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लखनऊ से उठा 'ब्राह्मण बवंडर' दिल्ली दरबार पहुंचा... PM से लेकर CM तक 'कंट्रोल' में जुटे! सपा PDA में 'P फॉर पंडित' की तैयारी कर रही?

BJP के तीन कोर वोटबैंक में से सबसे बड़े मतदाता वाली बिरादरी ने एक बवंडर उठा दिया है. लखनऊ में ब्राह्मण सहभोज के नाम पर आयोजित BJP विधायकों की बैठक के बाद पार्टी के अंदर अजीब से बेचैनी है. हर तरफ़ उठते सवालों, शंकाओं और सियासत के बीच समाधान के रास्ते तलाशे जा रहे हैं. लखनऊ से दिल्ली तक और सीएम से लेकर पीएम तक सब इस मामले को लेकर ‘कंट्रोल या डैमेज कंट्रोल’ के मोड में हैं. वहीं, सपा मौक़े पर चौके के लिए तैयार नज़र आ रही है.

लखनऊ से उठा ब्राह्मण बवंडर दिल्ली दरबार पहुंचा... PM से लेकर CM तक कंट्रोल में जुटे! सपा PDA में P फॉर पंडित की तैयारी कर रही?
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नवनीत कुमार
Edited By: नवनीत कुमार

Updated on: 1 Jan 2026 1:48 PM IST

“जो चल सको तो कोई ऐसी चाल चल जाना, मुझे ग़ुमां भी ना हो और तुम बदल जाना

इतनी आग हो किरदार में तो क्या किया जाए, सो लाज़मी है तेरे पैरहन का जल जाना”

इस शेर में शायर अहमद फ़राज़ अपने हमसफ़र के लिए फ़रमा रहे हैं कि ऐसी कोई चाल चलना कि मुझे ख़बर भी ना हो और तुम बदल जाना. तुम्हारे किरदार में इतनी आग है तो कपड़ों का जल जाना लाज़मी है. ये शेर BJP में ब्राह्मणों को लेकर चल रही उथल-पुथल का आईना है. लखनऊ में हुई सिर्फ़ एक बैठक ने दिल्ली हाईकमान तक सबके माथे पर चिंता की लकीरें खींच दी हैं. सवाल ये है कि BJP के ब्राह्मण विधायकों की ये बैठक सिर्फ़ एकजुटता दिखाने वाला ‘पावर शो’ तक ही सीमित रहेगी या बात इससे आगे भी जाएगी? क्योंकि, ब्राह्मण विधायकों की बैठक के बाद BJP में लखनऊ से दिल्ली तक कई मोर्चों पर अचानक बहुत सारी तस्वीरें आकार ले रही हैं.

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23 दिसंबर की बैठक के बाद PM मोदी एक्टिव!

लखनऊ में 23 दिसंबर 2025 को कुशीनगर के BJP विधायक पीएन पाठक ने अपने सरकारी आवास पर एक सहभोज का आयोजन किया. बताया गया है कि BJP के करीब 40 ब्राह्मण विधायक और MLC इस बैठक में शामिल हुए. इस सियासी जुटान और विप्र समाज के उत्थान को लेकर हुए मंथन की तस्वीरें भी सामने आईं. इसके बाद सबसे पहला सवाल BJP से ही पूछा जाना था. प्रदेश अध्यक्ष पंकज चौधरी के सामने जब ये सवाल गूंजा, तो उन्होंने मुद्दे को समझने के बजाय मीडिया के सामने चेतावनी दे डाली. अपने ब्राह्मण विधायकों को सख़्त संदेश दे दिया. यहीं से बात बिगड़ने लगी. BJP में ब्राह्मण नेताओं ने दबी आवाज़ में ये कहना शुरू कर दिया कि विप्र समाज की समस्याओं और मुद्दों को समझने के बजाय पूरे समाज को ही धमकाया जा रहा है. इसके बाद से पार्टी में सियासी हलचल बढ़ने लगी. बात ज़्यादा ना बिगड़ जाए और बहुत देर ना जाए, इसके लिए दिल्ली में हाईकमान फौरन हरक़त में आया.

23 दिसंबर को पार्टी के ब्राह्मण विधायकों की बैठक के 72 घंटे के अंदर यानी 26 दिसंबर को यूपी के डिप्टी सीएम बृजेश पाठक दिल्ली बुलाए गए. उनहोंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से उनके आवास पर भेंट की. यहां गुलदस्ता देते हुए एक ख़ास तस्वीर सामने आई. उनके साथ वाराणसी के महापौर अशोक तिवारी भी मौजूद थे. अक्सर पीएम मोदी के साथ मुलाक़ात करने वाले पार्टी नेताओं की तस्वीर रूम के अंदर की होती है. लेकिन, यहां मुद्दा संवेदनशील था. शायद इसीलिए मुलाक़ात खुले आसमान के नीचे की गई, ताकि उसका संदेश भी आकाश की तरह सकारात्मक विस्तार वाला हो. इतना ही नहीं ब्रजेश पाठक ने खुद सोशल मीडिया पर पीएम के साथ अपनी तस्वीर साझा की और इसे एक 'प्रेरणादायी' भेंट बताया. हालांकि आधिकारिक तौर पर कहा जा रहा है कि वो वाराणसी में होने वाली नेशनल वॉलीबॉल चैंपियनशिप का निमंत्रण देने गए थे, लेकिन राजनीतिक जानकारों का मानना है कि पाठक ने ब्राह्मण समाज की भावनाओं, क्षेत्रीय समीकरणों और विधायकों की बातों को सीधे प्रधानमंत्री तक पहुंचा दिया है. ब्रजेश पाठक खुद यूपी में ब्राह्मण समाज का बड़ा चेहरा माने जाते हैं. ऐसे में पार्टी के ब्राह्मण विधायकों की बैठक के बाद मची खलबली के बीच उनका प्रधानमंत्री मोदी से उनके घर के बगीचे में मिलना सामान्य मुलाक़ात से कहीं आगे का विषय है.

एक पाठक PM से मिले, दूसरे पाठक का चौधरी पर ‘पलटवार’!

यूपी BJP के ब्राह्मण विधायकों की बैठक को लेकर एक ओर बृजेश पाठक ने प्रधानमंत्री मोदी से मुलाक़ात की. वहीं, इस भेंट के 72 घंटे में ही दूसरे पाठक यानी पीएन पाठक ने यूपी BJP अध्यक्ष पंकज चौधरी की चेतावनी पर उन्हें जवाब दिया. ब्राह्मण सहभोज वाली बैठक के आयोजक पीएन पाठक ने 29 दिसंबर 2027 को दोपहर 2 बजकर 42 मिनट पर एक पोस्ट लिखी. कुशीनगर के विधायक पीएन पाठक ने अपने X अकाउंट पर लिखा- “जय श्रीराम, जय सनातन, जय भाजपा. सनातन परंपरा में ब्राह्मण को समाज का मार्गदर्शक, विचारक और संतुलनकर्ता माना गया है. उन्होंने कहा कि जहां ब्राह्मण एकत्र होता है, वहां ज्ञान, विवेक और चिंतन का मंथन होता है, जो हिंदू अस्मिता को सशक्त बनाता है. उसका धर्म समाज को जोड़ना है, विभाजन नहीं होता है". इस पोस्ट को लिखकर विधायक पीएन पाठक ने यूपी BJP और BJP हाईकमान को टैग कर दिया.

पीएन पाठक ने अपनी पोस्ट को अपने X हैंडल पर पिन कर दिया, ताकि जो भी इस ख़बर से संबंधित पोस्ट देखना चाहे, उसे पहली ही नज़र में ये दिख जाए. साथ ही इस पर सोशल मीडिया ट्रैफिक भी बढे. दरअसल, जो चीज़ें सोशल मीडिया पर पिन की जाती हैं, उनकी रीच यानी पहुंच तेज़ी से फैलती है और दायरा भी बड़ा हो जाता है. हालांकि, पीएन पाठक ने भी इसी मंशा से अपनी जवाबी पोस्ट को पिन किया, ये पक्के तौर पर नहीं कहा जा सकता. लेकिन, इतना तय है कि जो बात उन्होंने कही उस पर लखनऊ से दिल्ली तक नज़र रखी जा रही है. इसीलिए दिल्ली हाईकमान का दूसरा एक्शन दिखा.

PM के घर ब्राह्मण नेता की कुटुम्ब संग तस्वीर

29 दिसंबर को पीएन पाठक ने ब्राह्मण सहभोज वाली मीटिंग को लेकर फिर तेवर दिखाए और जवाब भी दिया. वहीं, 30 दिसंबर को दिल्ली में एक और ब्राह्मण नेता की प्रधानमंत्री मोदी के साथ ख़ास तस्वीर दिखी. 30 दिसंबर को राज्यसभा के मुख्य सचेतक और यूपी BJP के पूर्व अध्यक्ष लक्ष्मीकांत वाजपेयी पीएम मोदी के घर पहुंचे. वाजपेयी के साथ उनके बेटे, बहू और पत्नी समेत पूरा परिवार था. प्रधानमंत्री आवास में बगीचे में ये मुलाक़ात हुई. पीएम मोदी ने वाजपेयी की पोती के साथ बातचीत की. प्रधानमंत्री मोदी के आवास में बंद कमरे की नहीं, बल्कि खुले आसमान के नीचे बगीचे की तस्वीरें साझा हुईं. ये महज़ शिष्टाचार मुलाक़ात थी या यूपी में अपने ब्राह्मण विधायकों की नाराज़गी को शांत करने का संदेश? साफ तौर पर कुछ नहीं कहा जा सकता, लेकिन समझने वाले अपनी-अपनी समझ के अनुसार इन तस्वीरों की समीक्षा और चर्चा कर रहे हैं.

दिल्ली में पीएम, तो लखनऊ में सीएम का ‘एक्शन’!

दिल्ली में ब्राह्मण नेताओं से प्रधानमंत्री मोदी की मुलाक़ातों की तस्वीरें सामने आईं, तो वहीं यूपी में भी मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ एक्शन मोड में दिखे. 23 दिसंबर को पीएन पाठक के ब्राह्मण सहभोज में शामिल देवरिया से BJP विधायक शलभमणि त्रिपाठी ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से मुलाक़ात की. 30 दिसंबर को हुई इस मुलाक़ात की तस्वीर भी सामने आई. शलभमणि ने अपने सोशल मीडिया हैंडल पर ये तस्वीर शेयर की, जिसमें मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ मुस्कुराते हुए नज़र आ रहे हैं. इस तस्वीर को शेयर करते हुए BJP विधायक शलभमणि ने अपने सोशल मीडिया अकाउंट पर लिखा- एक बार पुन: बधाई देवरिया, मुख्यमंत्री जी ने दी 203 करोड़ की सौग़ात. देवरिया कसया सड़क बनेगी फोर लेन". इस पोस्ट के साथ ही विधायक शलभमणि ने सड़क के चौड़ीकरण को लेकर प्रकाशित किया गया टेंडर भी शेयर किया है. ताकि बात उतनी ही समझी जाए, जितनी लिखी गई है. हालांकि, ये तो अहद-ए-सियासत है. यहां कम लिखे को ज़्यादा समझना और बहुत कम लिखे को बहुत ज़्यादा समझने का दस्तूर है.

केशव से मिले ‘ब्राह्मण सहभोज’ वाले विधायक

बहरहाल, जिस वक्त BJP में लखनऊ से लेकर दिल्ली तक ब्राह्मण समाज को सकारात्मक संदेश देने की कोशिश हो रही है, उसी बीच कुछ और भी पकने की ख़बरें हैं. मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के विरोधी माने जाने वाले डिप्टी सीएम केशव मौर्य के साथ बांदा के BJP विधायक प्रकाश द्विवेदी दिखे. हालांकि, उनके साथ कुछ और लोग भी तस्वीर में नज़र आए, लेकिन प्रकाश द्विवेदी भी उन BJP विधायकों में शामिल हैं, जो सहभोज में भागीदार थे. बांदा के विधायक प्रकाश भी कई महीनों से असंतुष्ट बताए जा रहे हैं. प्रशासन के साथ टकराव को लेकर कई बार उन्हें बैकफुट पर आना पड़ा था, जिसकी वजह से उनकी नाराज़गी बरक़रार है.

ब्राह्मणों की ख़ातिर PDA में ‘P’ के मायने बदलेगी सपा?

यूपी में क़रीब 14% आबादी वाला ब्राह्मण समाज BJP का कोर वोटर माना जाता है. ऐसे में इस बिरादरी के विधायकों की लामबंदी को पार्टी अपने लिए चुनावी संकट की तरह देख रही है. यूपी संगठन के शुरुआती तेवर ने बात और बिगाड़ दी है. वहीं, BJP के अंदर उपजी इस आपदा को समाजवादी पार्टी अवसर के रूप में देख रही है. ब्राह्मण विधायकों की बैठक बाद जिस तरह से मामला हर तरफ़ कई तस्वीरों, मुलाक़ातों और बयानों के रूप में विस्तार ले रहा है, उसे देखते हुए सपा पूरी तरह एक्टिव हो चुकी है. सपा के राष्ट्रीय महासचिव शिवपाल यादव ने तो BJP के ब्राह्मण नेताओं को खुला ऑफर दे दिया है. उन्‍होंने कहा कि सपा में ब्राह्मण समाज को पूरा सम्मान दिया जाता रहा है. सपा हमेशा से सभी वर्गों, विशेषकर ब्राह्मण, पिछड़े, दलित और अल्पसंख्यक समाज को सम्मान देने का कार्य करती रही है. जो ब्राह्मण नेता BJP से सपा में आना चाहते हैं, उनका स्वागत है. वहीं, सपा की ओर से नेता प्रतिपक्ष माता प्रसाद पांडेय ने ब्राह्मणों के साथ बैठक के लिए कार्यक्रम तय किया है. उन्होंने कहा है कि इस बैठक में BJP के ब्राह्मण विधायकों को भी बुलाया जाएगा. साथ ही उन्होंने BJP सरकार पर ब्राह्मण समाज के विधायकों की अनदेखी का आरोप भी लगाया. माता प्रसाद पांडेय ने कहा है कि उपेक्षा के चलते ही ब्राह्मण विधायकों ने एक बैठक आयोजित की, जिसे BJP ने प्रतिबंधित कर दिया. यह कदम लोकतांत्रिक मूल्यों के खिलाफ है, क्योंकि सभी को बैठक करने की स्वतंत्रता होनी चाहिए. सपा नेताओं के बयानों से ज़ाहिर है कि वो BJP के अंदर से उभरे इस संकट को अपने समीकरण साधने का ज़रिया बनाने की कोशिश में है. हालांकि, BJP के नाराज़ ब्राह्मण विधायक और सहभोज में शामिल होने वाले विप्र जनप्रतिनिधियों में से कितने नेता सपा की चाल और सियासी जाल में फंसेंगे, इस पर अभी कुछ भी कहना मुनासिब नहीं.

पंकज चौधरी के ‘मार्गदर्शक’ रमापति बनेंगे संकटमोचक?

ब्राह्मण विधायकों की बैठक के बाद जिस तरह से पंकज चौधरी ने चेतावनी जारी की थी, उसके बाद पार्टी के भीतर ही इसकी आलोचना हो रही है. चुनाव के मद्देनज़र ब्राह्मण विधायकों की बात को संवेदनशीलता के साथ समझने और विचार करने के बजाय धमकी भरे अंदाज़ में रोकने की मंशा ने मामले को जटिल बना दिया है. इसीलिए ख़बर है कि चौधरी के राजनीतिक मार्गदर्शक रमापति राम त्रिपाठी को मोर्चा संभालने के लिए कहा गया है.

2007 से 2010 तक वो यूपी BJP के अध्यक्ष भी रह चुके हैं. 73 साल के रमापति राज्य संगठन में वरिष्ठ और ब्राह्मण नेताओं के बीच गहरी पैठ वाले नेता माने जाते हैं. रमापति त्रिपाठी को नाराज़ ब्राह्मणों को मनाने के लिए लामबंदी की ज़िम्मेदारी दी गई है. बताया जाता है कि यूपी BJP के प्रदेश अध्यक्ष पंकज चौधरी भी रमापति त्रिपाठी पर बहुत भरोसा करते हैं. वो यूपी से जुड़े जटिल सियासी मुद्दों पर उनकी सलाह लेते रहे हैं. रमापति त्रिपाठी यूपी BJP के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष हैं. राज्य के बड़े ब्राह्मण सियासी चेहरों में उनकी गिनती होती है.

पंकज चौधरी के अध्यक्ष बनने के बाद से ही ये कयास लगाए जा रहे थे कि रमापति त्रिपाठी की अब राज्य के सांगठनिक ढांचे में उनकी भूमिका अहम हो सकती है. लेकिन, उन्होंने भी ये नहीं सोचा होगा कि पंकज चौधरी की सरपरस्ती में उन्हें सबसे पहले अपनी ही बिरादरी के नाराज़ नेताओं को मनाने का टास्क मिल जाएगा. यानी दो पूर्व प्रदेश अध्यक्ष रमापति राम त्रिपाठी और लक्ष्मीकांत वाजपेयी से लेकर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ तक और डिप्टी सीएम बृजेश पाठक से लेकर प्रधानमंत्री मोदी तक, सब एक ही ‘मिशन ब्राह्मण’ में जुटे हैं.

ब्राह्मण विधायक सिर्फ़ अपनी जंग लड़ेंगे या समाज की?

BJP में यूपी से लेकर दिल्ली तक ब्राह्मणों को मनाने और साधने की ये क़वायद सियासी है या सच्ची? क्या BJP के नाराज़ ब्राह्मण विधायक अपने तेवर सिर्फ़ चुनावी वजहों से दिखा रहे हैं या वो गंभीरता के साथ विप्र समाज के उत्थान के लिए एकजुट हुए हैं? सवाल कई हैं, लेकिन कोई ठोस जवाब अब तक नहीं मिला है. ब्राह्मणों को लेकर BJP में चल रही उथल-पुथल पर सिर्फ़ लखनऊ और दिल्ली ही नहीं बल्कि पूरे प्रदेश के विप्र समाज की निगाहें हैं. यूपी विधानसभा में इस वक़्त कुल 52 ब्राह्मण विधायक हैं. इनमें से 46 BJP से हैं. वहीं, विधान परिषद की बात करें, तो यहां BJP के 79 में से 16 MLC ब्राह्मण बिरादरी से हैं.

अगर बात सिर्फ़ सियासी तौर पर रूठने-मनाने तक सीमित रही तो जनप्रतिनिधि इस लड़ाई में जीत जाएंगे. लेकिन मुद्दा विप्र बिरादरी की बेहतरी की दिशा तय करने तक पहुंचा तो जीत पूरे समाज की होगी. लेकिन, उसके लिए ब्राह्मण विधायकों को सिर्फ़ अपनी परेशानियां ही नहीं बल्कि समाज की समस्याओं का समाधान और विप्र बिरादरी के सम्पूर्ण उत्थान के लिए संगठन और सरकार को मनाना होगा. अगर ऐसा मुमकिन हो सका तो 2026 में ही ब्राह्मण ये तय कर सकेंगे कि 2027 में उन्हें क्या करना है.

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