुताबिक, जिला अस्पताल के चिकित्सा अधीक्षक डॉ. बीके सुमन ने बताया कि इस परिवार में बैजनाथ पांडेय, उनके भाई अमरनाथ पांडेय, शैल कुमारी, अंशु पांडेय, पूर्णिमा पांडेय, वेदांत, हन्नू, नेहा पांडेय, जगदीश दुबे और सौरभ त्रिपाठी जैसे सदस्य शामिल हैं। इनमें से तीन छोटे बच्चों की हालत काफी गंभीर बताई जा रही है. उल्टी-दस्त की वजह से उनमें तेजी से डिहाइड्रेशन (पानी की कमी) हो गया था. सभी मरीजों को एहतियात के तौर पर गहन निगरानी में रखा गया है. उन्हें ड्रिप चढ़ाई जा रही है और उनकी हालत पर लगातार नजर रखी जा रही है. बाकी सदस्यों की हालत अब स्थिर है और वे खतरे से बाहर बताए जा रहे हैं.
परिवार ने बताया क्या हुआ?
मलाव गांव के बैजनाथ पांडेय ने घटना के बारे में बताया, 'बुधवार शाम करीब 8 बजे हम सबने मिलकर तरबूज खाया. सबको अच्छा लगा. ठीक एक घंटे बाद बच्चों ने बहुत जिद की तो हमने मैगी बना दी. सबने मिलकर खाई. रात करीब 1 बजे अचानक एक-एक करके सबकी तबीयत खराब होने लगी. उल्टी और दस्त शुरू हो गए। पेट में तेज दर्द के साथ सांस भी फूलने लगी. छोटे बच्चे और बुजुर्ग सबसे ज्यादा परेशान थे.' रात भर परिवार ने गांव में ही इलाज की कोशिश की, लेकिन हालत बिगड़ती ही गई. सुबह होते-होते सब इतने कमजोर हो गए कि खुद से कुछ नहीं कर पा रहे थे. आखिर में पड़ोसियों ने देखा तो तुरंत उन्हें जिला अस्पताल पहुंचाया.
डॉक्टरों का अनुमान: क्या था असली कारण?
डॉ. बीके सुमन और गोरखनाथ अस्पताल के फिजीशियन डॉ. संजीव गुप्ता ने बताया कि गर्मी के मौसम में ऐसे मामले अक्सर देखने को मिलते हैं. दो मुख्य कारण हो सकते हैं:
तरबूज में ऑक्सीटोसिन: किसान अगर तरबूज को जल्दी पकाने के लिए ऑक्सीटोसिन (एक हार्मोन इंजेक्शन) का इस्तेमाल करते हैं तो वह जहर बन सकता है. खासकर अगर तरबूज कटा हुआ लंबे समय तक खुले में रखा रहा हो तो बैक्टीरिया भी बढ़ जाते हैं. एक्सपायर या पुरानी मैगी: अगर मैगी पुरानी, एक्सपायरी डेट वाली या खराब स्टोर की हुई हो तो भी फूड पॉइजनिंग हो सकती है. डॉक्टरों का कहना है कि दोनों चीजें एक साथ खाने से समस्या और बढ़ गई होगी.
सलाह
गर्मी के मौसम में डॉक्टर लोगों को सलाह देते हैं कि:
हमेशा ताजा फल-सब्जी खाएं
कटा हुआ फल ज्यादा देर बाहर न रखें
खाने-पीने की चीजों की एक्सपायरी डेट जरूर चेक करें
बच्चों की जिद में भी सावधानी बरतें
यह घटना पूरे इलाके में चर्चा का विषय बन गई है। ग्रामीण अब सतर्क हो गए हैं. जिला प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग भी इस मामले की जांच कर रहा है ताकि आगे ऐसी घटनाएं न हों.




