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राजस्थान के सांवलिया सेठ मंदिर का खुला खजाना, रकम सुनकर आपको भी नहीं होगा यकीन; एक महीने से हो रही नोटों की गिनती

राजस्थान ही नहीं, गुजरात, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, उत्तर प्रदेश और देश के कोने-कोने से लाखों श्रद्धालु सांवलिया सेठ के दर्शन करने आते हैं. उनकी मनोकामना पूरी होने पर लोग दिल खोलकर दान करते हैं. इस बार तो सारे रिकॉर्ड ध्वस्त हो गए हैं दीपावली के ठीक बाद, यानी 19 नवंबर 2025 को मंदिर के भंडार को खोला गया.

राजस्थान के सांवलिया सेठ मंदिर का खुला खजाना, रकम सुनकर आपको भी नहीं होगा यकीन; एक महीने से हो रही नोटों की गिनती
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( Image Source:  X : @KapilShrimali )
रूपाली राय
Edited By: रूपाली राय

Updated on: 28 Nov 2025 7:48 AM IST

राजस्थान के चित्तौड़गढ़ जिले में स्थित भगवान श्री सांवलिया सेठ जी का मंदिर पूरे देश में अपनी अपार श्रद्धा और चमत्कारों के लिए प्रसिद्ध है. लोग प्यार से इन्हें 'सांवरा सेठ' या 'सांवलिया सेठ' कहकर पुकारते हैं. इस मंदिर का दानपात्र (भंडार) जब भी खुलता है, करोड़ों रुपये का चढ़ावा निकलता है और हर बार पुराना रिकॉर्ड टूट जाता है. इस बार तो सारे रिकॉर्ड ध्वस्त हो गए हैं दीपावली के ठीक बाद, यानी 19 नवंबर 2025 को मंदिर के भंडार को खोला गया.

यह भंडार करीब दो महीने बाद खुला था. भोग-आरती के बाद मंदिर मंडल की प्रशासनिक अधिकारी श्रीमती प्रभा गौतम, मंदिर मंडल अध्यक्ष हजारी दास वैष्णव और अन्य सदस्यों की मौजूदगी में ताले खोले गए. गिनती का काम शुरू हुआ तो सभी हैरान रह गए. सिर्फ पांच चरणों की गिनती में ही 40 करोड़ 33 लाख 39 हजार रुपये से ज्यादा की नकदी निकल चुकी है. अभी तो छठा चरण चल रहा है और बहुत सारे नोटों की गिनती बाकी है. माना जा रहा है कि कुल राशि 45-50 करोड़ रुपये या उससे भी ज्यादा हो सकती है, जो अब तक का सबसे बड़ा रिकॉर्ड होगा.

सत्संग हॉल में गिनती का इंतजाम

पहले भंडार की गिनती मंदिर के चौक में होती थी, लेकिन श्रद्धालुओं की भारी भीड़ और सुविधा को देखते हुए इस बार मंदिर परिसर में बने बड़े सत्संग हॉल में गिनती का इंतजाम किया गया है. करीब 200 कर्मचारी दिन-रात नोट गिनने में जुटे हैं. पहले 500 रुपये के नोट छांटे जाते हैं, फिर 200 रुपये के और उसके बाद छोटे नोटों की गिनती होती है. सारी नकदी को बोरो (बड़े थैलों) में भरकर सत्संग हॉल लाया जाता है.

हर 11 साल में खोला जाता है भंडार

सुरक्षा के बहुत पुख्ता इंतजाम है. पूरे हॉल में सीसी टीवी कैमरे लगे हैं, हर जगह सुरक्षाकर्मी तैनात हैं और मोबाइल फोन व पर्स ले जाना भी पूरी तरह प्रतिबंधित है. अभी सिर्फ भंडार की नकदी की गिनती हो रही है. इसके बाद मंदिर कार्यालय में जमा चढ़ावा, भेंट कक्ष में आए दान, ऑनलाइन आए पैसे, मनीऑर्डर से आई राशि और सोना-चांदी, पुराने सिक्के तथा विदेशी मुद्रा की अलग से छंटनी और तौल होगी यानी कुल चढ़ावा इससे भी बहुत ज्यादा होगा. सांवलिया सेठ जी का भंडार साल में 11 बार खोला जाता है. दीपावली के बाद दो महीने में एक बार और होली के बाद डेढ़ महीने में एक बार विशेष रूप से खोला जाता है. हर महीने औसतन 26 से 27 करोड़ रुपये निकलते थे, लेकिन इस बार दीपावली के बाद का चढ़ावा सारे रिकॉर्ड तोड़ रहा है.

दिल खोलकर करते है दान

राजस्थान ही नहीं, गुजरात, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, उत्तर प्रदेश और देश के कोने-कोने से लाखों श्रद्धालु सांवलिया सेठ के दर्शन करने आते हैं. उनकी मनोकामना पूरी होने पर लोग दिल खोलकर दान करते हैं. यही वजह है कि सांवलिया सेठ का खजाना हर बार बढ़ता ही जा रहा है और इस बार तो यह अब तक का सबसे बड़ा चढ़ावा साबित हो रहा है.

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