भैरव का अवतार या किसी साधु-संत की आत्मा! कुत्ते ने रोकी भगवान की परिक्रमा तो माथा टेकने पहुंच गए गांव वाले
उत्तर प्रदेश के बिजनौर जिले के नगीना तहसील स्थित नंदपुर गांव में एक अनोखी घटना ने सबका ध्यान खींचा है. यहां एक कुत्ता पिछले कई दिनों से हनुमान और दुर्गा की मूर्तियों की लगातार परिक्रमा कर रहा है. बिना खाए-पिए घूमते इस कुत्ते को कुछ लोग दैवीय शक्ति से जोड़ रहे हैं, जबकि पशु चिकित्सकों का कहना है कि यह न्यूरोलॉजिकल बीमारी का मामला हो सकता है.
उत्तर प्रदेश के बिजनौर जिले में नगीना तहसील के अंतर्गत आने वाले नंदपुर गांव (या नंदपुर खुर्द) में इन दिनों एक बहुत ही अनोखी और हैरान करने वाली घटना हो रही है, जिसकी वजह से पूरा इलाका चर्चा में है। यहां एक प्राचीन हनुमान मंदिर है, जहां एक कुत्ता पिछले कई दिनों से लगातार देवी-देवताओं की मूर्तियों की परिक्रमा कर रहा है. यह बात इतनी चर्चित हो गई है कि दूर-दूर से लोग इसे देखने के लिए मंदिर पहुंच रहे हैं.
घटना की शुरुआत कैसे हुई?सोमवार (13 जनवरी 2026 के आसपास) की सुबह करीब 4 बजे से यह कुत्ता मंदिर में आया और हनुमान जी की मूर्ति के चारों ओर चक्कर लगाने लगा. पहले दो-तीन दिनों तक वह लगातार हनुमान जी की परिक्रमा करता रहा. बीच-बीच में थोड़ा आराम करता, लेकिन फिर से उसी तरह घूमना शुरू कर देता. उसके बाद उसने मंदिर परिसर में ही मौजूद मां दुर्गा की मूर्ति की परिक्रमा शुरू कर दी. अब वह कई दिनों से (करीब 4-5 दिन या इससे ज्यादा) बिना रुके, बिना थके एक ही दिशा में गोल-गोल घूम रहा है.
कुत्ते की हालत और लोगों का व्यवहार
हैरानी की बात यह है कि कुत्ता इन दिनों में कुछ भी नहीं खा रहा और न ही पानी पी रहा. ग्रामीणों ने उसके सामने दूध, रोटी और अन्य चीजें रखीं, लेकिन उसने कुछ भी नहीं छुआ. इतने लंबे समय तक भूखे-प्यासे रहकर भी वह परिक्रमा करता रहा. थकान होने पर वह थोड़ा आराम करता है. ग्रामीणों ने उसके लिए मंदिर में एक गद्दा या चबूतरा जैसी जगह बना दी है, जहां वह बैठकर विश्राम करता है. ठंड से बचाने के लिए मंदिर परिसर में पॉलीथीन भी लगाई गई है ताकि कुत्ते को कोई तकलीफ न हो.
दर्शन करने की बढ़ रही है भीड़
लोगों की भीड़ इतनी बढ़ गई है कि अब मंदिर के बाहर प्रसाद, खिलौने और छोटी-मोटी दुकानें भी लग गई हैं. सैकड़ों-हजारों की संख्या में श्रद्धालु और तमाशबीन आ रहे हैं. कई लोग कुत्ते के सामने माथा टेक रहे हैं और पूजा-अर्चना कर रहे हैं. कुछ लोग मानते हैं कि इस कुत्ते में किसी साधु, ऋषि-मुनि या संत की आत्मा का वास है. कुछ इसे भगवान भैरवनाथ (भैरव) का अवतार या रूप मानकर पूज रहे हैं. मंदिर में अब लगातार भजन-कीर्तन, आरती और पूजा-पाठ का सिलसिला चल रहा है। लोग जय श्री राम, जय माता दी के नारे लगा रहे हैं.
डॉक्टरों की राय क्या है?
इस बीच, बिजनौर से पशु चिकित्सकों (वेटरनरी डॉक्टर्स) की एक टीम जांच करने के लिए मंदिर पहुंची. डॉक्टरों ने कुत्ते की जांच की और बताया कि उसके सिर पर पहले कोई चोट लगी हुई है या दिमाग से जुड़ी कोई समस्या है. इसी वजह से उसका दिमागी संतुलन (मेंटल बैलेंस) बिगड़ गया है। इस स्थिति में कुत्ते को एक ही दिशा में बार-बार गोल-गोल घूमने की आदत पड़ जाती है. यह एक तरह की न्यूरोलॉजिकल समस्या या व्यवहार संबंधी बीमारी हो सकती है, जो चोट, इंफेक्शन या अन्य कारणों से होती है। डॉक्टरों का कहना है कि यह कोई चमत्कार नहीं, बल्कि कुत्ते की मेडिकल कंडीशन है.
ग्रामीणों का विरोध और बहस
लेकिन स्थानीय लोग और श्रद्धालु डॉक्टरों की इस बात से सहमत नहीं हैं. उनका कहना है कि बिना खाए-पिए, बिना थके इतने दिनों तक लगातार परिक्रमा करना कोई साधारण बीमारी से नहीं हो सकता. उनके अनुसार यह जरूर किसी दैवीय शक्ति, भगवान की कृपा या चमत्कार का संकेत है. इस वजह से आस्था और विज्ञान के बीच बहस छिड़ गई है. कुछ लोग इसे आस्था का प्रतीक मान रहे हैं, तो कुछ इसे अंधविश्वास कह रहे हैं और कुत्ते को इलाज दिलाने की बात कर रहे हैं. फिलहाल यह पूरा मामला आस्था, विश्वास, जिज्ञासा, अंधविश्वास और वैज्ञानिक सोच का मिश्रण बन गया है. वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है और लोग दूर-दूर से इसे देखने आ रहे हैं. कुत्ता अभी भी मंदिर में परिक्रमा कर रहा है और घटना दिन-ब-दिन और ज्यादा चर्चित होती जा रही है.





