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बच्‍चों के साथ पत्‍नी को करवाता था S*#, डार्क वेब पर अश्‍लील वीडियो; कैसे चाइल्‍ड पोर्न का रैकेट चला रहा था ये कपल?

बांदा पोक्सो कोर्ट ने चित्रकूट के कपल को सज़ा-ए-मौत सुनाई है. पति-पत्नी बच्चों का यौन शोषण करते थे और उनकी वीडियो को डार्क वेब पर डालते थे. इस अपराध को अंजाम देने के लिए वह आर्थिक तौर पर कमजोर बच्चों को चुनते थे.

बच्‍चों के साथ पत्‍नी को करवाता था S*#, डार्क वेब पर अश्‍लील वीडियो; कैसे चाइल्‍ड पोर्न का रैकेट चला रहा था ये कपल?
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( Image Source:  X-@jat2021034 )

Chitrakoot Couple Sentenced Death: अक्टूबर 2020 में देश में एक ऐसा मामला सामने आया, जिसने सब को हैरानी में डाल दिया. पूरा मामला जांच एजेंसियों को चाइल्ड पोर्नोग्राफी से जुड़े एक डिजिटल अलर्ट से शुरू हुआ. जिसमें, कहा गया था कि ये कंटेट भारत के ही किसी राज्य से डाला जा रहा था. इंटरपोल ने सीबीआई को इसकी जानकारी दी और जांच में सामने आया कि चित्रकूट से एक शख्स ये काम कर रहा है. यह सिर्फ एक तकनीकी संकेत नहीं था, बल्कि एक ऐसे नेटवर्क की आहट थी जो मासूम बच्चों को निशाना बना रहा था. 31 अक्टूबर 2020 को CBI ने एफआईआर दर्ज की और जांच की दिशा साफ हो गई.

कुछ ही हफ्तों बाद, 17 नवंबर 2020 को पेशे से उत्तर प्रदेश के इरिगेशन डिपार्टमेंट में इंजीनियर और बांदा के रहने वाले राम भवन को गिरफ्तार कर लिया गया. जांच आगे बढ़ी तो उसकी पत्नी दुर्गावती की भूमिका भी सामने आई और दिसंबर में उसे भी हिरासत में ले लिया गया. आरोप लगा कि दोनों पति-पत्नी बच्चों के साथ यौन शोषण करते हैं और उनका वीडियो इंटरनेट पर डालते हैं.

क्या था कपल का खास प्लान?

कपल ने अपराध को अंजाम देने के लिए खास प्लान तैयार किया हुआ था. वे केवल आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के 5 से 16 साल तक के बच्चों को लालच और गिफ्ट देकर अपने जाल में फंसाया करते थे. यह इसलिए किया जाता था ताकि, उनके लिए कोई मज़बूती से आवाज़ न उठा सके और कपल अपनी शैतानियत आसानी से करते रहें.

ये कपल इन बच्चों को लालच देकर घर पर लाता और उनका यौन शोषण करता, हद तो यहां तक हो गई कि ये उनका वीडियो रिकॉर्ड करते और उसे डार्क वेब के जरिए इंटरनेशनव लेवल पर बेचते. जब CBI ने कपल के घर की तलाशी ली तो सारी पोल खुल गई. यहां से एजेंसी को एक पेन ड्राइव से 34 वीडियो और 679 तस्वीरें मिलीं. ये उन्हीं पीड़ितों का कंटेंट था, जि्न्हें कपल ने टारगेट किया था. यह भी सामने आया कि कंटेंट 47 देशों तक पहुंचाया गया था, जिनमें चीन, अमेरिका, ब्राज़ील और अफगानिस्तान शामिल थे. आरोपी के घर से आठ मोबाइल फोन, एक लैपटॉप, पेन ड्राइव, वेबकैम, सेक्स टॉय और ₹8 लाख नकद बरामद हुए.

आरोप है कि इन लोगों ने 50 से ज्यादा बच्चों का यौन शोषण किया था. बांदा मे POCSO कोर्ट के जज प्रदीप कुमार मिश्रा ने मामले की गंभीरता की देखते हुए आरोपी दोषी राम भवन और उनकी पत्नी दुर्गावती को सज़ा-ए-मौत सुनाई. इससे दो दिन पहले, 18 फरवरी 2026 को अदालत ने दोनों को दोषी करार दिया था, दोषसिद्धि के बाद उन्हें जेल भेज दिया गया था और अब सजा का ऐलान कर दिया गया.

क्या है पूरा मामला?

अक्टूबर 2020 में दोनों पति-पत्नी के जरिए किए जा रहे इस नाजायज़ काम से पर्दा उठा, जिसने पूरे देश को झकझोर दिया. केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) को इंटरपोल से इनपुट मिला कि एक भारतीय फोन नंबर से बाल यौन शोषण से जुड़ा कंटेंट इंटरनेशल लेवल पर पब्लिश किया जा रहा है. यह सिर्फ एक डिजिटल अलर्ट नहीं था. यह एक ऐसे नेटवर्क का संकेत था, जो बच्चों की जिंदगी से खेल रहा था.

इंटरपोल से मिले इनपुट के आधार पर CBI ने 31 अक्टूबर 2020 को एफआईआर दर्ज की. जांच तेज हुई और 17 नवंबर 2020 को बांदा के रामभवन को गिरफ्तार कर लिया गया. जांच के दौरान ऐसे सबूत मिले जिनसे उनकी पत्नी दुर्गावती की भूमिका भी सामने आई. इसके बाद दिसंबर में उसे भी हिरासत में ले लिया गया. रामभवन उत्तर प्रदेश के इरिगेशन डिपार्टमेंट में जूनियर इंजीनियर था.

अभियोजन के मुताबिक, कपल चित्रकूट और आसपास के जिलों में आर्थिक तौर पर कमजोर परिवारों के बच्चों को निशाना बनाता था. जांच में सामने आया कि 5 से 16 साल तक के बच्चों को गिफ्ट और लालच देकर फंसाता था और उनका यौन शोषण किया जाता था.

अदालत को बताया गया कि बच्चों के साथ यौन शोषण किया गया और इन कामों को लैपटॉप के कैमरे और मोबाइल गैजेट्स से रिकॉर्ड किया गया. कपल इन वीडियो और तस्वीरों को रिकोर्ड करके डार्क वेब पर अपलोड किया करता था.

जांच में क्या आया सामने?

जांच के दौरान CBI को एक पेन ड्राइव बरामद हुई, जिसमें 34 वीडियो और 679 तस्वीरें थीं, जिनमें नाबालिग बच्चे दिखाई दे रहे थे. डिजिटल फोरेंसिक विश्लेषण ने इन कंटेंट को सीधे आरोपियों से जोड़ा. जांच में यह भी सामने आया कि यह कंटेंट 47 देशों के खरीदारों तक भेजी गई थी, जिनमें चीन, अमेरिका, ब्राज़ील और अफगानिस्तान शामिल थे.

आरोपी के घर से गिरफ्तारी से आठ मोबाइल फोन, एक लैपटॉप, पेन ड्राइव, वेबकैम, सेक्स टॉय और ₹8 लाख कैश बरामद किए गए थे.

गिरफ्तारी के 88 दिन बाद करीब 700 पन्नों की चार्जशीट दाखिल की गई. इसमें पीड़ितों की मेडिकल जांच रिपोर्ट, बच्चों और गवाहों के बयान और ऑनलाइन डिस्ट्रीब्यूशन नेटवर्क से जुड़े डिजिटल सबूत शामिल थे. मुकदमे के दौरान कुल 74 गवाहों से पूछताछ की गई. CBI ने कई लोगों का बयान दर्ज किया जिसमें 4 से 42 साल की आयु के लोग शामिल थे.

POCSO अदालत से जुड़े अधिवक्ता कमल सिंह ने बताया कि यह मामला इंटेरनेशनल खुफिया इनपुट के आधार पर शुरू हुआ था. उन्होंने कहा,"जांच में शोषण और ऑनलाइन सर्कुलेशन का एक वेल प्लान्ड पैटर्न सामने आया. डिजिटल सबूत दोषसिद्धि साबित करने में काफी काम आए.

पत्नी को लेकर कोर्ट ने क्या कहा?

अदालत ने पाया कि रामभवन सीधे तौर पर यौन शोषण और वीडियो रिकॉर्डिंग में शामिल थे. वहीं दुर्गावती को भी इसमें इतना ही जिम्मेदार ठहराया गया. अदालत ने कहा कि दुर्गावती ने न सिर्फ शोषण में भागीदारी की, बल्कि जांच के दौरान गवाहों पर दबाव डालने और समझौते की कोशिश भी की.

अभियोजन पक्ष का कहना था कि जब माता-पिता जैसी भूमिका निभाने वाले लोग ही इस तरह के अपराध में शामिल हों, तो इससे बच्चों के मानसिक आघात और गहरा हो जाता है, यह अपराध किसी एक घटना का नहीं, बल्कि एक सोची-समझी और लंबे समय तक चलने वाली प्रक्रिया का हिस्सा था.

पीड़ितों को मुआवज़ा, दोषियों को सज़ा-ए-मौत

सजा सुनाते समय जज प्रदीप कुमार मिश्रा ने कहा आरोपियों द्वारा किए गए कृत्य इतने गंभीर हैं कि वे समाज की नैतिकता और बच्चों की सुरक्षा की नींव पर प्रहार करते हैं. कोर्ट ने दोनों को मौत की सज़ा सुनाई. ज़िला मजिस्ट्रेट ने निर्देष दिया कि हर चिन्हित पीड़ित को निर्वास और चिकित्सीय सहायता के लिए 10 लाख रुपये का मुआवजा देने का ऐलान किया है.

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